Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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6.1 श्रम पारिश्रमिक का अर्थ
परिभाषा6.1 श्रम पारिश्रमिक का अर्थ
श्रम पारिश्रमिक वह राशि है, जो श्रमिकों को उनके द्वारा किए गए कार्य के बदले दी जाती है। यह उत्पादन की लागत का एक महत्वपूर्ण घटक है। श्रम पारिश्रमिक का निर्धारण विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे – श्रमिक की योग्यता, कार्य की प्रकृति, कार्य का समय, उद्योग की स्थिति आदि। पारिश्रमिक का उद्देश्य श्रमिकों को उनके श्रम के लिए उचित प्रतिफल देना तथा उन्हें कार्य के लिए प्रेरित करना है। श्रम पारिश्रमिक के निर्धारण में दो मुख्य पक्ष होते हैं – नियोक्ता और श्रमिक। नियोक्ता कम से कम लागत में अधिकतम उत्पादन चाहता है, जबकि श्रमिक अधिक वेतन की अपेक्षा करता है। अतः पारिश्रमिक निर्धारण में संतुलन बनाना आवश्यक है।
- श्रम पारिश्रमिक श्रमिकों को उनके कार्य के बदले दी जाने वाली राशि है।
- यह उत्पादन लागत का महत्वपूर्ण भाग है।
- पारिश्रमिक निर्धारण में नियोक्ता और श्रमिक दोनों की भूमिका होती है।
- श्रमिक की योग्यता, कार्य की प्रकृति आदि कारक पारिश्रमिक को प्रभावित करते हैं।
- उचित पारिश्रमिक श्रमिकों को प्रेरित करता है।
- 📌 श्रम पारिश्रमिक: श्रमिकों को उनके श्रम के बदले दी जाने वाली राशि।
- 📌 नियोक्ता: वह व्यक्ति या संस्था जो श्रमिकों को कार्य पर रखती है।
6.2 श्रम पारिश्रमिक की आवश्यकता एवं महत्व
अवधारणा6.2 श्रम पारिश्रमिक की आवश्यकता एवं महत्व
श्रम पारिश्रमिक की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि यह श्रमिकों को कार्य के लिए प्रेरित करता है और उत्पादन की निरंतरता बनाए रखता है। उचित पारिश्रमिक से श्रमिकों में संतोष, कार्य के प्रति लगाव, उत्पादकता में वृद्धि तथा श्रमिक-अधिप्रबंधन संबंधों में सुधार होता है। महत्व की दृष्टि से, श्रम पारिश्रमिक निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है: 1. श्रमिकों की जीवन-यापन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए। 2. श्रमिकों को कार्य के लिए आकर्षित करने एवं बनाए रखने के लिए। 3. उत्पादन लागत का नियंत्रण करने के लिए। 4. औद्योगिक शांति एवं सद्भाव बनाए रखने के लिए। 5. श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए। यदि श्रमिकों को उचित पारिश्रमिक नहीं मिलेगा तो असंतोष, हड़ताल, उत्पादन में गिरावट आदि समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। अतः श्रम पारिश्रमिक का उचित निर्धारण अत्यंत आवश्यक है।
- श्रम पारिश्रमिक श्रमिकों की जीवन-यापन आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।
- यह श्रमिकों को कार्य के लिए प्रेरित करता है।
- उचित पारिश्रमिक से औद्योगिक शांति बनी रहती है।
- यह उत्पादन लागत को नियंत्रित करता है।
- श्रमिकों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
- 📌 उत्पादकता: श्रमिक द्वारा निर्धारित समय में किए गए कार्य की मात्रा।
- 📌 औद्योगिक शांति: उद्योग में श्रमिकों और प्रबंधन के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध।
6.3 श्रम पारिश्रमिक निर्धारण की विधियाँ
व्याख्या6.3 श्रम पारिश्रमिक निर्धारण की विधियाँ
श्रम पारिश्रमिक निर्धारण की विभिन्न विधियाँ हैं, जिनका चयन उद्योग की प्रकृति, कार्य की विशेषता, श्रमिकों की योग्यता आदि के आधार पर किया जाता है। मुख्य रूप से दो प्रकार की विधियाँ प्रचलित हैं: (1) समय आधारित विधि (Time Rate System) और (2) कार्य आधारित
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Cost Accounting · Vardhman Mahaveer Open University
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