Ch 2निःशुल्क

Chapter 2

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Practical Geography (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
अध्याय 1 / 8Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

2.1 सुदूर संवेदन-तकनीक का परिचय

व्याख्या

2.1 सुदूर संवेदन-तकनीक का परिचय

सुदूर संवेदन-तकनीक (Remote Sensing Technology) भौगोलिक अध्ययन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें किसी वस्तु, क्षेत्र या घटना की जानकारी बिना सीधे संपर्क के प्राप्त की जाती है। सुदूर संवेदन मुख्यतः उपग्रहों या विमानों द्वारा पृथ्वी की सतह से परावर्तित या उत्सर्जित विद्युतचुंबकीय विकिरण का मापन करके सूचनाएँ एकत्र करता है। यह तकनीक प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, पर्यावरणीय अध्ययन, कृषि, वनस्पति, जल संसाधन, आपदा प्रबंधन आदि क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है। सुदूर संवेदन के विकास ने भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और वैश्विक स्थान निर्धारण प्रणाली (GPS) के साथ मिलकर भौगोलिक विश्लेषण को और अधिक सटीक एवं प्रभावी बनाया है।

  • सुदूर संवेदन-तकनीक बिना सीधे संपर्क के जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया है।
  • यह मुख्यतः उपग्रहों या विमानों द्वारा पृथ्वी की सतह से परावर्तित विकिरण का मापन करता है।
  • इस तकनीक का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में किया जाता है।
  • सुदूर संवेदन भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) के साथ मिलकर कार्य करता है।
  • यह कृषि, वन, जल संसाधन, पर्यावरणीय अध्ययन आदि में सहायक है।
  • 📌 सुदूर संवेदन: बिना सीधे संपर्क के जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया।
  • 📌 विद्युतचुंबकीय विकिरण: ऊर्जा का वह रूप जो तरंगों के रूप में संचरित होती है।

2.2 सुदूर संवेदन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

व्याख्या

2.2 सुदूर संवेदन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सुदूर संवेदन-तकनीक का विकास 19वीं सदी में फोटोग्राफी के आविष्कार के साथ आरंभ हुआ। प्रारंभ में, गुब्बारों, पतंगों और विमानों से फोटोग्राफ लिए जाते थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सैन्य उद्देश्यों के लिए हवाई फोटोग्राफी का व्यापक उपयोग हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, रडार और इन्फ्रारेड तकनीकों का विकास हुआ। 1960 के दशक में उपग्रहों के प्रक्षेपण के साथ सुदूर संवेदन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। 1972 में लैंडसैट-1 उपग्रह के प्रक्षेपण ने पृथ्वी के संसाधनों के अध्ययन के लिए नए द्वार खोले। भारत में सुदूर संवेदन का विकास 1988 में IRS-1A उपग्रह के प्रक्षेपण से हुआ।

  • सुदूर संवेदन का आरंभ फोटोग्राफी के आविष्कार से हुआ।
  • प्रथम विश्व युद्ध में हवाई फोटोग्राफी का सैन्य उपयोग हुआ।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रडार और इन्फ्रारेड तकनीकों का विकास हुआ।
  • 1960 के दशक में उपग्रहों के प्रक्षेपण ने सुदूर संवेदन को नया आयाम दिया।
  • भारत में 1988 में IRS-1A उपग्रह के प्रक्षेपण से सुदूर संवेदन का विकास हुआ।
  • 📌 हवाई फोटोग्राफी: विमान या उपग्रह से ली गई पृथ्वी की तस्वीरें।
  • 📌 लैंडसैट: पृथ्वी संसाधन उपग्रहों की अमेरिकी श्रृंखला।

2.3 विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम

अवधारणा

2.3 विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम

विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Spectrum) वह संपूर्ण सीमा है जिसमें विद्युतचुंबकीय विकिरण की विभिन्न तरंगदैर्घ्य (wavelengths) और आवृत्तियाँ (frequencies) आती हैं। इसमें गामा किरणें, एक्स-रे, पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश, अवरक्त, सूक्ष्मतरंग (m