मानव स्वास्थ्य तथा रोग | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

मानव स्वास्थ्य तथा रोग – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मानव स्वास्थ्य तथा रोग from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
मानव में सामान्य रोग
मानव शरीर में अनेक प्रकार के रोग होते हैं जिनमें से अधिकांश संक्रामक रोग होते हैं। संक्रामक रोगों के कारण रोगजनक जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटोजोआ तथा कृमि होते हैं। ये रोगजनक जीव शरीर में प्रवेश कर उसकी सामान्य क्रियाओं में बाधा उत्पन्न करते हैं और आकृतिक तथा प्रकार्यात्मक क्षति करते हैं। उदाहरण के लिए, साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु टाइफाइड ज्वर का कारण होता है। यह रोगजनक संदूषित भोजन और पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और रक्त प्रवाह के द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचता है। टाइफाइड के लक्षणों में लगातार उच्च ज्वर, कमजोरी, आमाशय में पीड़ा, कब्ज, सिरदर्द और भूख न लगना प्रमुख हैं।
न्युमोनिया रोग के लिए स्ट्रेप्टोकोकस न्युमोनी और हीमोफिल्स इंफ्लुएंजी जैसे जीवाणु जिम्मेदार होते हैं। यह रोग फेफड़ों के वायुकोष्ठों को संक्रमित करता है जिससे उनमें तरल भर जाता है और सांस लेने में कठिनाई होती है। लक्षणों में ज्वर, ठिठुरन, खांसी और सिरदर्द शामिल हैं।
विषाणुओं में नासाविषाणु (राइनोवायरस) सामान्य जुकाम फैलाते हैं। ये नाक और श्वसन पथ को संक्रमित करते हैं। सामान्य जुकाम के लक्षणों में नाक बंद होना, कंठ दाह, स्वरक्षता, खांसी, सिरदर्द और थकावट शामिल हैं।
प्रोटोजोआ में प्लैजमोडियम मलेरिया का कारण है। मलेरिया का जीवन चक्र मादा ऐनोफेलीज मच्छर के काटने से शुरू होता है। मच्छर के शरीर में प्लैजमोडियम का विकास होता है और फिर यह मानव रक्त में प्रवेश करता है। यह यकृत और लाल रक्त कणिकाओं को संक्रमित करता है जिससे ज्वर और ठिठुरन होते हैं।
कृमियों में ऐस्कारिस, वुचेरेरिया आदि प्रमुख हैं। ऐस्कारिसता रोग आंत्र परजीवी ऐस्कारिस के कारण होता है, जबकि फाइलेरिया लसीका वाहिकाओं में दीर्घकालिक शोध उत्पन्न करता है।
कवकों में माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटॉन और एपिडर्मोफाइटॉन दाद रोग के लिए जिम्मेदार हैं। यह त्वचा, नाखून और सिर की त्वचा पर खुजली और शल्की विक्षतियाँ उत्पन्न करते हैं।
रोगों की रोकथाम के लिए स्वच्छता, साफ पानी, उचित खाद्य पदार्थों का सेवन, रोगवाहकों का नियंत्रण जैसे उपाय आवश्यक हैं। टीकाकरण और प्रतिजैविकों के उपयोग से संक्रामक रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है।
📊 Diagram: 7.1 मानव में सामान्य रोग; चित्र 7.1 प्लैन्मोडियम के जीवन चक्र में अवस्थाएँ; चित्र 7.2 एक निम्न पाद में चिरकारी शोध दर्शाता चित्र; चित्र 7.3 त्वचा के दाद प्रभावित क्षेत्र को दर्शाता चित्र
🧪 Activity: छात्रों को विभिन्न संक्रामक रोगों के लक्षणों और उनके रोगजनकों के बारे में जानकारी एकत्रित कर कक्षा में प्रस्तुत करने के लिए कहा जा सकता है।
🔗 Connection: यह अनुभाग प्रतिरक्षा तंत्र की भूमिका और मानव शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता की चर्चा के लिए आधार प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कौन से विभिन्न जन स्वास्थ्य उपाय हैं, जिन्हें आप संक्रामक रोगों के विरुद्ध रक्षा-उपायों के रूप में सुझायेंगे?
संक्रामक रोगों के विरुद्ध जन स्वास्थ्य उपायों में शामिल हैं: 1. स्वच्छता बनाए रखना जैसे हाथ धोना, साफ-सफाई रखना। 2. स्वच्छ जल और भोजन का सेवन। 3. टीकाकरण (लसीकरण) कराना। 4. संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखना। 5. संक्रमित स्थानों की सैनिटाइजेशन। 6. मच्छरदानी का उपयोग और मच्छर नियंत्रण। 7. सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना। 8. उचित कचरा प्रबंधन। 9. रोगों के लक्षणों को पहचान कर समय पर चिकित्सकीय सहायता लेना।
जैविकी के अध्ययन ने संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने में किस प्रकार हमारी सहायता की है?
जैविकी के अध्ययन से संक्रामक रोगों के कारण, उनके संचरण के तरीके, रोगजनकों की संरचना और जीवन चक्र को समझने में मदद मिली है। इससे: 1. रोगों की पहचान और निदान में सुधार हुआ। 2. प्रभावी टीके और दवाओं का विकास संभव हुआ। 3. रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय विकसित हुए। 4. रोग नियंत्रण के लिए जन स्वास्थ्य नीतियाँ बनाई गईं। 5. रोगों के फैलाव को रोकने के लिए जैव प्रौद्योगिकी आधारित तकनीकों का उपयोग हुआ।
निम्नलिखित रोगों का संचरण कैसे होता है? (क) अमीबता (ख) मलेरिया (ग) एस्केरिसता (घ) न्यूमोनिया
संचरण के तरीके: (क) अमीबता: दूषित जल या भोजन के माध्यम से, अमीबा नामक परजीवी के कारण होता है। यह मल-प्रदूषित जल के सेवन से फैलता है। (ख) मलेरिया: संक्रमित मच्छर (ऐनाफिलीस) के काटने से फैलता है। मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है। (ग) एस्केरिसता: दूषित भोजन या जल के माध्यम से फैलता है। यह एक प्रकार का कीड़ा (पैरासाइट) है जो आंतों में रहता है। (घ) न्यूमोनिया: यह मुख्यतः हवा में मौजूद जीवाणु या विषाणु के छींकने या खांसने से फैलता है।
जल-वाहित रोगों की रोकथाम के लिए आप क्या उपाय अपनायेंगे?
जल-वाहित रोगों की रोकथाम के उपाय: 1. स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का उपयोग। 2. जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना। 3. पानी को उबालकर या फिल्टर करके पीना। 4. शौचालयों का उचित प्रबंधन और खुले में शौच से बचाव। 5. हाथों की स्वच्छता बनाए रखना, विशेषकर भोजन से पहले। 6. जलाशयों और तालाबों में मच्छर नियंत्रण। 7. जन जागरूकता अभियान चलाना।
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