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Chapter 2

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Political Theory & Thought (Hindi)📖 9 नोट्स⏱️ ~14 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 16Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अनुभाग में राज्य की बदलती भूमिका की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके महत्व को स्पष्ट किया गया है। राज्य का अर्थ केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि यह समाज के विभिन्न पहलुओं—राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक—से गहराई से जुड़ा है। प्रारंभिक काल में राज्य की भूमिका सीमित थी, लेकिन समय के साथ-साथ इसमें व्यापक परिवर्तन आए हैं। औद्योगिक क्रांति, उपनिवेशवाद, स्वतंत्रता संग्राम, वैश्वीकरण और उदारीकरण जैसी प्रक्रियाओं ने राज्य की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया है। आज राज्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नागरिकों के कल्याण, आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभाता है।

  • राज्य की भूमिका समय के साथ बदलती रही है।
  • राज्य केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, समाज के सभी पक्षों से जुड़ा है।
  • औद्योगिक क्रांति और वैश्वीकरण ने राज्य की भूमिका को नया स्वरूप दिया।
  • आधुनिक राज्य नागरिकों के कल्याण और अधिकारों की रक्षा करता है।
  • राज्य की भूमिका का विस्तार सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक हुआ है।
  • 📌 राज्य: एक राजनीतिक संगठन जो किसी निश्चित भू-भाग पर शासन करता है।
  • 📌 भूमिका: किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा निभाई जाने वाली जिम्मेदारी या कार्य।

राज्य की पारंपरिक भूमिका

अवधारणा

राज्य की पारंपरिक भूमिका

राज्य की पारंपरिक भूमिका मुख्यतः सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, न्याय व्यवस्था और कर संग्रहण तक सीमित थी। राज्य का कार्य था बाहरी आक्रमणों से रक्षा करना, आंतरिक शांति बनाए रखना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना। पारंपरिक राज्य न्यूनतम हस्तक्षेप की नीति अपनाता था, जिसमें आर्थिक और सामाजिक मामलों में उसकी भूमिका सीमित थी। इस भूमिका का आधार 'रात्रि प्रहरी राज्य' (Night Watchman State) की अवधारणा थी, जिसमें राज्य केवल सुरक्षा और न्याय व्यवस्था तक सीमित रहता था।

  • राज्य की पारंपरिक भूमिका सुरक्षा और कानून व्यवस्था तक सीमित थी।
  • आर्थिक और सामाजिक मामलों में राज्य का हस्तक्षेप न्यूनतम था।
  • न्याय व्यवस्था और कर संग्रहण राज्य के मुख्य कार्य थे।
  • रात्रि प्रहरी राज्य की अवधारणा प्रचलित थी।
  • नागरिकों के अधिकारों की रक्षा राज्य का कर्तव्य था।
  • 📌 रात्रि प्रहरी राज्य: वह राज्य जो केवल सुरक्षा और न्याय व्यवस्था तक सीमित हो।
  • 📌 न्यूनतम हस्तक्षेप: राज्य द्वारा नागरिकों के निजी मामलों में कम से कम दखल।

कल्याणकारी राज्य की अवधारणा

परिभाषा

कल्याणकारी राज्य की अवधारणा

कल्याणकारी राज्य वह है, जो नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कल्याण के लिए सक्रिय रूप से कार्य करता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को व्यापक मान्यता मिली। इसमें राज्य का उद्देश्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं,