Food Quality and Food Safety
Food Quality and Food Safety — Study Notes
NCERT-aligned · 9 notes · 3 shown free
अधिगम उद्देश्य
Explanationअधिगम उद्देश्य
इस अध्याय का उद्देश्य विद्यार्थियों को खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की गहन समझ प्रदान करना है। अध्याय के अंतर्गत विद्यार्थी खाद्यजनित रोगों के कारणों और उनके प्रभावों को समझेंगे। साथ ही, वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों की जानकारी प्राप्त करेंगे और खाद्य गुणवत्ता तथा सुरक्षा में इनके महत्व को जानेंगे। खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्रों की भूमिका और आवश्यकता को भी समझा जाएगा। अंत में, खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध जीविका के विकल्पों से परिचित कराया जाएगा। इस प्रकार, यह अध्याय खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता के व्यापक पहलुओं को समझने और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को जानने में सहायक होगा।
- खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता के महत्व को समझना।
- खाद्यजनित रोगों के कारण और प्रभावों की जानकारी।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों की समझ।
- खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्रों की भूमिका।
- खाद्य क्षेत्र में जीविका के अवसरों से परिचय।
- 📌 खाद्य सुरक्षा: भोजन का मानव उपभोग के लिए सुरक्षित होना।
- 📌 खाद्य गुणवत्ता: खाद्य पदार्थों के उपभोक्ता के लिए गुण।
- 📌 खाद्यजनित रोग: असुरक्षित खाद्य से होने वाले रोग।
प्रस्तावना
Explanationप्रस्तावना
प्रस्तावना में बताया गया है कि भोजन किसी भी जनसंख्या की स्वास्थ्य, पोषण और उत्पादकता का प्रमुख निर्धारक होता है। इसलिए भोजन का पौष्टिक और सुरक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। असुरक्षित भोजन से अनेक खाद्यजनित रोग उत्पन्न होते हैं, जो वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या हैं। उदाहरण के लिए, वर्ष 2005 में दस्त जैसे रोगों से 18 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। भारत में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के अनुसार 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में गंभीर दस्त के 9 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। खाद्यजनित रोग न केवल स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं, बल्कि व्यापार, पर्यटन, बेरोजगारी और आर्थिक विकास में भी बाधा उत्पन्न करते हैं। इस कारण खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता का महत्व विश्व स्तर पर बढ़ गया है।
- खाद्यजनित रोग वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या हैं।
- भारत में बच्चों में दस्त के गंभीर मामले प्रचलित हैं।
- असुरक्षित भोजन से आर्थिक और सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता का वैश्विक महत्व बढ़ा है।
- 📌 खाद्यजनित रोग: असुरक्षित भोजन से होने वाले रोग।
- 📌 खाद्य सुरक्षा: सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना।
महत्व
Explanationमहत्व
खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता का महत्व घरेलू स्तर से लेकर बड़े पैमाने पर खाद्य उत्पादन, संसाधन, वितरण और उपभोग तक व्यापक है। पुराने समय में खाद्य पदार्थ अधिकतर घरेलू स्तर पर संसाधित होते थे, इसलिए उनकी शुद्धता पर कम चिंता होती थी। परंतु प्रौद्योगिकी, संस
Practice Questions — Food Quality and Food Safety
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.शुद्ध घी में तिल के तेल का पता लगाने का परीक्षण, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या घी में हाइड्रोजेनिकृत वसा/वनस्पति की मिलावट है, जिसमें तिल का तेल है। रसायन — 1. प्रतिशत सुक्रोस विलयन सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विधि — पाँच परखनलियाँ लीजिए परखनली A में लगभग 2ml तिल का तेल डालिए। परखनली B में लगभग 2ml मूंगफली का तेल डालिए। परखनली C में लगभग 2ml पिघला हुआ वनस्पति घी डालिए। परखनली D में लगभग 2ml पिघला हुआ ब्रांड वाला घी लीजिए। परखनली E में लगभग 2ml पिघला हुआ खुला घी लीजिए। प्रत्येक परखनली में 1ml का 1 प्रतिशत सुक्रोस विलयन मिलाइए। अब प्रत्येक परखनली में 1ml सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को अच्छी तरह मिलाइए। प्रेक्षण — नोट कीजिए कि क्या गुलाबी रंग उत्पन्न होता है। गुलाबी रंग होना यह बताता है कि घी में तिल का तेल मिला हुआ है। व्याख्या — घी के नमूने शुद्ध हैं अथवा मिलावट वाले ?
Answer:
इस परीक्षण में पाँच परखनलियाँ तैयार की जाती हैं जिनमें विभिन्न तेल और घी के नमूने होते हैं। प्रत्येक परखनली में 1ml 1% सुक्रोस विलयन और 1ml सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है। यदि गुलाबी रंग उत्पन्न होता है, तो इसका अर्थ है कि उस नमूने में तिल का तेल मिला हुआ है। इस प्रकार, ब्रांड वाला घी और खुला घी की परखनलियों में गुलाबी रंग का प्रेक्षण करके यह निर्धारित किया जा सकता है कि घी शुद्ध है या उसमें तिल के तेल की मिलावट है। यदि गुलाबी रंग नहीं आता है, तो घी शुद्ध माना जाएगा।
Explanation:
गुलाबी रंग का निर्माण तिल के तेल में उपस्थित कुछ घटकों के कारण होता है जो सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सुक्रोस के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। इस प्रतिक्रिया के आधार पर मिलावट का पता चलता है। इसलिए, रंग परिवर्तन का निरीक्षण करके घी की शुद्धता का निर्धारण किया जाता है।
Q2.चाय की पत्तियों में डंठल के आधिक्य की उपस्थिति के लिए परीक्षण विधि — विधि — 1. एक 1000ml क्षमता वाला शंकु के आकार वाले प्रलास्क अथवा बीकर में 5 ग्राम पत्तियाँ तोलकर डाल दीजिए। 2. इसमें 500ml जल मिलाकर 15 मिनट तक उबालिए। 3. अब द्रव को छान लीजिए। 4. चाय के नमूने को एक चपटी सफ़ेद प्लेट में डाल दीजिए और चिमटी की सहायता से डंडियों को चुनकर एक पहले से तोल कर रखी पेट्रीडिश या क्रूसिबल में डालिए। 5. डंडियों को 100°C पर सुखा लीजिए जिससे सारी नमी दूर हो जाए। 6. सूखी डंडियों को तोल लीजिए। 7. चाय में डंडियों का प्रतिशत निकालिए। व्याख्या — चाय में डंडियों का अनुपात 25 प्रतिशत से कम होना चाहिए।
Answer:
इस परीक्षण में चाय की पत्तियों में डंठल की मात्रा निर्धारित की जाती है। 5 ग्राम चाय की पत्तियों को 500ml पानी में 15 मिनट तक उबालकर छाना जाता है। फिर डंडियों को अलग कर सुखाया जाता है और उनका वजन लिया जाता है। डंडियों का प्रतिशत निकालने के लिए (डंडियों का वजन / कुल नमूने का वजन) × 100 किया जाता है। यदि डंडियों का प्रतिशत 25% से कम है, तो चाय की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है।
Explanation:
डंडियों की अधिकता चाय की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। इसलिए, इस परीक्षण से यह सुनिश्चित किया जाता है कि चाय में डंडियों की मात्रा मानक के अनुसार हो।
Q3.काली मिर्च में हल्की बेरी तेल निकली काली मिर्च का पता लगाने के लिए परीक्षण रसायन — ऐल्कोहल और जल का परीक्षण (घनत्व 0.8 से 0.82) विधि — 1. एक 250mL वाले बीकर में लगभग 10 ग्राम काली मिर्च लीजिए। 2. इसमें लगभग 150-200 mL ऐल्कोहल और जल का मिश्रण मिलाइए। 3. उन बेरी को निकाल लीजिए जो तैर कर ऊपर आ जाती हैं। 4. बेरियों को सुखा कर तोल लीजिए। 5. सूखी बेरी के प्रतिशत की गणना कर लीजिए। व्याख्या — हल्की बेरी का प्रतिशत अधिक होने से पता चलता है कि इनमें उपस्थित सुगंधित तेल निकाल लिया गया है।
Answer:
इस परीक्षण में काली मिर्च के नमूने को ऐल्कोहल और जल के मिश्रण में डाला जाता है। हल्की बेरी जो तेल निकालने के कारण तैरती हैं, उन्हें अलग किया जाता है। फिर उन्हें सुखाकर उनका वजन लिया जाता है। हल्की बेरी का प्रतिशत निकालने के लिए (हल्की बेरी का वजन / कुल नमूने का वजन) × 100 किया जाता है। अधिक हल्की बेरी का प्रतिशत यह दर्शाता है कि काली मिर्च में सुगंधित तेल की कमी है।
Explanation:
तेल निकली हल्की बेरी की उपस्थिति काली मिर्च की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। इस परीक्षण से मिलावट या गुणवत्ता की कमी का पता चलता है।
Q4.हल्दी में मेटानिल येलो की उपस्थिति के लिए परीक्षण रसायन — सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विधि — 1. एक परखनली में लगभग 2 ग्राम हल्दी लीजिए। 2. इसमें 5ml आसुत जल मिलाइए। 3. अच्छी तरह मिलाइए। 4. अब इसमें धीरे-धीरे सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (लगभग 5ml से 10 ml) मिलाइए। प्रेक्षण — गुलाबी रंग को मैजेंटा रंग में बदलते हुए परखनली को ध्यान से देखें। व्याख्या — गुलाबी से मैजेंटा रंग आने का अर्थ है कि हल्दी में मेटानिल येलों रंग उपस्थित है, जो कि एक विषाक्त मिलावट है।
Answer:
इस परीक्षण में हल्दी के नमूने को पानी में घोलकर सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है। यदि गुलाबी रंग मैजेंटा रंग में परिवर्तित होता है, तो इसका अर्थ है कि हल्दी में मेटानिल येलो नामक विषाक्त रंग मौजूद है। यह मिलावट हल्दी की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है।
Explanation:
रंग परिवर्तन मेटानिल येलो की उपस्थिति का सूचक है, जो हल्दी में मिलावट का संकेत देता है। इस प्रकार का परीक्षण हल्दी की शुद्धता जांचने के लिए उपयोगी है।
Q5.दूध और आइसक्रीम में स्टार्च की उपस्थित का परीक्षण रासायन — आयोडीन विलयन विधि — 1. एक परखनली में लगभग 10 मि.ली. दूध या पिघली हुई आइसक्रीम लीजिए। 2. इसमें अब बूंद-बूंद करके आयोडीन विलयन डालिए। 3. परखनली की सामग्री को हिलाकर अच्छी तरह मिलाइए। प्रेक्षण — देखें कि परखनली की सामग्री का रंग क्या नीला हो जाता है। व्याख्या — नीला रंग विकसित होना नमूने में स्टार्च की उपस्थिति दर्शाता है।
Answer:
इस परीक्षण में दूध या आइसक्रीम के नमूने में आयोडीन विलयन मिलाया जाता है। यदि रंग नीला हो जाता है, तो इसका अर्थ है कि नमूने में स्टार्च मौजूद है। स्टार्च की उपस्थिति दूध या आइसक्रीम की गुणवत्ता के लिए हानिकारक हो सकती है क्योंकि यह मिलावट का संकेत है।
Explanation:
आयोडीन स्टार्च के साथ प्रतिक्रिया करके नीला रंग उत्पन्न करता है। इसलिए, रंग परिवर्तन से स्टार्च की उपस्थिति का पता चलता है।
Q6.हींग में कोलेफेनियल रेजिन की उपस्थिति का परीक्षण रसायन — कॉपर ऐसीटेट का 0.5 प्रतिशत जलीय विलयन, पेट्रोलिम ईथर विधि — 1. एक परखनली में लगभग 1-2 ग्राम हींग का नमूना लीजिए। इसमें लगभग 10ml पेट्रोलियम ईथर मिलाइए। 2. परखनली को अच्छी तरह हिलाइए। 3. परखनली की सामग्री को छानिए। 4. छने हुए द्रव का 5ml लेकर कॉपर ऐसीटेट का 5ml विलयन मिलाइए। 5. हिलाइए और परतों को पृथक होने दीजिए। प्रेक्षण — नोट करें कि क्या ईथर वाली परत का रंग नीला या हरा हो गया है। व्याख्या — नीला या हरा रंग आना कोलोफेनियल रेजिन की उपस्थिति दर्शाता है, जिसे हींग में मिलाने की अनुमति नहीं है।
Answer:
इस परीक्षण में हींग के नमूने को पेट्रोलियम ईथर में घोलकर हिलाया जाता है और छाना जाता है। फिर छने हुए द्रव में कॉपर ऐसीटेट विलयन मिलाया जाता है। यदि ईथर वाली परत का रंग नीला या हरा हो जाता है, तो इसका अर्थ है कि हींग में कोलेफेनियल रेजिन मौजूद है, जो मिलावट है और अनुमति नहीं है।
Explanation:
कोलेफेनियल रेजिन कॉपर ऐसीटेट के साथ प्रतिक्रिया करके रंग परिवर्तन करता है। इस प्रकार रंग परिवर्तन से मिलावट का पता चलता है।
Q7.खाद्य सुरक्षा का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
Answer:
खाद्य सुरक्षा का अर्थ है यह आश्वासन कि भोजन मानव उपभोग के लिए सुरक्षित और स्वीकार्य है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि असुरक्षित भोजन से खाद्यजनित रोग हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य, आर्थिक विकास और सामाजिक जीवन को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, वर्ष 2005 में दस्त से 18 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी।
Explanation:
खाद्य सुरक्षा का मतलब है कि भोजन ऐसा हो जो मानव के खाने के लिए सुरक्षित हो। असुरक्षित भोजन से अनेक रोग हो सकते हैं, जो न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए खाद्य सुरक्षा का महत्व बहुत अधिक है।
Q8.निम्नलिखित में से कौन सा खाद्य पदार्थों में भौतिक संकट का उदाहरण है?
Answer:
लकड़ी के टुकड़े
Explanation:
भौतिक संकट में खाद्य पदार्थों में उपस्थित ऐसे पदार्थ आते हैं जो सामान्यतः खाद्य में नहीं होने चाहिए और जो रोग उत्पन्न कर सकते हैं, जैसे लकड़ी, पत्थर, कीट के अंश आदि। कीटनाशक और परिरक्षक रासायनिक संकट में आते हैं जबकि स्टैफ़लोकॉक्स आरियस जैविक संकट में।
All 7 Chapters in Manav Paristhitik avam Parivar Vigyan Bhag 1
Home Science · Class 12