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विकास | Class 12 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

विकास | Class 12 Biology Notes

विकास – this guide gives you a concise, exam-ready overview of विकास from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

6.2 जीवन-स्वरूप का विकास - एक सिद्धांत

जीवन के विकास को लेकर परंपरागत धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अलग हैं। धार्मिक दृष्टिकोण में माना जाता है कि सभी जीव एक विशेष सृष्टि द्वारा बनाए गए हैं और जैव विविधता स्थिर है। परंतु चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण के सिद्धांत के माध्यम से यह बताया कि जीवों का विकास क्रमिक और धीरे-धीरे हुआ है। डार्विन ने देखा कि जीवों में समानताएँ होती हैं, जो उनके साझा पूर्वज होने का संकेत देती हैं। जीवों के स्वरूप समय के साथ बदलते हैं और कुछ विलुप्त हो जाते हैं जबकि नए जीव रूप उत्पन्न होते हैं। प्राकृतिक वरण का अर्थ है कि जो जीव पर्यावरण के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं, वे अधिक संताने छोड़ते हैं और उनके लक्षण अगली पीढ़ी में बढ़ते हैं।

एल्फ्रेड वॉलेस ने भी डार्विन के समान निष्कर्ष निकाले। भूवैज्ञानिक इतिहास और जीववैज्ञानिक इतिहास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जीवों के विकास के प्रमाण जीवाश्म, शरीर रचना, भ्रूण विकास आदि से मिलते हैं। यह सिद्धांत यह भी बताता है कि पृथ्वी बहुत प्राचीन है, न कि केवल हजारों वर्ष पुरानी। इस खंड में प्राकृतिक वरण के सिद्धांत की मूल बातें और जीवों के विकास की प्रक्रिया को समझाया गया है।

📊 Diagram: चित्र 6.2 डाइनोसोरों का वंश-वृक्ष और उनके आज के मिलते-जुलते जीव जैसे मगरमच्छ, पक्षी आदि

🧪 Activity: डार्विन के प्राकृतिक वरण सिद्धांत को समझने के लिए गैलपैंगोस द्वीप की फिंचों के चोंच के विभिन्न प्रकारों का अध्ययन करें।

🔗 Connection: यह खंड विकास के प्रमाणों की चर्चा की ओर ले जाता है, जो अगले खंड में विस्तार से बताए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. डार्विन के चयन सिद्धांत के परिप्रेक्ष्य में जीवाणुओं में देखी गई प्रतिजैविक प्रतिरोध का स्पष्टीकरण करें।

डार्विन के चयन सिद्धांत के अनुसार, जीवों में आनुवंशिक विविधता होती है और पर्यावरणीय दबावों के कारण कुछ जीव अधिक अनुकूल होते हैं। जीवाणुओं में प्रतिजैविक प्रतिरोध का विकास भी इसी सिद्धांत के अनुरूप है। जब जीवाणु किसी प्रतिजैविक के संपर्क में आते हैं, तो उनमें से कुछ में आनुवंशिक परिवर्तन (म्यूटेशन) हो सकते हैं जो उन्हें उस दवा के प्रति प्रतिरोधी बनाते हैं। ये प्रतिरोधी जीवाणु जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं, जबकि संवेदनशील जीवाणु मर जाते हैं। इस प्रकार, प्राकृतिक चयन के कारण प्रतिजैविक प्रतिरोध

2. समाचार पत्रों और लोकप्रिय वैज्ञानिक लेखों से विकास संबंधी नए जीवाश्मों और मतभेदों की जानकारी प्राप्त करें।

यह प्रश्न शोध और जानकारी संग्रहण पर आधारित है। विद्यार्थी समाचार पत्रों, लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं और ऑनलाइन स्रोतों से नवीनतम जीवाश्म खोजों और विकास से संबंधित मतभेदों की जानकारी एकत्रित करें। उदाहरण के लिए, हाल के वर्षों में पाए गए नए मानव पूर्वज जीवाश्म, डायनासोर के नए प्रजाति के जीवाश्म आदि।

3. ‘प्रजाति’ की स्पष्ट परिभाषा देने का प्रयास करें।

प्रजाति (Species) जीवों का वह समूह होता है जिनके बीच प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रजनन संभव होता है और वे अपनी संतति उत्पन्न कर सकते हैं जो पुनः प्रजनन योग्य होती है। प्रजाति के सदस्यों में समान लक्षण और गुण होते हैं।

4. मानव-विकास के विभिन्न घटकों का पता करें (संकेत – मस्तिष्क साइज और कार्य, कंकाल-संरचना, भोजन में पसंदगी आदि)।

मानव विकास के घटक निम्नलिखित हैं:

  • मस्तिष्क का आकार और कार्य: मानव मस्तिष्क का आकार अन्य प्राइमेट्स की तुलना में बड़ा है, जिससे जटिल सोच, भाषा और समस्या समाधान संभव होता है।
  • कंकाल संरचना: मानव कंकाल में सीधे चलने के लिए विशेष परिवर्तन हुए हैं, जैसे कि रीढ़ की हड्डी की वक्रता, पैरों की लंबाई, और हाथों की संरचना।
  • भोजन में पसंदगी: मानव ने शाकाहारी से सर्वाहारी भोजन की ओर विकास किया है, जिससे पोषण में विविधता आई है।
  • अन्य घटक: सामाजिक व्यवहार, उपकरणों का उपयोग, भाषा विकास आदि।

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