Biologyकक्षा 12जैव प्रौद्योगिकी- सिद्धांत व प्रक्रमहिंदी

जैव प्रौद्योगिकी- सिद्धांत व प्रक्रम | Class 12 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

जैव प्रौद्योगिकी- सिद्धांत व प्रक्रम | Class 12 Biology Notes

जैव प्रौद्योगिकी- सिद्धांत व प्रक्रम – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जैव प्रौद्योगिकी- सिद्धांत व प्रक्रम from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

क्लोनिंग संवाहक (Vectors)

क्लोनिंग संवाहक वे वाहक अणु होते हैं जिनका उपयोग पुनर्योगज डीएनए को होस्ट जीव में प्रवेश कराने के लिए किया जाता है। सबसे सामान्य क्लोनिंग संवाहक प्लाज्मिड होते हैं, जो बैक्टीरिया में पाए जाने वाले छोटे, वृत्ताकार डीएनए अणु होते हैं। प्लाज्मिड में प्रतिबंधन स्थल, प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन, और प्रतिकृति की शुरुआत स्थल (ori) होते हैं। ये संवाहक जीनों को होस्ट जीव में स्थायी रूप से प्रवेश कराते हैं और उनकी प्रतिकृति सुनिश्चित करते हैं। उदाहरण के लिए, pBR322 एक प्रसिद्ध प्लाज्मिड क्लोनिंग संवाहक है जिसमें कई प्रतिबंधन स्थल और प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन होते हैं। क्लोनिंग संवाहक की सहायता से पुनर्योगज डीएनए को होस्ट जीव में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया जाता है और आवश्यक प्रोटीन का उत्पादन किया जाता है।

📊 Diagram: See figure_5: चित्र 9.4 इ. कोलाई क्लोनिंग संवाहक pBR322 में प्रतिबंधन स्थल (Hind III, EcoR I, BamH I, Sal I, Pvu II, Pst I, Cla I), ori व प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन (ampᵃ व tetᵃ) rop प्लाज्मिड के प्रतिकृति में भाग ले

🧪 Activity: क्लोनिंग संवाहक के विभिन्न हिस्सों की पहचान और उनके कार्यों का अध्ययन।

🔗 Connection: यह खंड डीएनए के पृथक्करण की प्रक्रिया की ओर बढ़ता है जो पुनर्योगज डीएनए तकनीक का प्रारंभिक चरण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1- D;k vki nl iqu;ksZxt izksVhu osQ ckjs esa crk ldrs gSa tks fpfdRlh; O;ogkj osQ dke esa yk, tkrs gSa\ irk yxkb;s fd os fpfdRlh; vkS"kf/ osQ :i esa dgk¡ iz;ksx fd, tkrs gSaA (baVjusV dh lgk;rk ysa)A 2- ,d lfp=k (pkVZ) (vkjsf[kr fu:i.k osQ lkFk) cukb, tks izfrca/u ,atkbe dks] (ftl fozQ;k/kj Mh,u, ij ;g dk;Z djrk gS mls)] mu LFkyksa dks tgk¡ ;g Mh,u, dks dkVrk gS o buls mRiUu mRikn dks n'kkZrk gSA 3- d{kk X;kjgoha esa tks vki i<+ pqosQ gSa mlosQ vk/kj ij D;k vki crk ldrs gSa fd vk.kfod vkdkj osQ vk/kj ij ,atkbe cM+s gSa ;k Mh,u,A vki blosQ ckjs esa oSQls irk yxk;saxs\ 4- ekuo dh ,d dksf'kdk esa Mh,u, dh eksyj lkanzrk D;k gksxh\ vius vè;kid ls ijke'kZ yhft,A 5- D;k lqosaQnzdh dksf'kdkvksa esa izfrca/u ,aMksU;wfDy,t feyrs gSa\ vius mÙkj lgh fl¼ dhft,A 6- vPNh gok o feJ.k fo'ks"krk osQ vfrfjDr dh rqyuk esa dkSu lh vU; daiUu ÝykLd lqfo/k,¡ gSa\ 7- f'k{kd ls ijke'kZ dj ik¡p iSfyaMªksfed vuqiz;kl djuk gksxk fd {kkjd&;qXe fu;eksa dk ikyu djrs gq, iSfyaMªksfed vuqozQe cukus osQ mnkgj.k dk irk yxkb,A 8- v/Zlw=kh foHkktu dks è;ku esa j[krs gq, D;k crk ldrs gSa fd iqu;ksZxt Mh,u, fdl voLFkk esa curs gSa\ 9- D;k vki crk ldrs gSa fd izfrosnd (fjiksVZj) ,atkbe dks oj.k;ksX; fpÉu dh mifLFkfr esa ckgjh Mh,u, dks ijiks"kh dksf'kdkvksa esa LFkkukarj.k osQ fy, ekWfuVj djus osQ fy, fdl izdkj mi;ksx esa yk;k tk ldrk S\ 10- fuEufyf[krksa dk laf{kIr o.kZu dhft,& (d) izfrd`rh;u dk mn~Hko ([k) ck;kfsj,DVj (x) vuqizokg lalk/u 11- la{ksi esa crkb, (d) ihlhvkj ([k) izfrca/u ,atkbe vkSj Mh,u, (x) dkbfVust 12- vius vè;kid ls ppkZ djosQ irk yxkb, fd fuEufyf[kr osQ chp oSQls Hksn djsaxs& (d) IykfTeM Mh,u, vkSj xq.klw=kh; Mh,u, ([k) vkj,u, vkSj Mh,u, (x) ,DlksU;wfDy,t vkSj ,aMksU;wfDy,t

1- iqu;ksZxt izksVhu osQ fpfdRlh; O;ogkj osQ dke mein hota hai, jo ki fpfdRlh; vkS"kf/ osQ :i mein dgk¡ iz;ksx deta hai. Iska udaharan baVjusV hai. 2- Ek lfp=k (pkVZ) yaani ki vkjsf[kr fu:i.k ya lkFk, jo izfrca/u ,atkbe (fozQ;k/kj Mh,u) mein hota hai, usse mlosQ feJ.k ko dkVrk kar mRiUu mRikn n'kkZrk karte hain. 3- d{kk X;kjgoha mein jo vyakti i<+ paata hai, wo vk/kj par atak jata hai ya Mh,u ban jata hai. Isse pata chalta hai ki vk.kfod vkdkj ya vk/kj par ,atkbe cM+s hote hain. 4- Ekuo ke dksf'

जैव प्रौद्योगिकी के विकास के साथ किन मुख्य नैतिक और सामाजिक पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है?

जैव प्रौद्योगिकी के विकास के साथ आनुवंशिक संशोधन से उत्पन्न उत्पादों की सुरक्षा, पर्यावरण पर प्रभाव, जैव विविधता की रक्षा, स्वास्थ्य प्रभाव, सामाजिक न्याय, स्वामित्व अधिकार, और जनसामान्य की सहमति जैसे नैतिक और सामाजिक पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है।

जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग में सामाजिक न्याय का क्या महत्व है?

सामाजिक न्याय यह सुनिश्चित करता है कि जैव प्रौद्योगिकी के लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचें और किसी विशेष समूह के साथ भेदभाव न हो। उदाहरण के लिए, आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों का लाभ केवल बड़े किसानों तक सीमित न रहकर छोटे किसानों तक भी पहुंचे।

जैव प्रौद्योगिकी से उत्पन्न फसलों के स्वास्थ्य पर प्रभावों का अध्ययन क्यों आवश्यक है?

जैव प्रौद्योगिकी से उत्पन्न फसलों के स्वास्थ्य पर प्रभावों का अध्ययन इसलिए आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये फसलें मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हैं और इनके सेवन से किसी प्रकार की हानि न हो। उदाहरण के लिए, जीन संशोधित फसलों में एलर्जी या विषाक्तता की संभावना की जांच।

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