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Food Quality and Food Safety | Class 12 Home Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन

Food Quality and Food Safety | Class 12 Home Science Notes

Food Quality and Food Safety – this guide gives you a concise, exam-ready overview of Food Quality and Food Safety from Class 12 Home Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

मूलभूत संकल्पनाएँ

इस खंड में खाद्य सुरक्षा, आविषालुता, संकट, संदूषण, खाद्य अपमिश्रण और खाद्य गुणवत्ता की परिभाषाएँ और उनके प्रकार विस्तार से समझाए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा का अर्थ है भोजन का मानव उपभोग के लिए सुरक्षित और स्वीकार्य होना। आविषालुता किसी पदार्थ की किसी प्रकार की क्षति उत्पन्न करने की क्षमता है। संकट वह संभावना है कि किसी पदार्थ के उपयोग से हानि हो सकती है। संकट तीन प्रकार के होते हैं — भौतिक, रासायनिक और जैविक।

भौतिक संकट में खाद्य पदार्थों में उपस्थित लकड़ी, पत्थर, कीट के अंश, बाल आदि आते हैं जो रोग उत्पन्न कर सकते हैं (चित्र 6.1)।

रासायनिक संकट में कीटनाशक, विषैली धातुएँ, परिरक्षक, खाद्य रंग आदि शामिल हैं जो खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक या अनजाने में मिल जाते हैं (चित्र 6.2)।

जैविक संकट में सूक्ष्मजीव और परजीवी आते हैं जो खाद्यजनित रोग उत्पन्न करते हैं। खाद्य संक्रमण और विषाक्तता इसके दो प्रकार हैं। संक्रमण में रोगाणु शरीर में प्रवेश कर रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे साल्मोनेला। विषाक्तता में जीवाणु द्वारा उत्पन्न विषाक्त पदार्थ रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे स्टैफ़लोकॉक्स आरियस।

संदूषण का अर्थ है खाद्य पदार्थों में हानिकारक, अखाद्य या आपत्तिजनक बाहरी पदार्थों की उपस्थिति।

खाद्य अपमिश्रण वह प्रक्रिया है जिसमें भोजन की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जैसे घटक का निष्कर्षण या खराब सामग्री का मिलावट।

खाद्य गुणवत्ता उपभोक्ता के लिए खाद्य पदार्थ के गुणों को दर्शाती है, जिसमें रंग, गंध, बनावट, स्वाद, पोषण और सुरक्षा शामिल हैं। सुरक्षा खाद्य गुणवत्ता का सबसे महत्वपूर्ण गुण है। खाद्य सेवा उपलब्ध कराने वालों को कच्चे माल, जल, परिसर, उपकरण, भंडारण, स्वास्थ्य विज्ञान और सेवा के तरीकों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

📊 Diagram: चित्र 6.1 – खाद्य पदार्थों के भौतिक संकट; चित्र 6.2 – खाद्य पदार्थों में अदृश्य रासायनिक संकट; चित्र 6.3 – खाद्य पदार्थों में दिखाई देने वाले जैविक संकट; चित्र 6.4 – खाद्य पदार्थों में दिखाई न देने वाले सूक्ष्मजैविक संकट; चित्र 6.5 – खाद्य पदार्थों का संक्रमण

🔗 Connection: मूलभूत संकल्पनाओं के बाद, खाद्य मानकों और उनके महत्व की चर्चा की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुद्ध घी में तिल के तेल का पता लगाने का परीक्षण, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या घी में हाइड्रोजेनिकृत वसा/वनस्पति की मिलावट है, जिसमें तिल का तेल है। रसायन — 1. प्रतिशत सुक्रोस विलयन सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विधि — पाँच परखनलियाँ लीजिए परखनली A में लगभग 2ml तिल का तेल डालिए। परखनली B में लगभग 2ml मूंगफली का तेल डालिए। परखनली C में लगभग 2ml पिघला हुआ वनस्पति घी डालिए। परखनली D में लगभग 2ml पिघला हुआ ब्रांड वाला घी लीजिए। परखनली E में लगभग 2ml पिघला हुआ खुला घी लीजिए। प्रत्येक परखनली में 1ml का 1 प्रतिशत सुक्रोस विलयन मिलाइए। अब प्रत्येक परखनली में 1ml सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को अच्छी तरह मिलाइए। प्रेक्षण — नोट कीजिए कि क्या गुलाबी रंग उत्पन्न होता है। गुलाबी रंग होना यह बताता है कि घी में तिल का तेल मिला हुआ है। व्याख्या — घी के नमूने शुद्ध हैं अथवा मिलावट वाले ?

इस परीक्षण में पाँच परखनलियाँ तैयार की जाती हैं जिनमें विभिन्न तेल और घी के नमूने होते हैं। प्रत्येक परखनली में 1ml 1% सुक्रोस विलयन और 1ml सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है। यदि गुलाबी रंग उत्पन्न होता है, तो इसका अर्थ है कि उस नमूने में तिल का तेल मिला हुआ है। इस प्रकार, ब्रांड वाला घी और खुला घी की परखनलियों में गुलाबी रंग का प्रेक्षण करके यह निर्धारित किया जा सकता है कि घी शुद्ध है या उसमें तिल के तेल की मिलावट है। यदि गुलाबी रंग नहीं आता है, तो घी शुद्ध माना जाएगा।

चाय की पत्तियों में डंठल के आधिक्य की उपस्थिति के लिए परीक्षण विधि — विधि — 1. एक 1000ml क्षमता वाला शंकु के आकार वाले प्रलास्क अथवा बीकर में 5 ग्राम पत्तियाँ तोलकर डाल दीजिए। 2. इसमें 500ml जल मिलाकर 15 मिनट तक उबालिए। 3. अब द्रव को छान लीजिए। 4. चाय के नमूने को एक चपटी सफ़ेद प्लेट में डाल दीजिए और चिमटी की सहायता से डंडियों को चुनकर एक पहले से तोल कर रखी पेट्रीडिश या क्रूसिबल में डालिए। 5. डंडियों को 100°C पर सुखा लीजिए जिससे सारी नमी दूर हो जाए। 6. सूखी डंडियों को तोल लीजिए। 7. चाय में डंडियों का प्रतिशत निकालिए। व्याख्या — चाय में डंडियों का अनुपात 25 प्रतिशत से कम होना चाहिए।

इस परीक्षण में चाय की पत्तियों में डंठल की मात्रा निर्धारित की जाती है। 5 ग्राम चाय की पत्तियों को 500ml पानी में 15 मिनट तक उबालकर छाना जाता है। फिर डंडियों को अलग कर सुखाया जाता है और उनका वजन लिया जाता है। डंडियों का प्रतिशत निकालने के लिए (डंडियों का वजन / कुल नमूने का वजन) × 100 किया जाता है। यदि डंडियों का प्रतिशत 25% से कम है, तो चाय की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है।

काली मिर्च में हल्की बेरी तेल निकली काली मिर्च का पता लगाने के लिए परीक्षण रसायन — ऐल्कोहल और जल का परीक्षण (घनत्व 0.8 से 0.82) विधि — 1. एक 250mL वाले बीकर में लगभग 10 ग्राम काली मिर्च लीजिए। 2. इसमें लगभग 150-200 mL ऐल्कोहल और जल का मिश्रण मिलाइए। 3. उन बेरी को निकाल लीजिए जो तैर कर ऊपर आ जाती हैं। 4. बेरियों को सुखा कर तोल लीजिए। 5. सूखी बेरी के प्रतिशत की गणना कर लीजिए। व्याख्या — हल्की बेरी का प्रतिशत अधिक होने से पता चलता है कि इनमें उपस्थित सुगंधित तेल निकाल लिया गया है।

इस परीक्षण में काली मिर्च के नमूने को ऐल्कोहल और जल के मिश्रण में डाला जाता है। हल्की बेरी जो तेल निकालने के कारण तैरती हैं, उन्हें अलग किया जाता है। फिर उन्हें सुखाकर उनका वजन लिया जाता है। हल्की बेरी का प्रतिशत निकालने के लिए (हल्की बेरी का वजन / कुल नमूने का वजन) × 100 किया जाता है। अधिक हल्की बेरी का प्रतिशत यह दर्शाता है कि काली मिर्च में सुगंधित तेल की कमी है।

हल्दी में मेटानिल येलो की उपस्थिति के लिए परीक्षण रसायन — सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विधि — 1. एक परखनली में लगभग 2 ग्राम हल्दी लीजिए। 2. इसमें 5ml आसुत जल मिलाइए। 3. अच्छी तरह मिलाइए। 4. अब इसमें धीरे-धीरे सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (लगभग 5ml से 10 ml) मिलाइए। प्रेक्षण — गुलाबी रंग को मैजेंटा रंग में बदलते हुए परखनली को ध्यान से देखें। व्याख्या — गुलाबी से मैजेंटा रंग आने का अर्थ है कि हल्दी में मेटानिल येलों रंग उपस्थित है, जो कि एक विषाक्त मिलावट है।

इस परीक्षण में हल्दी के नमूने को पानी में घोलकर सांद्रित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाया जाता है। यदि गुलाबी रंग मैजेंटा रंग में परिवर्तित होता है, तो इसका अर्थ है कि हल्दी में मेटानिल येलो नामक विषाक्त रंग मौजूद है। यह मिलावट हल्दी की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है।

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