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Chapter 8

🎓 Class 11📖 Bharat ka Samvidhan Sidhant aur Vyavhar📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 7अध्याय 8 / 10Chapter 9

Chapter 8अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

स्थानीय शासन का अर्थ है वह शासन व्यवस्था जो आम नागरिकों के सबसे नजदीक होती है। यह व्यवस्था गाँव, कस्बे और नगरों में लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी से चलती है। भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में स्थानीय शासन की व्यवस्था लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्थानीय शासन के माध्यम से जनता अपनी समस्याओं, आवश्यकताओं और विकास की योजनाओं को सीधे अपने स्तर पर तय कर सकती है। यह शासन व्यवस्था न केवल प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है, बल्कि नागरिकों को शासन में भागीदारी का अवसर भी प्रदान करती है। स्थानीय शासन के बिना लोकतंत्र अधूरा माना जाता है क्योंकि यह शासन की नींव है। भारत में स्थानीय शासन की व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से मिली, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकायों को स्वायत्तता और अधिकार प्रदान किए गए। इस अध्याय में हम स्थानीय शासन की परंपरा, उसकी संरचना, अधिकार, चुनौतियाँ और महत्व को विस्तार से समझेंगे।

  • स्थानीय शासन आम नागरिकों के सबसे नजदीक होता है।
  • यह व्यवस्था गाँव, कस्बे और नगरों में लोगों की भागीदारी से चलती है।
  • स्थानीय शासन लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
  • 73वें और 74वें संविधान संशोधन ने स्थानीय शासन को संवैधानिक दर्जा दिया।
  • स्थानीय शासन के बिना लोकतंत्र अधूरा माना जाता है।
  • 📌 स्थानीय शासन: शासन की वह व्यवस्था जो नागरिकों के सबसे नजदीक होती है।
  • 📌 ग्राम सभा: गाँव के सभी 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों का समूह।

स्थानीय शासन का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

व्याख्या

स्थानीय शासन का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत में स्थानीय शासन की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। प्राचीन काल में गाँवों में पंचायतें होती थीं जो सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक मामलों का निपटारा करती थीं। ये पंचायतें गाँव के बुजुर्गों और समाज के सम्मानित सदस्यों से मिलकर बनती थीं। मध्यकालीन और ब्रिटिश काल में भी स्थानीय निकायों का विकास हुआ, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान स्थानीय निकायों का उद्देश्य मुख्यतः शासन को नियंत्रित करना था न कि जनता को सशक्त बनाना। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज की अवधारणा दी, जिसमें प्रत्येक गाँव को स्वशासन का अधिकार दिया जाना चाहिए। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने स्थानीय शासन को मजबूत करने के लिए कई आयोग बनाए और अंततः 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इस ऐतिहासिक विकास ने स्थानीय शासन को लोकतंत्र का आधार बनाया।

  • प्राचीन भारत में पंचायतें गाँव के प्रशासन का मुख्य आधार थीं।
  • ब्रिटिश काल में स्थानीय निकायों की स्थापना हुई परंतु जनता की भागीदारी सीमित थी।
  • महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज की अवधारणा प्रस्तुत की।
  • स्वतंत्रता के बाद स्थानीय शासन को संवैधानिक मान्यता मिली।
  • 73वें और 74वें संविधान संशोधन ने स्थानीय निकायों को स्वायत्तता दी।
  • 📌 पंचायत: गाँव के सामाजिक और प्रशासनिक मामलों को संभालने वाली संस्था।
  • 📌 ग्राम स्वराज: महात्मा गांधी द्वारा प्रस्तावित गाँवों का स्वशासन।

पंचायती राज व्यवस्था

व्याख्या

पंचायती राज व्यवस्था

पंचायती राज व्यवस्था भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय शासन की प्रमुख व्यवस्था है। यह तीन स्तरों पर कार्य करती है: ग्राम पंचायत (गाँव स्तर), पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) और जिला परिषद (जिला स्तर)। 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने इस व्यवस्था को

अभ्यास प्रश्नChapter 8

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.भारत का संविधान ग्राम पंचायत को स्व-शासन की इकाई के रूप में देखता है। नीचे कुछ स्थितियों का वर्णन किया गया है। इन पर विचार कीजिए और बताइए कि स्व-शासन की इकाई बनने के क्रम में ग्राम पंचायत के लिए ये स्थितियाँ सहायक हैं या बाधक? (क) प्रदेश की सरकार ने एक बड़ी कंपनी को विशाल इस्पात संयंत्र लगाने की अनुमति दी है। इस्पात संयंत्र लगाने से बहुत-से गाँवों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। दुष्प्रभाव की चपेट में आनेवाले गाँवों में से एक की ग्राम सभा ने यह प्रस्ताव पारित किया कि क्षेत्र में कोई भी बड़ा उद्योग लगाने से पहले गाँववासियों की राय ली जानी चाहिए और उनकी शिकायतों की सुनवाई होनी चाहिए। (ख) सरकार का फ़ैसला है कि उसके कुल खर्च का 20 प्रतिशत पंचायतों के माध्यम से व्यय होगा। (ग) ग्राम पंचायत विद्यालय का भवन बनाने के लिए लगातार धन माँग रही है, लेकिन सरकारी अधिकारियों ने माँग को यह कहकर टुकरा दिया है कि धन का आबंटन कुछ दूसरी योजनाओं के लिए हुआ है और धन को अलग मद में खर्च नहीं किया जा सकता। (घ) सरकार ने दुंगरपुर नामक गाँव को दो हिस्सों में बाँट दिया है और गाँव के एक हिस्से को जमुना तथा दूसरे को सोहना नाम दिया है। अब दुंगरपुर नामक गाँव सरकारी खाते में मौजूद नहीं है। (ड) एक ग्राम पंचायत ने पाया कि उसके इलाके में पानी के स्रोत तेजी से कम हो रहे हैं। ग्राम पंचायत ने फ़ैसला किया कि गाँव के नौजवान श्रमदान करें और गाँव के पुराने तालाब तथा कुएँ को फिर से काम में आने लायक बनाएँ।

उत्तर:

इस प्रश्न में प्रत्येक स्थिति पर विचार करते हुए यह बताना है कि वे ग्राम पंचायत के स्व-शासन की इकाई बनने में सहायक हैं या बाधक। (क) सहायक: ग्राम सभा का यह प्रस्ताव ग्राम पंचायत को स्थानीय निर्णय लेने और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की क्षमता दिखाता है, जो स्व-शासन के लिए आवश्यक है। (ख) सहायक: सरकार का कुल खर्च का 20 प्रतिशत पंचायतों के माध्यम से व्यय करने का निर्णय ग्राम पंचायतों को वित्तीय अधिकार देता है, जिससे वे स्वायत्तता से कार्य कर सकती हैं। (ग) बाधक: धन की माँग को टालना ग्राम पंचायत की स्वायत्तता और विकास कार्यों में बाधा डालता है, जिससे स्व-शासन की भावना कमजोर होती है। (घ) बाधक: गाँव को आधिकारिक रूप से विभाजित कर उसका नाम बदलना ग्राम पंचायत की पहचान और अस्तित्व को प्रभावित करता है, जो स्व-शासन के लिए नकारात्मक है। (ड) सहायक: ग्राम पंचायत द्वारा पानी के स्रोतों की रक्षा और पुनरुद्धार के लिए श्रमदान का निर्णय स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी दिखाता है, जो स्व-शासन को मजबूत करता है।

व्याख्या:

प्रत्येक स्थिति में ग्राम पंचायत की स्वायत्तता, स्थानीय भागीदारी, वित्तीय अधिकार और पहचान को ध्यान में रखते हुए सहायक या बाधक के रूप में वर्गीकृत किया गया है। स्व-शासन के लिए स्थानीय निर्णय, वित्तीय संसाधन, पहचान और सक्रिय भागीदारी आवश्यक हैं।

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Q2.मान लीजिए कि आपको किसी प्रदेश की तरफ से स्थानीय शासन की कोई योजना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्राम पंचायत स्व-शासन की इकाई के रूप में काम करे, इसके लिए आप उसे कौन-सी शक्तियाँ देना चाहेंगे? ऐसी पाँच शक्तियों का उल्लेख करें और प्रत्येक शक्ति के बारे में दो-दो पंक्तियों में यह भी बताएँ कि ऐसा करना क्यों जरूरी है।

उत्तर:

ग्राम पंचायत को निम्नलिखित पाँच शक्तियाँ दी जानी चाहिए: 1. वित्तीय शक्ति: ग्राम पंचायत को अपने विकास कार्यों के लिए बजट बनाने और खर्च करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इससे वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएँ बना सकेंगी। 2. निर्णय लेने की शक्ति: ग्राम पंचायत को स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए। इससे स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और समस्याओं का त्वरित समाधान होगा। 3. योजना बनाने की शक्ति: ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र की विकास योजनाएँ बनाने और लागू करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। इससे विकास कार्य स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप होंगे। 4. प्रशासनिक शक्ति: ग्राम पंचायत को स्थानीय प्रशासनिक कार्यों को संचालित करने की क्षमता होनी चाहिए, जैसे कि साफ-सफाई, जल प्रबंधन आदि। इससे प्रशासनिक कार्यों में दक्षता आएगी। 5. निगरानी और नियंत्रण की शक्ति: ग्राम पंचायत को सरकारी योजनाओं और कार्यों की निगरानी करने का अधिकार होना चाहिए। इससे भ्रष्टाचार कम होगा और योजनाओं का सही क्रियान्वयन होगा।

व्याख्या:

प्रत्येक शक्ति ग्राम पंचायत को स्वायत्तता, प्रभावशीलता और जवाबदेही प्रदान करती है, जिससे वे स्थानीय स्तर पर बेहतर शासन कर सकें। वित्तीय और निर्णय लेने की स्वतंत्रता से वे स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य कर पाते हैं। योजना बनाने और प्रशासनिक शक्तियाँ उन्हें सक्षम बनाती हैं। निगरानी की शक्ति से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

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Q3.सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए संविधान के 73वें संशोधन में आरक्षण के क्या प्रावधान हैं? इन प्रावधानों से ग्रामीण स्तर के नेतृत्व का खाका किस तरह बदला है?

उत्तर:

73वें संविधान संशोधन में सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण के प्रावधान हैं: - अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए पंचायतों में आरक्षण अनिवार्य है। - महिलाओं के लिए भी पंचायतों में कम से कम एक-तिहाई सीटें आरक्षित हैं। इन प्रावधानों से ग्रामीण नेतृत्व में विविधता आई है। पहले जहाँ नेतृत्व मुख्य रूप से उच्च जाति या प्रभावशाली वर्गों तक सीमित था, अब कमजोर वर्गों और महिलाओं को भी नेतृत्व के अवसर मिले हैं। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी और प्रतिनिधि बन गई है, जो सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देती है।

व्याख्या:

आरक्षण के प्रावधानों ने ग्रामीण नेतृत्व में सामाजिक और लैंगिक विविधता को बढ़ावा दिया है। इससे पंचायतों में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है, जिससे स्थानीय शासन अधिक लोकतांत्रिक और न्यायसंगत हुआ है।

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Q4.संविधान के 73वें संशोधन से पहले और संशोधन के बाद के स्थानीय शासन के बीच मुख्य भेद बताएँ।

उत्तर:

73वें संशोधन से पहले स्थानीय शासन में पंचायतों को सीमित अधिकार और स्वायत्तता प्राप्त थी। वे मुख्यतः राज्य सरकारों के नियंत्रण में थीं और उनका वित्तीय तथा प्रशासनिक अधिकार कम था। संशोधन के बाद: - पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिला। - पंचायतों के चुनाव अनिवार्य और नियमित हुए। - महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण लागू हुआ। - पंचायतों को वित्तीय, प्रशासनिक और योजना बनाने की शक्तियाँ दी गईं। - ग्राम सभा को पंचायतों के निर्णयों की निगरानी का अधिकार मिला। इस प्रकार, संशोधन ने स्थानीय शासन को अधिक लोकतांत्रिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाया।

व्याख्या:

संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक सुरक्षा, अधिकार और स्वायत्तता प्रदान की, जिससे वे स्थानीय विकास में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं। इससे पहले वे केवल राज्य सरकार के अधीन थीं।

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Q5.नीचे लिखी बातचीत पढ़ें। इस बातचीत में जो मुद्दे उठाए गए हैं उसके बारे में अपना मत दो सौ शब्दों में लिखें। आलोक – हमारे संविधान में स्त्री और पुरुष को बराबरी का दर्जा दिया गया है। स्थानीय निकायों में स्त्रियों को आरक्षण देने से सत्ता में उनकी बराबर की भागीदारी सुनिश्चित हुई है। नेहा – लेकिन, महिलाओं का सिर्फ सत्ता के पद पर काबिज होना ही काफी नहीं है। यह भी जरूरी है कि स्थानीय निकायों के बजट में महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान हो। जयेश – मुझे आरक्षण का यह गोरखधंधा पसंद नहीं। स्थानीय निकाय को चाहिए कि वह गाँव के सभी लोगों का ख्याल रखे और ऐसा करने पर महिलाओं और उनके हितों की देखभाल अपने आप हो जाएगी।

उत्तर:

इस बातचीत में तीन दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं। आलोक का कहना है कि संविधान स्त्री-पुरुष समानता देता है और आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। नेहा इस बात पर जोर देती हैं कि केवल पदों पर होना पर्याप्त नहीं, बजट में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान भी जरूरी हैं ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके। जयेश आरक्षण के विरोध में हैं और मानते हैं कि सभी लोगों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए, जिससे महिलाओं के हित भी स्वतः सुरक्षित होंगे। मेरी राय में, महिलाओं को आरक्षण देना आवश्यक है क्योंकि इससे उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित होती है, जो पारंपरिक समाज में कम थी। साथ ही, बजट में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान भी जरूरी हैं ताकि वे विकास योजनाओं में समान रूप से लाभान्वित हों। हालांकि, सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, लेकिन आरक्षण महिलाओं को सशक्त बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। इस प्रकार, महिलाओं के लिए आरक्षण और बजट प्रावधान दोनों आवश्यक हैं।

व्याख्या:

यह प्रश्न सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी पर विचार करने के लिए है। उत्तर में विभिन्न दृष्टिकोणों का संतुलित विश्लेषण और अपनी राय प्रस्तुत करनी होती है।

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Q6.73वें संशोधन के प्रावधानों को पढ़ें। यह संशोधन निम्नलिखित सरोकारों में से किससे ताल्लुक रखता है? (क) पद से हटा दिये जाने का भय जन-प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है। (ख) भूस्वामी सामंत और ताकतवर जातियों का स्थानीय निकायों में दबदबा रहता है। (ग) ग्रामीण क्षेत्रों में निरक्षरता बहुत ज्यादा है। निरक्षर लोग गाँव के विकास के बारे में फ़ैसला नहीं ले सकते हैं। (घ) प्रभावकारी साबित होने के लिए ग्राम पंचायतों के पास गाँव की विकास योजना बनाने की शक्ति और संसाधन का होना जरूरी है।
A.A) (क)
B.B) (ख)
C.C) (ग)
D.D) (घ)

उत्तर:

इस प्रश्न में 73वें संशोधन के प्रावधानों का संबंध मुख्यतः विकल्प (क) और (घ) से है। (क) पद से हटाए जाने का भय जन-प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है – यह जवाबदेही सुनिश्चित करता है जो संशोधन का उद्देश्य है। (घ) ग्राम पंचायतों के पास विकास योजना बनाने की शक्ति और संसाधन होना जरूरी है – यह भी संशोधन के तहत पंचायतों को स्वायत्तता और संसाधन देने का प्रावधान है। (ख) और (ग) समस्याएँ हैं जिन्हें संशोधन दूर करने का प्रयास करता है, लेकिन वे सीधे संशोधन के प्रावधान नहीं हैं।

व्याख्या:

73वें संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक अधिकार, जवाबदेही और संसाधन प्रदान किए हैं ताकि वे प्रभावी रूप से कार्य कर सकें। पद से हटाए जाने का भय जन-प्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाता है और विकास योजना बनाने की शक्ति पंचायतों को सक्षम बनाती है।

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Q7.नीचे स्थानीय शासन के पक्ष में कुछ तर्क दिए गए हैं। इन तर्कों को आप अपनी पसंद से वरीयता क्रम में सजायें और बताएँ कि किसी एक तर्क की अपेक्षा दूसरे को आपने ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों माना है। आपके जानते बैंगैक्सल गाँव की ग्राम पंचायत का फ़ैसला निम्नलिखित कारणों में से किस पर और कैसे आधारित था? (क) सरकार स्थानीय समुदाय को शामिल कर अपनी परियोजना कम लागत में पूरी कर सकती है। (ख) स्थानीय जनता द्वारा बनायी गई विकास योजना सरकारी अधिकारियों द्वारा बनायी गई विकास योजना से ज्यादा स्वीकृत होती है। (ग) लोग अपने इलाके की जरूरत, समस्याओं और प्राथमिकताओं को जानते हैं। सामुदायिक भागीदारी द्वारा उन्हें विचार-विमर्श करके अपने जीवन के बारे में फ़ैसला लेना चाहिए। (घ) आम जनता के लिए अपने प्रदेश अथवा राष्ट्रीय विधायिका के जन-प्रतिनिधियों से संपर्क कर पाना मुश्किल होता है।

उत्तर:

वरीयता क्रम (मेरी राय): 1. (ग) लोग अपने इलाके की जरूरत, समस्याओं और प्राथमिकताओं को जानते हैं। सामुदायिक भागीदारी द्वारा उन्हें विचार-विमर्श करके अपने जीवन के बारे में फ़ैसला लेना चाहिए। 2. (ख) स्थानीय जनता द्वारा बनायी गई विकास योजना सरकारी अधिकारियों द्वारा बनायी गई विकास योजना से ज्यादा स्वीकृत होती है। 3. (क) सरकार स्थानीय समुदाय को शामिल कर अपनी परियोजना कम लागत में पूरी कर सकती है। 4. (घ) आम जनता के लिए अपने प्रदेश अथवा राष्ट्रीय विधायिका के जन-प्रतिनिधियों से संपर्क कर पाना मुश्किल होता है। मैंने (ग) को सबसे महत्वपूर्ण इसलिए माना क्योंकि स्थानीय लोगों की समझ और प्राथमिकताएँ विकास के लिए सबसे उपयुक्त होती हैं। सामुदायिक भागीदारी से योजनाएँ अधिक प्रभावी और स्वीकार्य होती हैं। बैंगैक्सल गाँव की ग्राम पंचायत का फ़ैसला भी इसी आधार पर था कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।

व्याख्या:

स्थानीय शासन के पक्ष में तर्कों का मूल्यांकन करते हुए स्थानीय ज्ञान और भागीदारी को सर्वोच्च महत्व दिया गया है क्योंकि वे विकास की सफलता के लिए आवश्यक हैं।

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Q8.आपके अनुसार निम्नलिखित में कौन-सा विकेंद्रीकरण का साधन है? शेष को विकेंद्रीकरण के साधन के रूप में आप पर्याप्त विकल्प क्यों नहीं मानते? (क) ग्राम पंचायत का चुनाव कराना। (ख) गाँव के निवासी खुद तय करें कि कौन-सी नीति और योजना गाँव के लिए उपयोगी है। (ग) ग्राम सभा की बैठक बुलाने की ताकत। (घ) प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विकास की एक योजना चला रखी है। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ग्राम पंचायत के सामने एक रिपोर्ट पेश करता है कि इस योजना में कहाँ तक प्रगति हुई है।

उत्तर:

विकेंद्रीकरण का सही साधन है: (ख) गाँव के निवासी खुद तय करें कि कौन-सी नीति और योजना गाँव के लिए उपयोगी है। कारण: - यह स्थानीय लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करता है, जिससे स्वायत्तता और जवाबदेही बढ़ती है। अन्य विकल्प क्यों पर्याप्त नहीं हैं: (क) चुनाव कराना केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया है, जो विकेंद्रीकरण का एक हिस्सा है लेकिन पूर्ण विकेंद्रीकरण नहीं। (ग) ग्राम सभा की बैठक बुलाने की ताकत भी आवश्यक है, लेकिन यह अकेले निर्णय लेने की शक्ति नहीं देती। (घ) प्रदेश सरकार की योजना और रिपोर्ट प्रस्तुत करना विकेंद्रीकरण नहीं है, बल्कि ऊपर से नीचे की जानकारी देना है।

व्याख्या:

विकेंद्रीकरण का अर्थ है निर्णय लेने की शक्ति और संसाधनों का स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण। केवल चुनाव या बैठक बुलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों का सक्रिय निर्णय लेना आवश्यक है।

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