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पारितंत्र | Class 12 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

पारितंत्र | Class 12 Biology Notes

पारितंत्र – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पारितंत्र from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

ऊर्जा प्रवाह

पृथ्वी पर अधिकांश पारिस्थितिक तंत्रों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है। सूर्य से आने वाली सौर विकिरण ऊर्जा का लगभग 50 प्रतिशत से कम भाग ही प्रकाश संश्लेषण के लिए उपयोगी होता है। पादप और प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीवाणु सूर्य की ऊर्जा को सरल अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक पदार्थ बनाने में लगाते हैं। पादप केवल 2-10 प्रतिशत प्रकाश संश्लेषणात्मक सक्रिय विकिरण का ग्रहण करते हैं, जो संपूर्ण विश्व के जीवों का पोषण करता है।

ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय होता है, अर्थात् ऊर्जा सूर्य से उत्पादकों तक और फिर उपभोक्ताओं तथा अंत में अपघटकों तक जाती है। ऊर्जा का यह प्रवाह ऊष्मा के रूप में हानि के कारण सीमित होता है। पारिस्थितिक तंत्रों को ऊष्मा गतिक के दूसरे नियम के अनुसार निरंतर ऊर्जा की आपूर्ति की आवश्यकता होती है।

स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र में शाकी एवं काष्ठीय पादप प्रमुख उत्पादक होते हैं, जबकि जलीय पारितंत्र में पादपप्लवक, काई और बड़े पादप उत्पादक हैं। खाद्य शृंखला पादप से शुरू होकर उपभोक्ताओं तक ऊर्जा का स्थानांतरण करती है। उपभोक्ता प्राथमिक (शाकाहारी), द्वितीयक (मांसाहारी) और तृतीयक उपभोक्ता हो सकते हैं। मृत जीवों से शुरू होने वाली अपरद खाद्य शृंखला में अपघटक मुख्य भूमिका निभाते हैं।

खाद्य शृंखलाओं का जाल (फूड वेब) विभिन्न आहार संबंधों का जटिल नेटवर्क होता है। प्रत्येक पोषण स्तर पर जीवित पदार्थ की मात्रा को जैवमात्रा कहते हैं। ऊर्जा प्रवाह में प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा की मात्रा घटती जाती है, लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा अगले स्तर तक पहुँचती है।

📊 Diagram: चित्र 12.2 एक पारिस्थितिक तंत्र में पोषण स्तर का आरेखीय निरूपण; चित्र 12.3 विभिन्न पोषण स्तरों में से होता हुआ ऊर्जा का प्रवाह

🧪 Activity: खाद्य शृंखला और खाद्य जाल का अध्ययन और उनके बीच अंतर समझना।

🔗 Connection: यह अनुभाग पारिस्थितिक पिरामिड की व्याख्या की ओर ले जाता है, जो पोषण स्तरों पर जीवों की संख्या, जैवमात्रा और ऊर्जा वितरण को दर्शाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिक्त स्थानों को भरो। (क) पादपों को …………………… कहते हैं; क्योंकि कार्बन डाईऑक्साइड का स्थिरीकरण करते हैं। (ख) पादप द्वारा प्रमुख पारितंत्र का पिरैमिड (सं- का) (………………) प्रकार का है। (ग) एक जलीय पारितंत्र में, उत्पादकता का सीमा कारक ……………… है। (घ) हमारे पारितंत्र में सामान्य अपरदन ……………… हैं। (च) पृथ्वी पर कार्बन का प्रमुख भंडार ……………… है।

(क) पादपों को उत्पादक कहते हैं; क्योंकि वे कार्बन डाईऑक्साइड का स्थिरीकरण करते हैं। (ख) पादप द्वारा प्रमुख पारितंत्र का पिरैमिड (संख्या का) पिरामिड प्रकार का होता है। (ग) एक जलीय पारितंत्र में, उत्पादकता का सीमा कारक प्रकाश है। (घ) हमारे पारितंत्र में सामान्य अपरदक जीवाणु और कवक होते हैं। (च) पृथ्वी पर कार्बन का प्रमुख भंडार समुद्र और जीवाश्म ईंधन हैं।

एक खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में सर्वाधिक संख्या किसकी होती है- (क) उत्पादक (ख) प्राथमिक उपभोक्ता (ग) द्वितीयक उपभोक्ता (घ) अपघटक

सर्वाधिक संख्या उत्पादकों की होती है क्योंकि वे खाद्य श्रृंखला के आधार होते हैं और ऊर्जा का उत्पादन करते हैं। उत्पादकों की संख्या अधिक होती है ताकि उपभोक्ताओं को पर्याप्त ऊर्जा मिल सके।

एक झील में द्वितीय (दूसरी) पोषण स्तर होता है- (क) पादपप्लवक (ख) प्राणिप्लवक (ग) नितलक (बैनथॉस) (घ) मछलियाँ

द्वितीय पोषण स्तर प्राणिप्लवक होता है क्योंकि वे प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं जो उत्पादकों (पादपप्लवक) को खाते हैं।

द्वितीयक उत्पादक हैं- (क) शाकाहारी (शाकभक्षी) (ख) उत्पादक (ग) मांसाहारी (मांसभक्षी) (घ) उपरोक्त कोई भी नहीं

द्वितीयक उत्पादक नहीं होते। उत्पादक वे जीव होते हैं जो स्वयं प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। शाकाहारी और मांसाहारी उपभोक्ता होते हैं। इसलिए सही उत्तर है (घ) उपरोक्त कोई भी नहीं।

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