मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
प्रस्तावना
इस अध्याय में हम सूक्ष्मजीवों की मानव कल्याण में भूमिका का अध्ययन करेंगे। सूक्ष्मजीव पृथ्वी पर जीवन के सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं। ये मृदा, जल, वायु, मानव शरीर और अन्य जीवों में सर्वत्र पाए जाते हैं। सूक्ष्मजीवों में जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, सूक्ष्मदर्शीय पादप और प्राणी शामिल हैं। विषाणु, विरायड और प्रायोग भी सूक्ष्मजीवों के अंतर्गत आते हैं, जो प्रोटीनयुक्त संक्रमित कारक हैं। सूक्ष्मजीव अत्यंत विविध हैं और वे पृथ्वी के लगभग हर वातावरण में पाए जाते हैं, यहाँ तक कि अत्यधिक तापमान, अम्लीय या कठोर परिस्थितियों में भी। कक्षा 11 में आपने जीवों की विविधता के बारे में पढ़ा होगा, जिसमें सूक्ष्मजीवों को अलग-अलग जगतों में वर्गीकृत किया गया था। सूक्ष्मजीवों को पोषक माध्यमों पर उगाकर उनकी वृद्धि को कालोनी के रूप में देखा जा सकता है, जिससे उनका अध्ययन सरल होता है। इस अध्याय में हम जानेंगे कि सूक्ष्मजीव केवल रोगजनक नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए अनेक लाभकारी कार्य भी करते हैं।
📊 Diagram: (अ) जीवाणु (बैक्टीरिया) दंडाकार (आवर्धित 1500 x), (ब) गोलाकार जीवाणु (आवर्धित 1500 x), (स) कशाभिका प्रदर्शित करते हुए दंडाकार जीवाणु (आवर्धित 50,000 x); (अ) जीवाणुभोजी विषाणु, (ब) ऐडीनोवायरस, (स) टोबैको मोजेक वायरस (टीएमवी) (आवर्धित 100,000-1,500,000 तक); (अ) पैट्री प्लेट में जीवाणुओं की कालोनियाँ, (ब) पैट्री प्लेट में कवकीय कालोनियाँ।
🧪 Activity: सूक्ष्मजीवों को पोषक माध्यमों पर उगाकर उनकी कालोनियों का अवलोकन।
🔗 Connection: यह परिचय अध्याय के आगे के खंडों में सूक्ष्मजीवों के मानव कल्याण में योगदान को समझने के लिए आधार तैयार करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता, परंतु सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो, तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जायेंगे और क्यों?
यदि सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति प्रदर्शित करनी हो तो ऐसा नमूना ले जाना चाहिए जिसमें सूक्ष्मजीवों की संख्या अधिक हो और जो आसानी से खराब न हो। उदाहरण के लिए, दही, छाछ, या किण्वित खाद्य पदार्थ जैसे अचार, या मिट्टी का नमूना ले सकते हैं क्योंकि इनमें जीवाणु और अन्य सूक्ष्मजीव प्रचुर मात्रा में होते हैं। पानी के नमूने में भी सूक्ष्मजीव हो सकते हैं, परंतु वे कम संख्या में हो सकते हैं। इसलिए दही या किण्वित पदार्थ बेहतर विकल्प हैं।
2. उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध करें।
उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं, जैसे कि किण्वन क्रिया में जीवाणु और कवक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और कभी-कभी मीथेन (CH4) गैस का उत्सर्जन करते हैं। उदाहरण के लिए, दही में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ग्लूकोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते समय CO2 गैस उत्पन्न करते हैं। इसी प्रकार, गोबर के ढेर में मीथेन गैस का उत्पादन मेथेनोजेनिक आर्किया द्वारा होता है। इस प्रकार सूक्ष्मजीव उपापचय के दौरान गैसों का निष्कासन करते हैं।
3. किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन करें।
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दही, छाछ, पनीर, अचार, खमीरयुक्त रोटी आदि खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। ये बैक्टीरिया दूध में पाए जाने वाले लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते हैं जिससे दही बनता है। इनके लाभप्रद उपयोगों में शामिल हैं:
- पाचन में सहायता करना और आंतों के लिए लाभकारी बैक्टीरिया प्रदान करना।
- खाद्य पदार्थों को संरक्षित करना क्योंकि लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया खाद्य पदार्थों में अम्लीय वातावरण बनाकर हानिकारक जीवाणुओं को रोकते हैं।
- कुछ लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया प्रोबायोटिक्स के रूप में
4. कुछ पारंपरिक भारतीय आहार जो गेहूँ, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताएँ।
पारंपरिक भारतीय आहार जिनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग होता है, वे हैं:
- इडली (चावल और उड़द की दाल से बनी)
- ढोकला (चना या बेसन से बना)
- दही (दूध का किण्वित रूप)
- छाछ
- खमीरयुक्त रोटी
- अचार (किण्वित)
इन खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीव जैसे लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया और खमीर (यीस्ट) का उपयोग होता है जो किण्वन प्रक्रिया द्वारा स्वाद, पोषण और संरक्षा प्रदान करते हैं।
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