मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
8.2 औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव
औद्योगिक स्तर पर सूक्ष्मजीवों का उपयोग अनेक मूल्यवान उत्पादों के उत्पादन में किया जाता है। इसके लिए बड़े बर्तन, जिन्हें फरमैंटर या किण्वक कहते हैं, का प्रयोग होता है।
किण्वित पेय जैसे वाइन, बियर, डिस्की, ब्रांडी और रम के उत्पादन में विशेष रूप से यीस्ट (सैकेरोमाइसीज सैरीविसी) का उपयोग होता है। यीस्ट के उपापचयी पथ के माध्यम से शर्करा से ऐथानॉल और CO₂ उत्पन्न होते हैं। वाइन और बियर बिना आसवन के बनाए जाते हैं, जबकि डिस्की, ब्रांडी और रम किण्वित रस के आसवन द्वारा प्राप्त होते हैं।
प्रतिजैविक (एंटीबॉयोटिक) सूक्ष्मजीवों द्वारा निर्मित रासायनिक पदार्थ होते हैं जो अन्य रोगजनक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें मारते हैं। सबसे पहला प्रतिजैविक पैनीसिलिन था, जिसकी खोज एलैन्जेंडर फ्लैमिंग ने की थी। उन्होंने देखा कि पैनीसिलियम नोटेटम नामक मोल्ड से उत्पन्न पदार्थ स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकता है। इसके बाद अरनैस्ट चैन और हावर्ड फ्लौरे ने पैनीसिलिन को प्रभावी प्रतिजैविक के रूप में विकसित किया।
इसके अलावा, अन्य सूक्ष्मजीवों से कई अन्य प्रतिजैविक भी प्राप्त किए गए हैं, जो प्लेग, काली खाँसी, डिप्थीरिया, लैप्रोसी जैसे रोगों के उपचार में उपयोगी हैं।
सूक्ष्मजीवों द्वारा रसायन, एंजाइम और अन्य जैवसक्रिय अणुओं का उत्पादन भी होता है। उदाहरण के लिए, ऐस्परजिलस नाइगर से सिट्रिक अम्ल, एसीटोबैक्टर एसिटाई से एसीटिक अम्ल, क्लोस्ट्रीडियम ब्यूटायलिकम से ब्यूट्रिक अम्ल, और लैक्टोबैसिलस से लैक्टिक अम्ल का उत्पादन होता है।
एंजाइमों में लाइपेज का उपयोग कपड़ों से तेल के धब्बे हटाने में, पैक्टिनेज और प्रोटीऐजेज का उपयोग फल रस को साफ करने में किया जाता है। स्ट्रैटोकोकस जीवाणु द्वारा उत्पन्न स्ट्रैटोकोइनेज का उपयोग रक्त वाहिकाओं से थक्का हटाने में होता है। साइक्लोस्पोरिन-ए नामक प्रतिरक्षा निरोधक औषधि ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम कवक से प्राप्त होती है। मोनॉस्कस परप्यूरीअस यीस्ट से उत्पन्न स्टैटिन का उपयोग रक्त कोलेस्ट्रॉल कम करने में किया जाता है।
📊 Diagram: चित्र 8.4 किण्वक (फरमैंटर); चित्र 8.5 किण्वन संयंत्र।
🧪 Activity: फरमैंटर में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि और किण्वन की प्रक्रिया का अवलोकन।
🔗 Connection: यह अनुभाग वाहितमल उपचार में सूक्ष्मजीवों की भूमिका की चर्चा के लिए आधार बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता, परंतु सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो, तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जायेंगे और क्यों?
यदि सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति प्रदर्शित करनी हो तो ऐसा नमूना ले जाना चाहिए जिसमें सूक्ष्मजीवों की संख्या अधिक हो और जो आसानी से खराब न हो। उदाहरण के लिए, दही, छाछ, या किण्वित खाद्य पदार्थ जैसे अचार, या मिट्टी का नमूना ले सकते हैं क्योंकि इनमें जीवाणु और अन्य सूक्ष्मजीव प्रचुर मात्रा में होते हैं। पानी के नमूने में भी सूक्ष्मजीव हो सकते हैं, परंतु वे कम संख्या में हो सकते हैं। इसलिए दही या किण्वित पदार्थ बेहतर विकल्प हैं।
2. उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध करें।
उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं, जैसे कि किण्वन क्रिया में जीवाणु और कवक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और कभी-कभी मीथेन (CH4) गैस का उत्सर्जन करते हैं। उदाहरण के लिए, दही में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ग्लूकोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते समय CO2 गैस उत्पन्न करते हैं। इसी प्रकार, गोबर के ढेर में मीथेन गैस का उत्पादन मेथेनोजेनिक आर्किया द्वारा होता है। इस प्रकार सूक्ष्मजीव उपापचय के दौरान गैसों का निष्कासन करते हैं।
3. किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन करें।
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दही, छाछ, पनीर, अचार, खमीरयुक्त रोटी आदि खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। ये बैक्टीरिया दूध में पाए जाने वाले लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते हैं जिससे दही बनता है। इनके लाभप्रद उपयोगों में शामिल हैं:
- पाचन में सहायता करना और आंतों के लिए लाभकारी बैक्टीरिया प्रदान करना।
- खाद्य पदार्थों को संरक्षित करना क्योंकि लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया खाद्य पदार्थों में अम्लीय वातावरण बनाकर हानिकारक जीवाणुओं को रोकते हैं।
- कुछ लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया प्रोबायोटिक्स के रूप में
4. कुछ पारंपरिक भारतीय आहार जो गेहूँ, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताएँ।
पारंपरिक भारतीय आहार जिनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग होता है, वे हैं:
- इडली (चावल और उड़द की दाल से बनी)
- ढोकला (चना या बेसन से बना)
- दही (दूध का किण्वित रूप)
- छाछ
- खमीरयुक्त रोटी
- अचार (किण्वित)
इन खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीव जैसे लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया और खमीर (यीस्ट) का उपयोग होता है जो किण्वन प्रक्रिया द्वारा स्वाद, पोषण और संरक्षा प्रदान करते हैं।
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