Ch 4निःशुल्क

Chapter 4

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Practical Geography (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 3अध्याय 3 / 8Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

4.1 प्रस्तावना

व्याख्या

4.1 प्रस्तावना

इस अनुभाग में शंक्वाकार प्रक्षेप (Conical Projection) की भूमिका और इसकी भौगोलिक महत्ता का परिचय दिया गया है। शंक्वाकार प्रक्षेप वे मानचित्र प्रक्षेप हैं जिनमें पृथ्वी की सतह को एक शंकु पर प्रक्षिप्त किया जाता है, जिसे बाद में समतल पर फैलाया जाता है। यह प्रक्षेप, विशेष रूप से मध्य अक्षांशों के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसमें विकृतियाँ कम होती हैं। प्रस्तावना में बताया गया है कि मानचित्र प्रक्षेप का चयन करते समय क्षेत्र की स्थिति, विस्तार और उद्देश्य को ध्यान में रखना आवश्यक है। शंक्वाकार प्रक्षेप का उपयोग मुख्यतः उन क्षेत्रों के लिए किया जाता है जो पूर्व-पश्चिम दिशा में विस्तृत होते हैं।

  • शंक्वाकार प्रक्षेप में पृथ्वी की सतह को शंकु पर प्रक्षिप्त किया जाता है।
  • यह प्रक्षेप मुख्यतः मध्य अक्षांशों के लिए उपयुक्त है।
  • मानचित्र प्रक्षेप का चयन क्षेत्र की स्थिति और उद्देश्य के अनुसार किया जाता है।
  • शंक्वाकार प्रक्षेप में विकृतियाँ तुलनात्मक रूप से कम होती हैं।
  • पूर्व-पश्चिम दिशा में विस्तृत क्षेत्रों के लिए यह प्रक्षेप उपयुक्त है।
  • 📌 शंक्वाकार प्रक्षेप: वह प्रक्षेप जिसमें पृथ्वी की सतह को शंकु पर प्रक्षिप्त किया जाता है।
  • 📌 मानचित्र प्रक्षेप: पृथ्वी की गोल सतह को समतल पर दर्शाने की विधि।

4.2 शंक्वाकार प्रक्षेप की विशेषताएँ

अवधारणा

4.2 शंक्वाकार प्रक्षेप की विशेषताएँ

इस अनुभाग में शंक्वाकार प्रक्षेप की प्रमुख विशेषताओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। शंक्वाकार प्रक्षेप में पृथ्वी के किसी भाग को एक काल्पनिक शंकु पर प्रक्षिप्त किया जाता है, जो भूमध्य रेखा या किसी अन्य समानांतर वृत्त पर स्पर्श करता है। जब शंकु को काटकर समतल पर फैलाया जाता है, तो अक्षांश वृत्त वृताकार चाप के रूप में और देशांतर रेखाएँ शंकु के शीर्ष से निकलती सीधी रेखाओं के रूप में दिखाई देती हैं। इस प्रक्षेप में विकृतियाँ मुख्यतः ध्रुवों के समीप अधिक होती हैं, जबकि मध्य अक्षांशों में कम होती हैं।

  • शंक्वाकार प्रक्षेप में अक्षांश वृत्त वृताकार चाप के रूप में दर्शाए जाते हैं।
  • देशांतर रेखाएँ शंकु के शीर्ष से निकलती सीधी रेखाएँ होती हैं।
  • मध्य अक्षांशों में विकृति कम, ध्रुवों के समीप अधिक होती है।
  • यह प्रक्षेप पूर्व-पश्चिम दिशा में विस्तृत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
  • शंक्वाकार प्रक्षेप में क्षेत्रफल, कोण या दूरी में से किसी एक का संरक्षण किया जा सकता है।
  • 📌 अक्षांश वृत्त: पृथ्वी के समानांतर वृत्त, जैसे भूमध्य रेखा।
  • 📌 देशांतर रेखाएँ: उत्तर से दक्षिण की दिशा में पृथ्वी को काटने वाली रेखाएँ।

4.3 साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप

व्याख्या

4.3 साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप

इस अनुभाग में साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप (Simple Conical Projection) की परिभाषा, निर्माण विधि और उसकी विशेषताओं का विस्तार से वर्णन किया गया है। साधारण शंक्वाकार प्रक्षेप में पृथ्वी के किसी भाग को एक शंकु पर प्रक्षिप्त किया जाता है, जो किसी एक अक्षांश