Food Quality and Food Safety | Class 12 Home Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन

Food Quality and Food Safety – this guide gives you a concise, exam-ready overview of Food Quality and Food Safety from Class 12 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
खाद्य मानक
खाद्य मानक का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना है ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके। खाद्य मानक देश के भीतर और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। मानकों के चार स्तर होते हैं — कंपनी मानक, राष्ट्रीय मानक, क्षेत्रीय मानक और अंतर्राष्ट्रीय मानक।
भारत में भारतीय मानक ब्यूरो (बी.आई.एस.) कंपनी और राष्ट्रीय स्तर पर मानक बनाता है। एगमार्क कृषि उत्पादों के लिए स्वैच्छिक प्रमाणीकरण योजना है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (एफ.एस.एस.ए.), 2006 ने खाद्य से संबंधित नियमों को समेकित किया है और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ.एस.एस.ए.आई.) की स्थापना की है।
एफ.एस.एस.ए.आई. खाद्य सुरक्षा, मानकों के निर्धारण, प्रमाणीकरण, प्रयोगशालाओं की मान्यता, नीति निर्माण, जागरूकता, प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के विकास में कार्य करता है। इसके अलावा, भारत में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (PFA, 1954) और अन्य आदेश फल, सब्जी, मांस, वनस्पति तेल आदि के लिए गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोडेक्स ऐलिमेन्टेरियस कमीशन (सी.ए.सी.), अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आई.एस.ओ.) और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.) खाद्य मानकों और व्यापार को नियंत्रित करते हैं। कोडेक्स उपभोक्ता स्वास्थ्य और खाद्य व्यापार के लिए मानक विकसित करता है। आई.एस.ओ. गुणवत्ता प्रबंधन के लिए मानक प्रदान करता है। डब्ल्यू.टी.ओ. वैश्विक व्यापार को सुगम बनाता है।
एक प्रभावी खाद्य नियंत्रण प्रणाली में खाद्य निरीक्षण और विश्लेषणात्मक क्षमता शामिल होती है, जो खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
📊 Diagram: Table on page 12 (2×2)
🔗 Connection: खाद्य मानकों के बाद, खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणालियों की चर्चा की गई है।
Table on page 12 (2×2)
| कोडेक्स | आई. एस. ओ. |
|---|
| • राष्ट्रीय नियमनों के विकास के लिए उपयोग में लाया जाता है।
Table on page 9 (3×4)
| खाद्य पदार्थ/उत्पाद का नाम | ताजा | भंडारण के समय | |
|---|---|---|---|
| दूसरे या तीसरे दिन | सातवें दिन |
| दिखावट
Table on page 9 (3×4)
| बनावट | |||
|---|---|---|---|
| (दृढ़ता/कोमलता/नरम) | |||
| रंग | |||
| गंध |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शुद्ध घी में तिल के तेल का पता लगाने का परीक्षण, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या घी में हाइड्रोजेनिकृत वसा/वनस्पति की मिलावट है, जिसमें तिल का तेल है। रसायन — 1. प्रतिशत सुक्रोस विलयन सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विधि — पाँच परखनलियाँ लीजिए परखनली A में लगभग 2ml तिल का तेल डालिए। परखनली B में लगभग 2ml मूंगफली का तेल डालिए। परखनली C में लगभग 2ml पिघला हुआ वनस्पति घी डालिए। परखनली D में लगभग 2ml पिघला हुआ ब्रांड वाला घी लीजिए। परखनली E में लगभग 2ml पिघला हुआ खुला घी लीजिए। प्रत्येक परखनली में 1ml का 1 प्रतिशत सुक्रोस विलयन मिलाइए। अब प्रत्येक परखनली में 1ml सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को अच्छी तरह मिलाइए। प्रेक्षण — नोट कीजिए कि क्या गुलाबी रंग उत्पन्न होता है। गुलाबी रंग होना यह बताता है कि घी में तिल का तेल मिला हुआ है। व्याख्या — घी के नमूने शुद्ध हैं अथवा मिलावट वाले ?
इस परीक्षण में पाँच परखनलियाँ तैयार की जाती हैं जिनमें विभिन्न तेल और घी के नमूने होते हैं। प्रत्येक परखनली में 1ml 1% सुक्रोस विलयन और 1ml सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है। यदि गुलाबी रंग उत्पन्न होता है, तो इसका अर्थ है कि उस नमूने में तिल का तेल मिला हुआ है। इस प्रकार, ब्रांड वाला घी और खुला घी की परखनलियों में गुलाबी रंग का प्रेक्षण करके यह निर्धारित किया जा सकता है कि घी शुद्ध है या उसमें तिल के तेल की मिलावट है। यदि गुलाबी रंग नहीं आता है, तो घी शुद्ध माना जाएगा।
चाय की पत्तियों में डंठल के आधिक्य की उपस्थिति के लिए परीक्षण विधि — विधि — 1. एक 1000ml क्षमता वाला शंकु के आकार वाले प्रलास्क अथवा बीकर में 5 ग्राम पत्तियाँ तोलकर डाल दीजिए। 2. इसमें 500ml जल मिलाकर 15 मिनट तक उबालिए। 3. अब द्रव को छान लीजिए। 4. चाय के नमूने को एक चपटी सफ़ेद प्लेट में डाल दीजिए और चिमटी की सहायता से डंडियों को चुनकर एक पहले से तोल कर रखी पेट्रीडिश या क्रूसिबल में डालिए। 5. डंडियों को 100°C पर सुखा लीजिए जिससे सारी नमी दूर हो जाए। 6. सूखी डंडियों को तोल लीजिए। 7. चाय में डंडियों का प्रतिशत निकालिए। व्याख्या — चाय में डंडियों का अनुपात 25 प्रतिशत से कम होना चाहिए।
इस परीक्षण में चाय की पत्तियों में डंठल की मात्रा निर्धारित की जाती है। 5 ग्राम चाय की पत्तियों को 500ml पानी में 15 मिनट तक उबालकर छाना जाता है। फिर डंडियों को अलग कर सुखाया जाता है और उनका वजन लिया जाता है। डंडियों का प्रतिशत निकालने के लिए (डंडियों का वजन / कुल नमूने का वजन) × 100 किया जाता है। यदि डंडियों का प्रतिशत 25% से कम है, तो चाय की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है।
काली मिर्च में हल्की बेरी तेल निकली काली मिर्च का पता लगाने के लिए परीक्षण रसायन — ऐल्कोहल और जल का परीक्षण (घनत्व 0.8 से 0.82) विधि — 1. एक 250mL वाले बीकर में लगभग 10 ग्राम काली मिर्च लीजिए। 2. इसमें लगभग 150-200 mL ऐल्कोहल और जल का मिश्रण मिलाइए। 3. उन बेरी को निकाल लीजिए जो तैर कर ऊपर आ जाती हैं। 4. बेरियों को सुखा कर तोल लीजिए। 5. सूखी बेरी के प्रतिशत की गणना कर लीजिए। व्याख्या — हल्की बेरी का प्रतिशत अधिक होने से पता चलता है कि इनमें उपस्थित सुगंधित तेल निकाल लिया गया है।
इस परीक्षण में काली मिर्च के नमूने को ऐल्कोहल और जल के मिश्रण में डाला जाता है। हल्की बेरी जो तेल निकालने के कारण तैरती हैं, उन्हें अलग किया जाता है। फिर उन्हें सुखाकर उनका वजन लिया जाता है। हल्की बेरी का प्रतिशत निकालने के लिए (हल्की बेरी का वजन / कुल नमूने का वजन) × 100 किया जाता है। अधिक हल्की बेरी का प्रतिशत यह दर्शाता है कि काली मिर्च में सुगंधित तेल की कमी है।
हल्दी में मेटानिल येलो की उपस्थिति के लिए परीक्षण रसायन — सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विधि — 1. एक परखनली में लगभग 2 ग्राम हल्दी लीजिए। 2. इसमें 5ml आसुत जल मिलाइए। 3. अच्छी तरह मिलाइए। 4. अब इसमें धीरे-धीरे सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (लगभग 5ml से 10 ml) मिलाइए। प्रेक्षण — गुलाबी रंग को मैजेंटा रंग में बदलते हुए परखनली को ध्यान से देखें। व्याख्या — गुलाबी से मैजेंटा रंग आने का अर्थ है कि हल्दी में मेटानिल येलों रंग उपस्थित है, जो कि एक विषाक्त मिलावट है।
इस परीक्षण में हल्दी के नमूने को पानी में घोलकर सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है। यदि गुलाबी रंग मैजेंटा रंग में परिवर्तित होता है, तो इसका अर्थ है कि हल्दी में मेटानिल येलो नामक विषाक्त रंग मौजूद है। यह मिलावट हल्दी की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है।
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