जैव-विविधता एवं संरक्षण | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

जैव-विविधता एवं संरक्षण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जैव-विविधता एवं संरक्षण from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
13.1.2 जैव विविधता के प्रतिरूप (पैटर्न)
जैव विविधता पृथ्वी पर समान रूप से वितरित नहीं होती है, बल्कि इसका वितरण अक्षांशीय प्रवणता और जातीय क्षेत्र संबंध के आधार पर होता है। अक्षांशीय प्रवणता के अनुसार, भूमध्य रेखा के निकट उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में जैव विविधता अधिक होती है और ध्रुवों की ओर जातीय समृद्धि घटती जाती है। उदाहरण के लिए, कोलम्बिया में 1400 पक्षी जातियाँ हैं, जबकि ग्रीनलैंड में केवल 56। इसके पीछे तीन मुख्य परिकल्पनाएँ हैं: (क) उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में जाति उद्भवन के लिए अधिक समय मिला है क्योंकि यहाँ हिमनदन नहीं हुए; (ख) उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में पर्यावरण अधिक स्थिर है जिससे जातियों का विशिष्टीकरण हुआ; (ग) यहाँ अधिक सौर ऊर्जा उपलब्ध है जिससे उत्पादन अधिक होता है और जैव विविधता बढ़ती है। जातीय क्षेत्र संबंध के अनुसार, किसी क्षेत्र की जातीय समृद्धि क्षेत्रफल के साथ बढ़ती है। यह संबंध एक आयताकार अतिपरवलय (रेक्टेंगुलर हाइपरबोल) के रूप में होता है, जिसका समीकरण है: लॉग S = लॉग C + Z × लॉग A, जहाँ S = जातीय समृद्धि, A = क्षेत्रफल, Z = ढाल, C = इंटरसेप्ट। बड़े क्षेत्र के लिए Z का मान अधिक होता है।
📊 Diagram: चित्र 13.2 जातीय और संबंध का प्रदर्शन: लॉग पैमाने पर संबंध रेखीय हो जाते हैं।
🧪 Activity: इस खंड में कोई विशेष गतिविधि नहीं दी गई है।
🔗 Connection: यह खंड जातीय विविधता के पारितंत्र में महत्व की चर्चा के लिए आधार प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. जैव-विविधता के तीन आवश्यक घटकों (कंपोनेंट) के नाम बताइए?
जैव-विविधता के तीन आवश्यक घटक हैं: 1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): किसी जाति के भीतर आनुवंशिक भिन्नता। 2. जातीय विविधता (Species Diversity): किसी क्षेत्र में पाए जाने वाली विभिन्न जातियाँ। 3. पारितंत्र विविधता (Ecosystem Diversity): विभिन्न पारितंत्रों का विविध रूप।
2. पारिस्थितिकीविद् किस प्रकार विश्व की कुल जातियों का आंकलन करते हैं?
पारिस्थितिकीविद् विश्व की कुल जातियों का आंकलन अनुमानित विधि से करते हैं। वे ज्ञात क्षेत्रों में जाति संख्या का अध्ययन करते हैं और फिर इसे विश्व के अन्य क्षेत्रों पर लागू कर अनुमान लगाते हैं। इसके लिए वे जाति-क्षेत्र संबंध (Species-Area Relationship) का उपयोग करते हैं, जिसमें क्षेत्रफल के बढ़ने पर जाति संख्या में वृद्धि का गणितीय संबंध होता है।
3. उष्ण कटिबंध क्षेत्रों में सबसे अधिक स्तर की जाति-समृद्धि क्यों मिलती हैं? इसकी तीन परिकल्पनाएँ दीजिए?
उष्ण कटिबंध क्षेत्रों में अधिक जाति-समृद्धि के कारण: 1. स्थिर जलवायु: उष्ण कटिबंध में जलवायु स्थिर और अनुकूल होती है, जिससे जीवों के लिए अनुकूल आवास बनता है। 2. अधिक ऊर्जा उपलब्धता: सूर्य की ऊर्जा अधिक मात्रा में मिलती है, जिससे पौधों और जीवों की वृद्धि होती है। 3. विकास की लंबी अवधि: उष्ण कटिबंध में विकास की अवधि अधिक होती है, जिससे अधिक जातियाँ विकसित हो पाती हैं।
तीन परिकल्पनाएँ: (i) जलवायु स्थिरता परिकल्पना: स्थिर जलवायु अधिक विविधता को बढ़ावा देती है। (ii) ऊर्जा परिकल्पना: अधिक ऊर्जा उपलब्
4. जातीय - क्षेत्र संबंध में समाश्रयण (रिग्रेशन) की ढलान का क्या महत्व हैं?
जातीय-क्षेत्र संबंध में समाश्रयण की ढलान यह दर्शाती है कि क्षेत्रफल के बढ़ने पर जाति संख्या किस दर से बढ़ती है। इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यह हमें यह समझने में मदद करती है कि बड़े क्षेत्र में कितनी नई जातियाँ मिल सकती हैं। ढलान अधिक होने पर क्षेत्रफल में वृद्धि के साथ जाति संख्या में तीव्र वृद्धि होती है।
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