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Chapter 8

🎓 Class 6📖 Malhar📖 8 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~12 min
Chapter 7Chapter 7 of 12Chapter 9

Chapter 8Study Notes

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सत्रिया नृत्य का परिचय

Explanation

सत्रिया नृत्य का परिचय

सत्रिया नृत्य असम राज्य का एक प्रमुख पारंपरिक नृत्य है, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके जीवन की कथाओं को प्रस्तुत करता है। यह नृत्य 15वीं शताब्दी के महान संत और नाटककार महापुरुष शंकरदेव द्वारा प्रारंभ किया गया था। सत्रिया नृत्य का उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को जागृत करना है। यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह भक्ति और संस्कृति का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्रिया नृत्य में कलाकार पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं और शास्त्रीय संगीत की ताल पर नृत्य करते हैं। इसमें भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को नाटकीय रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस नृत्य की विशेषता इसकी सरलता, भक्ति और शास्त्रीयता है। सत्रिया नृत्य असम के सत्रों (मठों) में नियमित रूप से प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य असम की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।

  • सत्रिया नृत्य असम का पारंपरिक नृत्य है।
  • शंकरदेव ने इस नृत्य की स्थापना की।
  • यह भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं पर आधारित है।
  • सत्रिया नृत्य में भक्ति और आध्यात्मिकता का समावेश है।
  • कलाकार पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं।
  • असम के सत्रों में यह नृत्य नियमित रूप से होता है।
  • 📌 सत्रिया नृत्य: असम का पारंपरिक भक्ति नृत्य जो भगवान कृष्ण की कथाओं पर आधारित है।
  • 📌 शंकरदेव: असम के महान संत जिन्होंने सत्रिया नृत्य की स्थापना की।
  • 📌 सत्र: असम में धार्मिक मठ जहाँ सत्रिया नृत्य का आयोजन होता है।

सत्रिया नृत्य की विशेषताएँ

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सत्रिया नृत्य की विशेषताएँ

सत्रिया नृत्य की कई विशेषताएँ हैं जो इसे अन्य नृत्यों से अलग बनाती हैं। सबसे पहली विशेषता इसका धार्मिक स्वरूप है। यह नृत्य भगवान कृष्ण की भक्ति में समर्पित है और इसे भजन-कीर्तन के साथ प्रस्तुत किया जाता है। दूसरी विशेषता इसकी शास्त्रीयता है। सत्रिया नृत्य में शास्त्रीय संगीत और नृत्य के नियमों का पालन किया जाता है। तीसरी विशेषता इसकी वेशभूषा है, जिसमें कलाकार पारंपरिक असमी पोशाक पहनते हैं, जैसे कि धोती, कुर्ता, और सिर पर मुकुट। चौथी विशेषता इसकी प्रस्तुति की शैली है, जो सरल, सौम्य और भावपूर्ण होती है। पाँचवीं विशेषता इसका सामूहिक प्रदर्शन है, जिसमें कई कलाकार एक साथ नृत्य करते हैं। यह नृत्य मुख्यतः असम के सत्रों में धार्मिक उत्सवों के दौरान प्रस्तुत किया जाता है। सत्रिया नृत्य में संगीत का बहुत महत्व है, जिसमें मृदंग, बाँसुरी, और ढोलक जैसे वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है।

  • सत्रिया नृत्य धार्मिक और भक्ति प्रधान है।
  • यह शास्त्रीय संगीत और नृत्य का पालन करता है।
  • कलाकार पारंपरिक असमी वेशभूषा पहनते हैं।
  • सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है।
  • वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है जैसे मृदंग और बाँसुरी।
  • असम के सत्रों में इसका आयोजन होता है।
  • 📌 मृदंग: एक प्रकार का पारंपरिक भारतीय ढोलक वाद्य यंत्र।
  • 📌 रासलीला: भगवान कृष्ण और गॉव की गोपियों के बीच नृत्य और प्रेम का दृश्य।
  • 📌 शास्त्रीय संगीत: भारतीय संगीत की वह शैली जो नियमबद्ध और परंपरागत होती है।

बिहू नृत्य का परिचय

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बिहू नृत्य का परिचय

बिहू नृत्य असम का एक जीवंत और उत्साहपूर्ण लोकनृत्य है, जो मुख्यतः असम के बिहू त्योहार के दौरान किया जाता है। यह नृत्य असम की कृषि संस्कृति और जीवनशैली का प्रतिनिधित्व करता है। बिहू नृत्य में युवा पुरुष और महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनकर नृत्य करते हैं।

Practice QuestionsChapter 8

15 practice questions with detailed answers

Q1.सत्रिया नृत्य किस राज्य का प्रमुख पारंपरिक नृत्य है और इसका मुख्य विषय क्या है?
A.A) असम, भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और जीवन की कथाएँ
B.B) पंजाब, गुरु नानक की शिक्षाएँ
C.C) राजस्थान, राजपूतों के युद्ध की कहानियाँ
D.D) तमिलनाडु, भगवान शिव की कथाएँ

Answer:

असम, भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और जीवन की कथाएँ

Explanation:

सत्रिया नृत्य असम राज्य का पारंपरिक नृत्य है जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके जीवन की कथाओं को प्रस्तुत करता है। यह नृत्य धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को जागृत करता है।

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Q2.सत्रिया नृत्य की स्थापना किस महापुरुष ने की थी और किस शताब्दी में?
A.A) महापुरुष शंकरदेव, 15वीं शताब्दी
B.B) तुकाराम, 17वीं शताब्दी
C.C) कबीरदास, 14वीं शताब्दी
D.D) सूरदास, 16वीं शताब्दी

Answer:

महापुरुष शंकरदेव, 15वीं शताब्दी

Explanation:

सत्रिया नृत्य की स्थापना 15वीं शताब्दी में महान संत और नाटककार महापुरुष शंकरदेव ने की थी। उन्होंने इस नृत्य के माध्यम से भक्ति और धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा दिया।

Easy
Q3.सत्रिया नृत्य में कलाकार कौन-कौन से पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं?
A.A) धोती, कुर्ता, सिर पर मुकुट
B.B) साड़ी, ब्लाउज, गहने
C.C) पैंट, शर्ट, टोपी
D.D) लुंगी, कमीज, टोपी

Answer:

धोती, कुर्ता, सिर पर मुकुट

Explanation:

सत्रिया नृत्य में कलाकार पारंपरिक असमी पोशाक पहनते हैं, जिसमें धोती, कुर्ता और सिर पर मुकुट शामिल होते हैं। यह वेशभूषा नृत्य की धार्मिक और शास्त्रीयता को दर्शाती है।

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Q4.सत्रिया नृत्य का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Answer:

सत्रिया नृत्य का मुख्य उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं को जागृत करना है। यह नृत्य भक्ति और संस्कृति का माध्यम है।

Explanation:

सत्रिया नृत्य धार्मिक उत्सवों में भगवान कृष्ण की भक्ति को प्रकट करता है। इसका उद्देश्य लोगों में भक्ति भाव और आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना है। यह नृत्य मनोरंजन के साथ-साथ सांस्कृतिक शिक्षा का भी माध्यम है।

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Q5.सत्रिया नृत्य में किन वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है?
A.A) मृदंग, बाँसुरी, ढोलक
B.B) तबला, सितार, हारमोनियम
C.C) ढोलक, तबला, गिटार
D.D) बांसुरी, हारमोनियम, ढोलक

Answer:

मृदंग, बाँसुरी, ढोलक

Explanation:

सत्रिया नृत्य में मृदंग, बाँसुरी और ढोलक जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है, जो नृत्य की शास्त्रीयता और भक्ति भाव को बढ़ाते हैं।

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Q6.बिहू नृत्य किस त्योहार के दौरान मुख्य रूप से किया जाता है?
A.A) बिहू त्योहार
B.B) दिवाली
C.C) होली
D.D) दशहरा

Answer:

बिहू त्योहार

Explanation:

बिहू नृत्य असम के बिहू त्योहार के दौरान मुख्य रूप से किया जाता है, जो असम की कृषि संस्कृति और जीवनशैली का प्रतीक है।

Easy
Q7.बिहू नृत्य के कितने प्रकार होते हैं और उनका मुख्य आधार क्या है?

Answer:

बिहू नृत्य के तीन प्रकार होते हैं - रोंगाली बिहू, भोगाली बिहू और काति बिहू। ये अलग-अलग मौसमों और अवसरों पर मनाए जाते हैं।

Explanation:

रोंगाली बिहू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, भोगाली बिहू फसल कटाई के बाद होता है, और काति बिहू खेतों की देखभाल के समय होता है। ये तीनों नृत्य असम की कृषि संस्कृति को दर्शाते हैं।

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Q8.बिहू नृत्य में पुरुष और महिलाएं कौन-कौन सी पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं?
A.A) महिलाएं मेखेला-चादर, पुरुष धोती-कमीज
B.B) महिलाएं साड़ी, पुरुष कुर्ता-पायजामा
C.C) महिलाएं सलवार-कमीज, पुरुष पैंट-शर्ट
D.D) महिलाएं लहंगा-चोली, पुरुष कुर्ता-धोती

Answer:

महिलाएं मेखेला-चादर, पुरुष धोती-कमीज

Explanation:

बिहू नृत्य में महिलाएं रंगीन मेखेला-चादर पहनती हैं और पुरुष धोती-कमीज पहनते हैं, जो असम की पारंपरिक लोक वेशभूषा है।

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