मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
8.3 वाहितमल उपचार में सूक्ष्मजीव
वाहितमल अर्थात् नगरों और शहरों से उत्पन्न व्यर्थ जल जिसमें मानव मलमूत्र और अन्य कार्बनिक पदार्थ होते हैं, का उपचार आवश्यक होता है ताकि यह पर्यावरण को प्रदूषित न करे। वाहितमल में रोगजनक सूक्ष्मजीव होते हैं, इसलिए इसे बिना उपचार के प्राकृतिक जल स्रोतों में नहीं छोड़ा जा सकता। वाहितमल उपचार दो मुख्य चरणों में किया जाता है:
1. प्राथमिक उपचार: इसमें वाहितमल से बड़े-छोटे कणों को निस्यंदन (फिल्ट्रेशन) और अवसादन (सेडीमिटेशन) द्वारा भौतिक रूप से अलग किया जाता है। तैरते हुए कूड़े-करकट को हटाया जाता है और ठोस पदार्थ अवसादित किए जाते हैं। इससे ठोस अपशिष्ट (प्राथमिक आपक) और तरल बहिःस्राव प्राप्त होता है।
2. द्वितीयक उपचार (जीव विज्ञानीय उपचार): प्राथमिक बहिःस्राव को वायुवीय टैंकों में भेजा जाता है जहाँ वायु पंप कर लाभदायक वायुवीय सूक्ष्मजीवों की वृद्धि कराई जाती है। ये सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों को खपत कर बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) को घटाते हैं। बीओडी उस ऑक्सीजन की मात्रा को दर्शाता है जो जल में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों को ऑक्सीकरण करने के लिए आवश्यक होती है। जब बीओडी घट जाती है, तो बहिःस्राव को निस्यंदन टैंक में भेजा जाता है जहाँ जीवाणु झुंड (फ्लॉक्स) उसे अवसाद में परिवर्तित करते हैं। यह सक्रियित आपक कहलाता है। सक्रियित आपक का कुछ भाग पुनः वायुवीय टैंक में भेजा जाता है। बचा हुआ भाग अवायवीय आपक संपाचित्र में भेजा जाता है जहाँ अवायवीय जीवाणु इसे पचाते हैं और मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें उत्पन्न होती हैं, जिन्हें बायोगैस कहा जाता है।
द्वितीयक उपचार के बाद बहिःस्राव को प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ा जाता है। वाहितमल उपचार संयंत्रों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण अपचारित वाहितमल प्रदूषण और जल जनित रोगों का कारण बनता है। भारत सरकार ने गंगा और यमुना नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए योजनाएँ शुरू की हैं।
📊 Diagram: चित्र 8.6 वाहित मल उपचार संयंत्र का वायुवीय टैंक; चित्र 8.7 वाहित मल उपचार संयंत्र का आकाशी चित्र।
🧪 Activity: वाहितमल के बीओडी का मापन और उपचार की प्रक्रिया का अध्ययन।
🔗 Connection: यह अनुभाग बायोगैस उत्पादन में सूक्ष्मजीवों की भूमिका की चर्चा के लिए आधार प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. जीवाणुओं को नग्न नेत्रों द्वारा नहीं देखा जा सकता, परंतु सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो, तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जायेंगे और क्यों?
यदि सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति प्रदर्शित करनी हो तो ऐसा नमूना ले जाना चाहिए जिसमें सूक्ष्मजीवों की संख्या अधिक हो और जो आसानी से खराब न हो। उदाहरण के लिए, दही, छाछ, या किण्वित खाद्य पदार्थ जैसे अचार, या मिट्टी का नमूना ले सकते हैं क्योंकि इनमें जीवाणु और अन्य सूक्ष्मजीव प्रचुर मात्रा में होते हैं। पानी के नमूने में भी सूक्ष्मजीव हो सकते हैं, परंतु वे कम संख्या में हो सकते हैं। इसलिए दही या किण्वित पदार्थ बेहतर विकल्प हैं।
2. उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध करें।
उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं, जैसे कि किण्वन क्रिया में जीवाणु और कवक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और कभी-कभी मीथेन (CH4) गैस का उत्सर्जन करते हैं। उदाहरण के लिए, दही में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ग्लूकोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते समय CO2 गैस उत्पन्न करते हैं। इसी प्रकार, गोबर के ढेर में मीथेन गैस का उत्पादन मेथेनोजेनिक आर्किया द्वारा होता है। इस प्रकार सूक्ष्मजीव उपापचय के दौरान गैसों का निष्कासन करते हैं।
3. किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन करें।
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दही, छाछ, पनीर, अचार, खमीरयुक्त रोटी आदि खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। ये बैक्टीरिया दूध में पाए जाने वाले लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में परिवर्तित करते हैं जिससे दही बनता है। इनके लाभप्रद उपयोगों में शामिल हैं:
- पाचन में सहायता करना और आंतों के लिए लाभकारी बैक्टीरिया प्रदान करना।
- खाद्य पदार्थों को संरक्षित करना क्योंकि लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया खाद्य पदार्थों में अम्लीय वातावरण बनाकर हानिकारक जीवाणुओं को रोकते हैं।
- कुछ लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया प्रोबायोटिक्स के रूप में
4. कुछ पारंपरिक भारतीय आहार जो गेहूँ, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताएँ।
पारंपरिक भारतीय आहार जिनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग होता है, वे हैं:
- इडली (चावल और उड़द की दाल से बनी)
- ढोकला (चना या बेसन से बना)
- दही (दूध का किण्वित रूप)
- छाछ
- खमीरयुक्त रोटी
- अचार (किण्वित)
इन खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीव जैसे लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया और खमीर (यीस्ट) का उपयोग होता है जो किण्वन प्रक्रिया द्वारा स्वाद, पोषण और संरक्षा प्रदान करते हैं।
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