Ch 6निःशुल्क

Chapter 6

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Real Analysis & Metric Space (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 5अध्याय 5 / 13Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

6.1 अवकलज की मूलभूत परिभाषा

परिभाषा

6.1 अवकलज की मूलभूत परिभाषा

इस अनुभाग में अवकलज (Derivative) की मूलभूत परिभाषा दी गई है। अवकलज गणित की वह संकल्पना है, जिससे किसी फलन के एक बिंदु पर उसके परिवर्तन की दर ज्ञात की जाती है। यदि कोई फलन f(x) है, तो उसके अवकलज को निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है: यदि h → 0 के लिए (f(x + h) − f(x)) ÷ h का सीमांत मान अस्तित्व में है, तो उसे f(x) का अवकलज कहा जाता है। इसे f'(x) या dy/dx से दर्शाया जाता है। अर्थात्, f'(x) = lim (h → 0) [(f(x + h) − f(x)) ÷ h] यह परिभाषा अवकलज की संकल्पना को स्पष्ट करती है कि यह किसी बिंदु पर फलन के मान में अत्यल्प परिवर्तन के लिए उसके मान के परिवर्तन की दर बताता है।

  • अवकलज किसी फलन के परिवर्तन की दर को दर्शाता है।
  • अवकलज की गणना सीमांत (limit) की सहायता से की जाती है।
  • यदि सीमांत मान अस्तित्व में है, तो फलन अवकलनीय (differentiable) कहलाता है।
  • अवकलज को f'(x) या dy/dx से निरूपित किया जाता है।
  • अवकलज की परिभाषा गणितीय रूप से सीमांत के रूप में दी जाती है।
  • 📌 अवकलज (Derivative): फलन के परिवर्तन की दर।
  • 📌 सीमांत (Limit): किसी बिंदु के समीप फलन का मान।

6.2 अवकलनीयता की शर्तें

अवधारणा

6.2 अवकलनीयता की शर्तें

इस अनुभाग में फलन की अवकलनीयता (Differentiability) की आवश्यक शर्तों का विस्तार से वर्णन किया गया है। किसी बिंदु x = a पर फलन f(x) अवकलनीय होगा यदि: 1. बाएँ और दाएँ सीमांत अवकलज (Left and Right Hand Derivatives) दोनों अस्तित्व में हों और बराबर हों। 2. फलन उस बिंदु पर सतत (Continuous) भी होना चाहिए। यदि f(x) का बाएँ और दाएँ सीमांत अवकलज अलग-अलग हैं, तो फलन उस बिंदु पर अवकलनीय नहीं है। सततता (Continuity) और अवकलनीयता के बीच संबंध भी स्पष्ट किया गया है: प्रत्येक अवकलनीय फलन सतत होता है, परंतु प्रत्येक सतत फलन अवकलनीय नहीं होता।

  • अवकलनीयता के लिए बाएँ और दाएँ सीमांत अवकलज का अस्तित्व और समानता आवश्यक है।
  • अवकलनीयता के लिए फलन का सतत होना भी आवश्यक है।
  • सततता अवकलनीयता के लिए आवश्यक किंतु पर्याप्त शर्त नहीं है।
  • यदि बाएँ और दाएँ अवकलज अलग हैं, तो फलन अवकलनीय नहीं है।
  • अवकलनीयता की जाँच के लिए सीमांत का प्रयोग किया जाता है।
  • 📌 अवकलनीयता (Differentiability): फलन के अवकलज के अस्तित्व की स्थिति।
  • 📌 सततता (Continuity): फलन का बिना किसी अवरोध के चलना।

6.3 अवकलज का भौतिक और ज्यामितीय अर्थ

व्याख्या

6.3 अवकलज का भौतिक और ज्यामितीय अर्थ

इस अनुभाग में अवकलज का भौतिक (Physical) और ज्यामितीय (Geometrical) अर्थ स्पष्ट किया गया है। भौतिक दृष्टि से, अवकलज किसी राशि के परिवर्तन की दर को दर्शाता है, जैसे – यदि s(t) समय t पर किसी वस्तु की स्थिति है, तो ds/dt वस्तु की तात्क्षणिक चाल (instanta