जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
10.4 नैतिक प्रश्न
जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग से जुड़े नैतिक मुद्दे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जीवों के आनुवंशिक रूपांतरण से अप्रत्याशित परिणाम पारिस्थितिक तंत्र में हो सकते हैं। इसलिए भारत सरकार ने जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रवल कमेटी (GEAC) जैसी संस्थाएँ स्थापित की हैं जो जीएम अनुसंधान की वैधानिकता, सुरक्षा और जनसेवा के लिए निर्णय लेती हैं।
एक बड़ा विवाद जैव संसाधनों और परंपरागत ज्ञान का बिना अनुमति के उपयोग कर पेटेंट (एक्स्व) प्राप्त करने को लेकर है। उदाहरण के लिए, बासमती धान पर अमेरिका की एक कंपनी ने पेटेंट अधिकार प्राप्त कर लिया था, जबकि यह किस्म भारतीय किसानों द्वारा विकसित की गई थी।
इस प्रकार की गतिविधियों को बायोपाइरेसी कहा जाता है। विकसित देशों के पास आर्थिक संसाधन हैं लेकिन जैव विविधता कम है, जबकि विकासशील देशों के पास जैव विविधता और परंपरागत ज्ञान अधिक है। इस असंतुलन के कारण अन्याय और लाभ वितरण में असमानता उत्पन्न होती है।
भारतीय संसद ने भारतीय पेटेंट बिल में संशोधन कर ऐसे मुद्दों को नियंत्रित करने के लिए प्रावधान किए हैं। जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नैतिकता, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है।
🧪 Activity: जैव प्रौद्योगिकी के नैतिक पहलुओं पर चर्चा।
🔗 Connection: अध्याय के सारांश और अभ्यास प्रश्नों की ओर।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विषाणु मुक्त पादप तैयार करने के लिए पादप का कौन सा भाग सबसे अधिक उपयुक्त है तथा क्यों?
विषाणु मुक्त पादप तैयार करने के लिए पादप का सबसे अधिक उपयुक्त भाग 'मेरिस्टेमेटिक टिशू' होता है। मेरिस्टेमेटिक टिशू पादप के विकासशील भाग होते हैं जो तेजी से विभाजित होते हैं और इनमें विषाणु कम या नहीं होते। इसलिए इन्हें सूक्ष्मप्रवर्धन (micropropagation) में प्रयोग किया जाता है ताकि विषाणु मुक्त पादप प्राप्त हो सकें।
2. सूक्ष्मप्रवर्धन द्वारा पादपों के उत्पादन के मुख्य लाभ क्या हैं?
सूक्ष्मप्रवर्धन के मुख्य लाभ हैं: 1. विषाणु मुक्त पादपों का उत्पादन। 2. कम समय में बड़ी संख्या में समान पादपों का उत्पादन। 3. दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण। 4. मौसम और स्थान की सीमाओं से स्वतंत्र उत्पादन। 5. उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का उत्पादन।
3. पत्ती में कर्तृतिक पादप के प्रवर्धन में जिस माध्यम का प्रयोग किया गया है, उसमें विभिन्न घटकों का पता लगाओ।
पत्ती में कर्तृतिक पादप के प्रवर्धन के लिए प्रयोग किए गए माध्यम में निम्नलिखित घटक होते हैं:
- कार्बन स्रोत के रूप में शुगर (जैसे सुक्रोज)
- मिनरल्स (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम)
- विटामिन्स
- पादप हार्मोन्स (ऑक्सिन और साइटोकिनिन)
- जल
- ठोस माध्यम के लिए एजेंट (जैसे अगर)
ये घटक पादप के विकास और विभाजन के लिए आवश्यक पोषण और संकेत प्रदान करते हैं।
4. बीटी (Bt) आविष्क के रवे कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाए जाते हैं लेकिन जीवाणु स्वयं को नहीं मारते हैं; क्योंकि— (क) जीवाणु आविष्क के प्रति प्रतिरोधी है। (ख) आविष्क अपरिपक्व है। (ग) आविष्क निष्क्रिय होता है। (घ) आविष्क जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है।
सही उत्तर: (घ) आविष्क जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है।
विवरण: बीटी (Bacillus thuringiensis) जीवाणु अपने शरीर में विशेष थैली (क्रिस्टल थैली) में टॉक्सिन (आविष्क) बनाते हैं जो कीटों के लिए विषैला होता है। जीवाणु स्वयं को इस टॉक्सिन से नहीं मारते क्योंकि यह टॉक्सिन थैली के अंदर सुरक्षित रहता है और तब तक निष्क्रिय रहता है जब तक कीट के शरीर में प्रवेश न करे।
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