Chapter 15
Chapter 15 — अध्ययन नोट्स
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परिचय
व्याख्यापरिचय
इस अनुभाग में बहुसंस्कृतिवाद की अवधारणा का परिचय दिया गया है। बहुसंस्कृतिवाद का अर्थ है—एक समाज में विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक, भाषाई और जातीय समूहों का सह-अस्तित्व। यह विचारधारा मानती है कि विविधता समाज की शक्ति है और सभी सांस्कृतिक समूहों को समान अधिकार तथा सम्मान मिलना चाहिए। बहुसंस्कृतिवाद के उद्भव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विशेषकर उपनिवेशवाद के बाद के समाजों में, विस्तार से समझाई गई है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार वैश्वीकरण, प्रवासन, और उपनिवेशवाद के कारण समाज में विविधता बढ़ी और बहुसंस्कृतिवाद की आवश्यकता महसूस हुई। इस अनुभाग में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बहुसंस्कृतिवाद केवल सह-अस्तित्व नहीं, बल्कि संवाद, सहभागिता और न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग करता है।
- बहुसंस्कृतिवाद का अर्थ विभिन्न सांस्कृतिक समूहों का सह-अस्तित्व है।
- यह विचारधारा विविधता को समाज की शक्ति मानती है।
- सभी सांस्कृतिक समूहों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
- वैश्वीकरण और प्रवासन ने बहुसंस्कृतिवाद को प्रासंगिक बनाया।
- यह केवल सह-अस्तित्व नहीं, बल्कि संवाद और सहभागिता पर बल देता है।
- 📌 बहुसंस्कृतिवाद: विभिन्न सांस्कृतिक समूहों का एक समाज में समान अधिकारों के साथ सह-अस्तित्व।
- 📌 वैश्वीकरण: विश्व के देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों का विस्तार।
बहुसंस्कृतिवाद की आवश्यकता
अवधारणाबहुसंस्कृतिवाद की आवश्यकता
इस अनुभाग में बहुसंस्कृतिवाद की आवश्यकता को विस्तार से समझाया गया है। समाज में विविधता स्वाभाविक है—लोगों की भाषा, धर्म, जाति, रीति-रिवाज, खान-पान, पहनावा आदि में अंतर होता है। बहुसंस्कृतिवाद इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह विविधता को नकारता नहीं, बल्कि उसे स्वीकारता और सम्मान देता है। यह सामाजिक समरसता, न्याय और समानता की स्थापना के लिए अनिवार्य है। बहुसंस्कृतिवाद के बिना समाज में बहिष्कार, भेदभाव, संघर्ष और असमानता बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त, यह भी बताया गया है कि लोकतांत्रिक समाजों में बहुसंस्कृतिवाद नागरिकता की व्यापक अवधारणा को बढ़ावा देता है, जिसमें सभी समूहों को भागीदारी का अधिकार मिलता है।
- विविधता समाज की स्वाभाविक विशेषता है।
- बहुसंस्कृतिवाद विविधता को सम्मान देता है।
- यह सामाजिक समरसता और न्याय की स्थापना में सहायक है।
- बहुसंस्कृतिवाद के बिना भेदभाव और संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।
- लोकतांत्रिक समाजों में यह नागरिकता की व्यापकता को बढ़ाता है।
- 📌 नागरिकता: एक देश के नागरिक होने की स्थिति, जिसमें अधिकार और कर्तव्य दोनों शामिल हैं।
- 📌 सामाजिक समरसता: समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सम्मान और सहयोग की भावना।
बहुसंस्कृतिवाद के सैद्धांतिक आधार
व्याख्याबहुसंस्कृतिवाद के सैद्धांतिक आधार
इस अनुभाग में बहुसंस्कृतिवाद के सैद्धांतिक आधारों की विवेचना की गई है। बहुसंस्कृतिवाद का मुख्य आधार है—सांस्कृतिक विविधता का सम्मान और समानता। यह विचारधारा मानती है कि प्रत्येक संस्कृति की अपनी विशिष्टता है और उसे दबाया या मिटाया नहीं जाना चाहिए। बहु
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Political Theory & Thought · Vardhman Mahaveer Open University
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