Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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प्रस्तावना
व्याख्याप्रस्तावना
इस अध्याय में हम सूक्ष्मजीवों की मानव कल्याण में भूमिका का अध्ययन करेंगे। सूक्ष्मजीव पृथ्वी पर जीवन के सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं। ये मृदा, जल, वायु, मानव शरीर और अन्य जीवों में सर्वत्र पाए जाते हैं। सूक्ष्मजीवों में जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, सूक्ष्मदर्शीय पादप और प्राणी शामिल हैं। विषाणु, विरायड और प्रायोग भी सूक्ष्मजीवों के अंतर्गत आते हैं, जो प्रोटीनयुक्त संक्रमित कारक हैं। सूक्ष्मजीव अत्यंत विविध हैं और वे पृथ्वी के लगभग हर वातावरण में पाए जाते हैं, यहाँ तक कि अत्यधिक तापमान, अम्लीय या कठोर परिस्थितियों में भी। कक्षा 11 में आपने जीवों की विविधता के बारे में पढ़ा होगा, जिसमें सूक्ष्मजीवों को अलग-अलग जगतों में वर्गीकृत किया गया था। सूक्ष्मजीवों को पोषक माध्यमों पर उगाकर उनकी वृद्धि को कालोनी के रूप में देखा जा सकता है, जिससे उनका अध्ययन सरल होता है। इस अध्याय में हम जानेंगे कि सूक्ष्मजीव केवल रोगजनक नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए अनेक लाभकारी कार्य भी करते हैं।
- सूक्ष्मजीव पृथ्वी पर जीवन के महत्वपूर्ण घटक हैं।
- ये मृदा, जल, वायु, मानव शरीर सहित विभिन्न स्थानों में पाए जाते हैं।
- सूक्ष्मजीवों में जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, विषाणु आदि शामिल हैं।
- सूक्ष्मजीवों को पोषक माध्यमों पर उगाकर अध्ययन किया जाता है।
- सभी सूक्ष्मजीव रोगजनक नहीं होते, कई लाभकारी होते हैं।
- 📌 सूक्ष्मजीव: ऐसे जीव जो नग्न नेत्र से नहीं देखे जा सकते।
- 📌 विषाणु: प्रोटीनयुक्त संक्रमित कारक जो सूक्ष्मजीवों के अंतर्गत आते हैं।
- 📌 कालोनी: सूक्ष्मजीवों की वृद्धि से बनने वाला समूह।
8.1 घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव
व्याख्या8.1 घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव
हम प्रतिदिन कई घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीवों का उपयोग करते हैं। दूध को दही में परिवर्तित करने में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया जैसे लैक्टोबैसिलस की भूमिका होती है। ये बैक्टीरिया दूध में वृद्धि करते हैं और लैक्टिक एसिड उत्पन्न करते हैं, जो दूध के प्रोटीन को स्कंदित कर दही बनाता है। दही में विटामिन बी12 की मात्रा भी बढ़ जाती है, जिससे पोषण गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके अलावा, लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया हमारे पेट में रोगों को रोकने में भी सहायक होते हैं। दाल-चावल से बने ढीले आटे का उपयोग डोसा और इडली बनाने में होता है, जिसमें सूक्ष्मजीवों द्वारा किण्वन की क्रिया होती है। किण्वन के दौरान CO₂ गैस उत्पन्न होती है, जिससे आटा फूला हुआ होता है। ब्रेड बनाने में भी यीस्ट (सैकरोमाइसीज सैरीविसी) का उपयोग होता है। पारंपरिक पेय जैसे टोडी, जो ताड़ वृक्ष के रस से बनती है, भी सूक्ष्मजीवों द्वारा किण्वित होती है। इसके अलावा, किण्वित मछली, सोयाबीन, बॉस प्ररोह आदि खाद्य पदार्थों में भी सूक्ष्मजीवों का उपयोग होता है। पनीर (चीज) बनाने में भी सूक्ष्मजीवों की भूमिका होती है, जो पनीर को विशेष बनावट, स्वाद और सुगंध प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, स्विस चीज में प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई नामक बैक्टीरिया CO₂ उत्पन्न करता है, जिससे उसमें छिद्र बनते हैं। रॉक्यूफोर्ट चीज विशेष कवक की वृद्धि से परिपक्व होता है, जिससे उसकी सुगंध आती है।
- दूध को दही में बदलने में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया की भूमिका।
- दही में विटामिन बी12 की मात्रा बढ़ती है।
- डोसा, इडली जैसे खाद्य पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा किण्वित आटे से बनते हैं।
- ब्रेड बनाने में यीस्ट का उपयोग होता है।
- पनीर में विशेष सूक्ष्मजीवों से स्वाद और बनावट आती है।
- 📌 लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया: ऐसे बैक्टीरिया जो लैक्टिक एसिड उत्पन्न करते हैं।
- 📌 किण्वन: सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों का रासायनिक परिवर्तन।
- 📌 यीस्ट: एक प्रकार का कवक जो किण्वन में सहायक होता है।
8.2 औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव
व्याख्या8.2 औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव
औद्योगिक स्तर पर सूक्ष्मजीवों का उपयोग अनेक मूल्यवान उत्पादों के उत्पादन में किया जाता है। इसके लिए बड़े बर्तन, जिन्हें फरमैंटर या किण्वक कहते हैं, का प्रयोग होता है। किण्वित पेय जैसे वाइन, बियर, डिस्की, ब्रांडी और रम के उत्पादन में विशेष रूप से यीस
अभ्यास प्रश्न — Chapter 8
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता, परंतु सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो, तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जायेंगे और क्यों?
उत्तर:
यदि सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति प्रदर्शित करनी हो तो ऐसा नमूना ले जाना चाहिए जिसमें सूक्ष्मजीवों की संख्या अधिक हो और जो आसानी से खराब न हो। उदाहरण के लिए, दही, छाछ, या किण्वित खाद्य पदार्थ जैसे अचार, या मिट्टी का नमूना ले सकते हैं क्योंकि इनमें जीवाणु और अन्य सूक्ष्मजीव प्रचुर मात्रा में होते हैं। पानी के नमूने में भी सूक्ष्मजीव हो सकते हैं, परंतु वे कम संख्या में हो सकते हैं। इसलिए दही या किण्वित पदार्थ बेहतर विकल्प हैं।
व्याख्या:
सूक्ष्मजीव नग्न नेत्रों से नहीं दिखते, इसलिए सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखने के लिए ऐसे नमूने चाहिए जिनमें सूक्ष्मजीवों की संख्या अधिक हो ताकि आसानी से उनकी उपस्थिति प्रदर्शित की जा सके। दही या किण्वित पदार्थों में जीवाणु अधिक होते हैं और वे आसानी से खराब भी नहीं होते।
Q2.2. उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध करें।
उत्तर:
उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं, जैसे कि किण्वन क्रिया में जीवाणु और कवक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और कभी-कभी मीथेन (CH4) गैस का उत्सर्जन करते हैं। उदाहरण के लिए, दही में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ग्लूकोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते समय CO2 गैस उत्पन्न करते हैं। इसी प्रकार, गोबर के ढेर में मीथेन गैस का उत्पादन मेथेनोजेनिक आर्किया द्वारा होता है। इस प्रकार सूक्ष्मजीव उपापचय के दौरान गैसों का निष्कासन करते हैं।
व्याख्या:
किण्वन क्रिया में सूक्ष्मजीव ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट को तोड़ते हैं और ऊर्जा प्राप्त करते हैं, इस प्रक्रिया में CO2 और मीथेन जैसी गैसें निकलती हैं। ये गैसें उपापचय के दौरान निष्कासित होती हैं।
Q3.3. किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन करें।
उत्तर:
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दही, छाछ, पनीर, अचार, खमीरयुक्त रोटी आदि खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। ये बैक्टीरिया दूध में पाए जाने वाले लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते हैं जिससे दही बनता है। इनके लाभप्रद उपयोगों में शामिल हैं: - पाचन में सहायता करना और आंतों के लिए लाभकारी बैक्टीरिया प्रदान करना। - खाद्य पदार्थों को संरक्षित करना क्योंकि लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया खाद्य पदार्थों में अम्लीय वातावरण बनाकर हानिकारक जीवाणुओं को रोकते हैं। - कुछ लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया प्रोबायोटिक्स के रूप में उपयोग किए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं।
व्याख्या:
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूध को दही में बदलते हैं और खाद्य संरक्षण में मदद करते हैं। ये बैक्टीरिया आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं।
Q4.4. कुछ पारंपरिक भारतीय आहार जो गेहूँ, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताएँ।
उत्तर:
पारंपरिक भारतीय आहार जिनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग होता है, वे हैं: - इडली (चावल और उड़द की दाल से बनी) - ढोकला (चना या बेसन से बना) - दही (दूध का किण्वित रूप) - छाछ - खमीरयुक्त रोटी - अचार (किण्वित) इन खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीव जैसे लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया और खमीर (यीस्ट) का उपयोग होता है जो किण्वन प्रक्रिया द्वारा स्वाद, पोषण और संरक्षा प्रदान करते हैं।
व्याख्या:
भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीवों का उपयोग किण्वन के लिए किया जाता है जिससे खाद्य पदार्थों का स्वाद, पोषण और पाचन में सुधार होता है।
Q5.5. हानिप्रद जीवाणु द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियंत्रण में किस प्रकार सूक्ष्मजीव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
उत्तर:
हानिप्रद जीवाणु द्वारा उत्पन्न रोगों के नियंत्रण में सूक्ष्मजीव निम्नलिखित प्रकार से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं: - प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) का उत्पादन: कुछ कवक और जीवाणु प्रतिजैविक जैसे पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन आदि का उत्पादन करते हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को मारते हैं। - जैव नियंत्रण: कुछ लाभकारी जीवाणु और कवक हानिकारक जीवाणुओं और कीटों को नियंत्रित करते हैं। - टीकाकरण: सूक्ष्मजीवों से प्राप्त टीके हानिकारक जीवाणुओं से होने वाले रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस प्रकार सूक्ष्मजीव रोग नियंत्रण में सहायक होते हैं।
व्याख्या:
सूक्ष्मजीव प्रतिजैविकों का स्रोत होते हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को मारते हैं। जैव नियंत्रण और टीकाकरण के माध्यम से भी ये रोग नियंत्रण में सहायक हैं।
Q6.6. किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखें, जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों (एंटीबायोटिकों) के उत्पादन में किया जाता है।
उत्तर:
प्रतिजैविकों के उत्पादन में प्रयुक्त दो कवक प्रजातियाँ हैं: 1. Penicillium notatum (पेनिसिलियम नोटैटम) - पेनिसिलिन का स्रोत 2. Cephalosporium acremonium (सेफालोस्पोरियम एक्रेमोनियम) - सेफालोस्पोरिन प्रतिजैविक का स्रोत
व्याख्या:
पेनिसिलियम नोटैटम से पेनिसिलिन प्रतिजैविक प्राप्त होता है जो बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार में उपयोगी है। सेफालोस्पोरियम से सेफालोस्पोरिन प्रतिजैविक प्राप्त होता है।
Q7.7. वाहितमल से आप क्या समझते हैं, वाहितमल हमारे लिए किस प्रकार से हानिप्रद हैं?
उत्तर:
वाहितमल का अर्थ है जल में उपस्थित प्रदूषक पदार्थ जो जल को प्रदूषित करते हैं। ये प्रदूषक जैविक, रासायनिक या भौतिक हो सकते हैं। वाहितमल हमारे लिए हानिप्रद इसलिए हैं क्योंकि: - ये जल स्रोतों को प्रदूषित कर देते हैं जिससे जल जनित रोग फैलते हैं। - जल में घुले रासायनिक प्रदूषक मछलियों और अन्य जलजीवों के लिए विषैले होते हैं। - वाहितमल जल का उपयोग पीने, सिंचाई और उद्योगों में करने से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए वाहितमल जल को उपचारित करना आवश्यक होता है।
व्याख्या:
वाहितमल जल में उपस्थित प्रदूषक होते हैं जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं। जल प्रदूषण से जल जनित रोग फैलते हैं और जलजीवों की मृत्यु होती है।
Q8.8. प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहितमल उपचार के बीच पाए जाने वाले मुख्य अंतर कौन से हैं?
उत्तर:
प्राथमिक वाहितमल उपचार में जल से ठोस कणों, तलछट, तैलीय पदार्थों आदि को हटाया जाता है, जो मुख्यतः भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है। इसमें छानना, जमावट आदि शामिल हैं। द्वितीयक वाहितमल उपचार में जल में उपस्थित जैविक प्रदूषकों को सूक्ष्मजीवों की सहायता से विघटित किया जाता है। इसमें जैविक किण्वन प्रक्रिया द्वारा कार्बनिक पदार्थों को कम किया जाता है। मुख्य अंतर: - प्राथमिक उपचार भौतिक और रासायनिक होता है, द्वितीयक जैविक होता है। - प्राथमिक उपचार में ठोस पदार्थ हटाए जाते हैं, द्वितीयक में जैविक प्रदूषक। - द्वितीयक उपचार जल को अधिक स्वच्छ बनाता है।
व्याख्या:
प्राथमिक उपचार में जल से बड़े कण हटाए जाते हैं जबकि द्वितीयक उपचार में सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक प्रदूषकों का विघटन होता है जिससे जल स्वच्छ होता है।