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Chapter 10

🎓 Class 12📖 Jeev Vigyan📖 6 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~9 मिनट
Chapter 9अध्याय 10 / 13Chapter 11

Chapter 10अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

व्याख्या

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

जैव प्रौद्योगिकी वह विज्ञान एवं तकनीक है जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौधों, जंतुओं और उनके उपापचयों का उपयोग कर औद्योगिक, कृषि, चिकित्सा एवं पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु उपयोगी उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इस क्षेत्र में आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीवों का उत्पादन, जैव भैषजिक पदार्थों का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन, निदानसूचक, कृषि में आनुवंशिकत: रूपांतरित फसलें, संसाधित खाद्य, जैव सुधार, अपशिष्ट प्रतिपादन एवं ऊर्जा उत्पादन शामिल हैं। जैव प्रौद्योगिकी के तीन मुख्य अनुसंधान क्षेत्र हैं: (क) उन्नत जीवों जैसे सूक्ष्मजीवों या शुद्ध एंजाइम के रूप में सर्वोत्तम उत्प्रेरक का निर्माण, (ख) उत्प्रेरक के कार्य हेतु अभियांत्रिकी द्वारा सर्वोत्तम परिस्थितियों का निर्माण, तथा (ग) अनुप्रवाह प्रक्रमण तकनीक का प्रोटीन/कार्बनिक यौगिक के शुद्धीकरण में उपयोग। यह अध्याय जैव प्रौद्योगिकी के कृषि, चिकित्सा, पारजीवी जंतु और नैतिक प्रश्नों में उपयोग का विस्तृत अध्ययन करता है।

  • जैव प्रौद्योगिकी में सूक्ष्मजीवों, पौधों, जंतुओं का उपयोग होता है।
  • औद्योगिक, कृषि, चिकित्सा एवं पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु उपयोगी उत्पाद बनाये जाते हैं।
  • तीन अनुसंधान क्षेत्र: उन्नत उत्प्रेरक निर्माण, अभियांत्रिकी द्वारा परिस्थितियों का निर्माण, अनुप्रवाह प्रक्रमण।
  • जैव प्रौद्योगिकी से जीवन स्तर में सुधार होता है।
  • 📌 जैव प्रौद्योगिकी: जीवों और उनके उत्पादों का उपयोग कर तकनीकी विकास।
  • 📌 उत्प्रेरक (Enzyme): जैव रासायनिक अभिक्रियाओं को तेज करने वाला पदार्थ।

10.1 कृषि में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग

व्याख्या

10.1 कृषि में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग

खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन मुख्य कृषि पद्धतियाँ हैं: (क) कृषि रसायन आधारित कृषि, (ख) कार्बनिक कृषि, और (ग) आनुवंशिकत: निर्मित फसल आधारित कृषि। हरित क्रांति के बावजूद बढ़ती जनसंख्या की मांग पूरी करना चुनौतीपूर्ण है। उत्पादन में वृद्धि मुख्यतः उन्नत किस्मों, बेहतर प्रबंधकीय व्यवस्था और कृषि रसायनों के प्रयोग से हुई है। परंतु कृषि रसायन महंगे और पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। ऊतक संवर्धन तकनीक ने इस समस्या का समाधान प्रस्तुत किया है। 1950 के दशक में यह ज्ञात हुआ कि पादप के किसी भी भाग से पूर्ण पादप विकसित किया जा सकता है, जिसे पूर्णशक्तता कहते हैं। इस प्रक्रिया में कोशिका को रोगाणुरहित पोषक माध्यम में उगाया जाता है जिसमें कार्बन स्रोत (जैसे स्युक्रोज), अकार्बनिक लवण, विटामिन, अमीनो अम्ल और वृद्धि नियंत्रक (ऑक्सिन, सायटोकाइनिन) होते हैं। सूक्ष्मप्रवर्धन द्वारा अल्प समय में हजारों समान आनुवंशिक पादप (सोमाक्लोन) उत्पन्न किए जाते हैं। यह विधि रोगग्रस्त पादपों से स्वस्थ पादप प्राप्त करने में भी सहायक है। विभज्योतक (मेरेस्टेम) विषाणु मुक्त रहता है, इसलिए इसे विट्रो में उगाकर विषाणु मुक्त पौधे तैयार किए जाते हैं। प्रोटोप्लास्ट संकरण विधि में दो विभिन्न किस्मों के प्रोटोप्लास्ट को युग्मित कर संकर पादप प्राप्त किए जाते हैं, जैसे टमाटर और आलू के प्रोटोप्लास्ट से 'पोमेटो'। हालांकि व्यावसायिक उपयोग के लिए यह विधि अभी सीमित है। आनुवंशिक रूपांतरण द्वारा फसलों में ठंडा, सूखा, लवण, ताप जैसे अजैव प्रतिबलों के प्रति सहिष्णुता, कीटनाशक प्रतिरोधकता, पोषण स्तर में वृद्धि जैसे गुण विकसित किए जाते हैं। जीएम फसलों में बीटी कपास, मक्का, धान, टमाटर, आलू आदि शामिल हैं जो कीटों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

  • खाद्य उत्पादन के लिए तीन कृषि पद्धतियाँ: रसायन आधारित, कार्बनिक, आनुवंशिकत: निर्मित।
  • ऊतक संवर्धन से रोगमुक्त और समान आनुवंशिक पादपों का उत्पादन।
  • प्रोटोप्लास्ट संकरण से संकर पादप बनाना संभव।
  • जीएम फसलों में कीट प्रतिरोधकता, पर्यावरण संरक्षण में मदद।
  • बीटी जीवाणु से प्राप्त जीवविष कीटों को मारता है।
  • 📌 पूर्णशक्तता: कोशिका की वह क्षमता जिससे वह पूर्ण जीव विकसित कर सकती है।
  • 📌 सूक्ष्मप्रवर्धन: ऊतक संवर्धन द्वारा बड़ी संख्या में पौधों का उत्पादन।
  • 📌 प्रोटोप्लास्ट: कोशिका भित्ति हटाकर प्राप्त नग्न कोशिका।

10.2 चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग

व्याख्या

10.2 चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग

चिकित्सा क्षेत्र में पुनर्योगज डीएनए प्रौद्योगिकी ने सुरक्षित, प्रभावी और अधिक मात्रा में चिकित्सीय औषधियों के उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। पुनर्योगज औषधियाँ अमानवीय स्रोतों से प्राप्त औषधियों की तुलना में अधिक उपयुक्त होती हैं क्योंकि इनमे

अभ्यास प्रश्नChapter 10

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. विषाणु मुक्त पादप तैयार करने के लिए पादप का कौन सा भाग सबसे अधिक उपयुक्त है तथा क्यों?

उत्तर:

विषाणु मुक्त पादप तैयार करने के लिए पादप का सबसे अधिक उपयुक्त भाग 'मेरिस्टेमेटिक टिशू' होता है। मेरिस्टेमेटिक टिशू पादप के विकासशील भाग होते हैं जो तेजी से विभाजित होते हैं और इनमें विषाणु कम या नहीं होते। इसलिए इन्हें सूक्ष्मप्रवर्धन (micropropagation) में प्रयोग किया जाता है ताकि विषाणु मुक्त पादप प्राप्त हो सकें।

व्याख्या:

मेरिस्टेमेटिक टिशू में कोशिकाएँ तेजी से विभाजित होती हैं और ये आमतौर पर विषाणु मुक्त होती हैं। इसलिए विषाणु मुक्त पादप प्राप्त करने के लिए इन्हें चुना जाता है।

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Q2.2. सूक्ष्मप्रवर्धन द्वारा पादपों के उत्पादन के मुख्य लाभ क्या हैं?

उत्तर:

सूक्ष्मप्रवर्धन के मुख्य लाभ हैं: 1. विषाणु मुक्त पादपों का उत्पादन। 2. कम समय में बड़ी संख्या में समान पादपों का उत्पादन। 3. दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण। 4. मौसम और स्थान की सीमाओं से स्वतंत्र उत्पादन। 5. उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का उत्पादन।

व्याख्या:

सूक्ष्मप्रवर्धन तकनीक से पौधों को नियंत्रित वातावरण में तेजी से और विषाणु मुक्त रूप से बढ़ाया जा सकता है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती है।

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Q3.3. पत्ती में कर्तृतिक पादप के प्रवर्धन में जिस माध्यम का प्रयोग किया गया है, उसमें विभिन्न घटकों का पता लगाओ।

उत्तर:

पत्ती में कर्तृतिक पादप के प्रवर्धन के लिए प्रयोग किए गए माध्यम में निम्नलिखित घटक होते हैं: - कार्बन स्रोत के रूप में शुगर (जैसे सुक्रोज) - मिनरल्स (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम) - विटामिन्स - पादप हार्मोन्स (ऑक्सिन और साइटोकिनिन) - जल - ठोस माध्यम के लिए एजेंट (जैसे अगर) ये घटक पादप के विकास और विभाजन के लिए आवश्यक पोषण और संकेत प्रदान करते हैं।

व्याख्या:

प्रवर्धन माध्यम पौधों के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व, हार्मोन और ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है, जिससे पत्ती से नए पादप विकसित होते हैं।

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Q4.4. बीटी (Bt) आविष्क के रवे कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाए जाते हैं लेकिन जीवाणु स्वयं को नहीं मारते हैं; क्योंकि— (क) जीवाणु आविष्क के प्रति प्रतिरोधी है। (ख) आविष्क अपरिपक्व है। (ग) आविष्क निष्क्रिय होता है। (घ) आविष्क जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है।
A.A) जीवाणु आविष्क के प्रति प्रतिरोधी है।
B.B) आविष्क अपरिपक्व है।
C.C) आविष्क निष्क्रिय होता है।
D.D) आविष्क जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है।

उत्तर:

सही उत्तर: (घ) आविष्क जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है। विवरण: बीटी (Bacillus thuringiensis) जीवाणु अपने शरीर में विशेष थैली (क्रिस्टल थैली) में टॉक्सिन (आविष्क) बनाते हैं जो कीटों के लिए विषैला होता है। जीवाणु स्वयं को इस टॉक्सिन से नहीं मारते क्योंकि यह टॉक्सिन थैली के अंदर सुरक्षित रहता है और तब तक निष्क्रिय रहता है जब तक कीट के शरीर में प्रवेश न करे।

व्याख्या:

बीटी टॉक्सिन जीवाणु की विशेष थैली में सुरक्षित रहता है, इसलिए जीवाणु स्वयं को नुकसान नहीं पहुंचाते।

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Q5.5. पारजीवी जीवाणु क्या है? किसी एक उदाहरण द्वारा सचित्र वर्णन करो।

उत्तर:

पारजीवी जीवाणु वे जीवाणु होते हैं जो किसी अन्य जीव के शरीर में रहकर उससे पोषण प्राप्त करते हैं और उसे हानि पहुँचाते हैं। उदाहरण के लिए, Agrobacterium tumefaciens एक पारजीवी जीवाणु है जो पौधों में ट्यूमर (कर्करोग) उत्पन्न करता है। यह जीवाणु पौधों की कोशिकाओं में अपना डीएनए (T-DNA) प्रविष्ट कर देता है, जिससे पौधे की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होकर गांठ (गैल) बनाती हैं।

व्याख्या:

Agrobacterium tumefaciens पौधों में ट्यूमर उत्पन्न करता है, जो पारजीवी जीवाणु का उदाहरण है।

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Q6.6. आनुवंशिक रूपांतरित फसलों के उत्पादन के लाभ व हानि का तुलनात्मक विभेद किजिए।

उत्तर:

लाभ: 1. कीटों और रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 2. फसल की पैदावार में वृद्धि होती है। 3. पोषण मूल्य में सुधार होता है (जैसे गोल्डन राइस में विटामिन A)। 4. पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है क्योंकि कीटनाशकों का उपयोग कम होता है। हानि: 1. आनुवंशिक रूपांतरित फसलों से पर्यावरण में जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 2. कुछ फसलों में एलर्जी या विषाक्तता का खतरा हो सकता है। 3. पारंपरिक किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है क्योंकि बीज महंगे होते हैं। 4. कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है।

व्याख्या:

जीएम फसलों के लाभ और हानि दोनों होते हैं, इसलिए इनके उपयोग में सावधानी आवश्यक है।

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Q7.7. क्राई प्रोटीस क्या है? उस जीव का नाम बताओ जो इसे पैदा करता है। मनुष्य इस प्रोटीन को अपने फायदे के लिए कैसे उपयोग में लाता है।

उत्तर:

क्राई प्रोटीस (Cry proteins) बीटी (Bacillus thuringiensis) नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न विषैले प्रोटीन होते हैं। ये प्रोटीन कीटों के लिए विषैले होते हैं और कीटों के पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। मनुष्य इन प्रोटीनों का उपयोग कीटनाशकों के रूप में करता है, जिससे फसलों को कीटों से बचाया जाता है। इससे रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम होता है और पर्यावरण सुरक्षित रहता है।

व्याख्या:

Cry प्रोटीन कीटों के लिए विषैले होते हैं और इन्हें जैविक कीटनाशक के रूप में उपयोग किया जाता है।

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Q8.8. जीन चिकित्सा क्या है? एडीनोसीन डिएमीनेज (ए डी ए) की कमी का उदाहरण देते हुए इसका सचित्र वर्णन करें।

उत्तर:

जीन चिकित्सा (Gene therapy) एक ऐसी तकनीक है जिसमें किसी व्यक्ति के दोषपूर्ण जीन को ठीक करने या बदलने के लिए स्वस्थ जीन को शरीर में डाला जाता है ताकि रोग का उपचार किया जा सके। एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी एक आनुवंशिक रोग है जिसमें रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। जीन चिकित्सा में स्वस्थ ADA जीन को रोगी के कोशिकाओं में डालकर इस कमी को पूरा किया जाता है। इससे रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली पुनः सक्रिय हो जाती है। सचित्र वर्णन में, एक वेक्टर (जैसे एडेनोवायरस) के माध्यम से स्वस्थ जीन को रोगी की कोशिका में प्रवेश कराया जाता है, जो दोषपूर्ण जीन की जगह लेता है।

व्याख्या:

जीन चिकित्सा में दोषपूर्ण जीन को स्वस्थ जीन से बदलकर रोग का उपचार किया जाता है। ADA की कमी इसका एक उदाहरण है।

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