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Chapter 10

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Cost Accounting (Hindi)📖 10 नोट्स⏱️ ~15 मिनट
Chapter 9अध्याय 12 / 20Chapter 11

Chapter 10अध्ययन नोट्स

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10.1 उपकार्य निर्धारण की अवधारणा

अवधारणा

10.1 उपकार्य निर्धारण की अवधारणा

इस अनुभाग में उपकार्य निर्धारण की मूल अवधारणा का विस्तार से वर्णन किया गया है। उपकार्य (Job) वह कार्य है, जो ग्राहक की विशेष आवश्यकताओं के अनुसार निर्मित किया जाता है। उपकार्य निर्धारण विधि (Job Costing Method) एक ऐसी लागत निर्धारण प्रणाली है, जिसमें प्रत्येक उपकार्य या आदेश के लिए लागत पृथक-पृथक ज्ञात की जाती है। यह विधि मुख्यतः उन उद्योगों में प्रयुक्त होती है, जहाँ उत्पादन ग्राहक के आदेश पर होता है और प्रत्येक उपकार्य की प्रकृति, आकार, डिजाइन आदि भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, फर्नीचर निर्माण, मशीन निर्माण, टेलरिंग, छपाई आदि में उपकार्य निर्धारण विधि अपनाई जाती है। इस विधि में प्रत्येक उपकार्य को एक विशिष्ट संख्या (Job Number) दी जाती है, जिससे उसकी लागत का पृथक्करण और नियंत्रण संभव होता है। उपकार्य निर्धारण विधि में लागत के तीन मुख्य तत्व होते हैं – प्रत्यक्ष सामग्री, प्रत्यक्ष श्रम और अप्रत्यक्ष व्यय। प्रत्येक उपकार्य के लिए इन तत्वों की लागत का पृथक-पृथक संकलन किया जाता है।

  • उपकार्य वह कार्य है, जो ग्राहक की विशेष मांग के अनुसार निर्मित होता है।
  • प्रत्येक उपकार्य को एक विशिष्ट संख्या दी जाती है।
  • इस विधि में लागत के सभी तत्वों का पृथक संकलन किया जाता है।
  • यह विधि असमान प्रकृति के उत्पादों के लिए उपयुक्त है।
  • उपकार्य निर्धारण में लागत नियंत्रण की सुविधा होती है।
  • 📌 उपकार्य (Job): ग्राहक की विशेष मांग के अनुसार निर्मित कार्य।
  • 📌 उपकार्य निर्धारण विधि (Job Costing Method): प्रत्येक उपकार्य की लागत पृथक ज्ञात करने की विधि।

10.2 उपकार्य निर्धारण की विशेषताएँ

व्याख्या

10.2 उपकार्य निर्धारण की विशेषताएँ

इस अनुभाग में उपकार्य निर्धारण विधि की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन किया गया है। उपकार्य निर्धारण विधि में प्रत्येक उपकार्य को एक पृथक इकाई के रूप में माना जाता है। प्रत्येक उपकार्य की लागत का पृथक संकलन किया जाता है, जिससे लागत नियंत्रण और विश्लेषण सरल हो जाता है। इस विधि में उत्पादन का प्रत्येक आदेश ग्राहक की मांग के अनुसार होता है, अतः उत्पादों की प्रकृति, आकार, डिजाइन आदि भिन्न होते हैं। उपकार्य निर्धारण विधि में लागत का संकलन वास्तविक व्यय के आधार पर किया जाता है। इस विधि में उत्पादन की प्रत्येक अवस्था का लेखा पृथक-पृथक रखा जाता है।

  • प्रत्येक उपकार्य को एक पृथक इकाई के रूप में माना जाता है।
  • लागत का संकलन वास्तविक व्यय के आधार पर किया जाता है।
  • प्रत्येक उपकार्य की लागत पृथक ज्ञात की जाती है।
  • यह विधि असमान प्रकृति के उत्पादों के लिए उपयुक्त है।
  • लागत नियंत्रण एवं विश्लेषण में सहायक।
  • 📌 पृथक इकाई (Separate Unit): प्रत्येक उपकार्य को अलग इकाई के रूप में देखना।
  • 📌 वास्तविक व्यय (Actual Expenditure): वास्तविक रूप से किया गया खर्च।

10.3 उपकार्य निर्धारण की प्रक्रिया

व्याख्या

10.3 उपकार्य निर्धारण की प्रक्रिया

इस अनुभाग में उपकार्य निर्धारण की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है। उपकार्य निर्धारण की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण होते हैं: 1. ग्राहक से आदेश प्राप्त करना – ग्राहक की विशेष मांग के अनुसार आदेश प्राप्त किया जाता है। 2. उपकार्य संख्या का नि