Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
6.1 जीवन की उत्पत्ति
व्याख्या6.1 जीवन की उत्पत्ति
जीवन की उत्पत्ति को समझने के लिए हमें ब्रह्मांड और पृथ्वी के विकास की पृष्ठभूमि जाननी आवश्यक है। ब्रह्मांड लगभग 1380 करोड़ वर्ष पुराना है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति 'विग बैंग' सिद्धांत द्वारा समझाई जाती है, जिसमें एक महाविस्फोट के बाद ब्रह्मांड का विस्तार हुआ। प्रारंभ में ब्रह्मांड में हाइड्रोजन और हीलियम गैसें बनीं, जो गुरुत्वाकर्षण के कारण आकाशगंगाओं का निर्माण करती गईं। पृथ्वी की उत्पत्ति लगभग 450 करोड़ वर्ष पूर्व हुई। प्रारंभिक पृथ्वी पर वायुमंडल नहीं था, परंतु जल वाष्प, मीथेन, अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड आदि गैसें थीं। सूर्य की पराबैंगनी किरणों ने जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया, जिससे पृथ्वी पर ऑक्सीजन और ओजोन परत बनी। जलवाष्प के संघनन से वर्षा हुई और महासागरों का निर्माण हुआ। जीवन की उत्पत्ति लगभग 400 करोड़ वर्ष पूर्व महासागरों में हुई। कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि जीवन अंतरिक्ष से आया होगा, जिसे पैन-स्पर्मिया सिद्धांत कहते हैं। परंतु लुई पाश्चर ने स्वत: जनन सिद्धांत को खारिज कर दिया कि जीवन केवल पूर्व-विद्यमान जीवन से ही उत्पन्न होता है। रूस के आपेरिन और इंग्लैंड के हालडेन ने रासायनिक विकास का सिद्धांत दिया कि जीवन की शुरुआत अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक अणुओं के निर्माण से हुई। एस.एल. मिलर ने 1953 में प्रयोगशाला में मिथेन, हाइड्रोजन, अमोनिया आदि गैसों के मिश्रण में विद्युत डिस्चार्ज कर अमीनो एसिड का निर्माण दिखाया, जो जीवन के अणुओं के निर्माण का प्रमाण है। प्रारंभिक जीवन संभवतः 3 अरब वर्ष पूर्व एककोशिकीय था, जो महासागरों में रहता था। यह जीवन अकार्बनिक से कार्बनिक अणुओं के रासायनिक विकास के बाद उत्पन्न हुआ। इस प्रकार जीवन की उत्पत्ति रासायनिक विकास के माध्यम से हुई, जिसे अजीवात् जनन सिद्धांत भी कहा जाता है।
- ब्रह्मांड लगभग 1380 करोड़ वर्ष पुराना है और 'विग बैंग' सिद्धांत से उत्पन्न हुआ।
- पृथ्वी की उत्पत्ति लगभग 450 करोड़ वर्ष पूर्व हुई और प्रारंभ में वायुमंडल नहीं था।
- सूर्य की पराबैंगनी किरणों ने जल को H₂ और O₂ में विभाजित किया, जिससे ओजोन परत बनी।
- जीवन की उत्पत्ति लगभग 400 करोड़ वर्ष पूर्व महासागरों में हुई।
- पैन-स्पर्मिया सिद्धांत के अनुसार जीवन अंतरिक्ष से आया हो सकता है।
- लुई पाश्चर ने स्वत: जनन सिद्धांत को खारिज किया और जीवन के रासायनिक विकास का समर्थन किया।
- एस.एल. मिलर के प्रयोग ने जीवन के अणुओं के रासायनिक निर्माण को प्रमाणित किया।
- 📌 विग बैंग सिद्धांत: ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सिद्धांत जो एक महाविस्फोट से ब्रह्मांड के विस्तार को बताता है।
- 📌 पैन-स्पर्मिया: जीवन के बीजों का अंतरिक्ष से पृथ्वी पर आना।
- 📌 स्वत: जनन सिद्धांत: जीवन का क्षयमान पदार्थों से स्वतः उत्पन्न होना (जो खारिज हो चुका है)।
6.2 जीवन-स्वरूप का विकास - एक सिद्धांत
व्याख्या6.2 जीवन-स्वरूप का विकास - एक सिद्धांत
जीवन के विकास को लेकर परंपरागत धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अलग हैं। धार्मिक दृष्टिकोण में माना जाता है कि सभी जीव एक विशेष सृष्टि द्वारा बनाए गए हैं और जैव विविधता स्थिर है। परंतु चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण के सिद्धांत के माध्यम से यह बताया कि जीवों का विकास क्रमिक और धीरे-धीरे हुआ है। डार्विन ने देखा कि जीवों में समानताएँ होती हैं, जो उनके साझा पूर्वज होने का संकेत देती हैं। जीवों के स्वरूप समय के साथ बदलते हैं और कुछ विलुप्त हो जाते हैं जबकि नए जीव रूप उत्पन्न होते हैं। प्राकृतिक वरण का अर्थ है कि जो जीव पर्यावरण के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं, वे अधिक संताने छोड़ते हैं और उनके लक्षण अगली पीढ़ी में बढ़ते हैं। एल्फ्रेड वॉलेस ने भी डार्विन के समान निष्कर्ष निकाले। भूवैज्ञानिक इतिहास और जीववैज्ञानिक इतिहास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जीवों के विकास के प्रमाण जीवाश्म, शरीर रचना, भ्रूण विकास आदि से मिलते हैं। यह सिद्धांत यह भी बताता है कि पृथ्वी बहुत प्राचीन है, न कि केवल हजारों वर्ष पुरानी। इस खंड में प्राकृतिक वरण के सिद्धांत की मूल बातें और जीवों के विकास की प्रक्रिया को समझाया गया है।
- धार्मिक दृष्टिकोण में जीवन को स्थिर और एक विशेष सृष्टि से माना जाता है।
- चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण के सिद्धांत से जीवन के क्रमिक विकास को समझाया।
- जीवों में समानताएँ उनके साझा पूर्वज होने का संकेत हैं।
- प्राकृतिक वरण में अधिक उपयुक्त जीव अधिक संताने छोड़ते हैं।
- एल्फ्रेड वॉलेस ने भी डार्विन के सिद्धांत का समर्थन किया।
- भूवैज्ञानिक और जीववैज्ञानिक इतिहास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
- 📌 प्राकृतिक वरण: पर्यावरण के अनुसार जीवों का चयन, जिसमें उपयुक्त जीव अधिक संताने छोड़ते हैं।
- 📌 पूर्वज: जीवों का साझा पूर्वज जो उनके विकास का आधार है।
- 📌 जैव विविधता: पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जीवों की विविधता।
6.3 विकास के प्रमाण क्या हैं?
व्याख्या6.3 विकास के प्रमाण क्या हैं?
विकास के प्रमाण अनेक प्रकार के होते हैं जो जीवन के क्रमिक परिवर्तन को दर्शाते हैं। सबसे प्रमुख प्रमाण जीवाश्म (फॉसिल) हैं, जो चट्टानों की विभिन्न परतों में पाए जाते हैं। ये जीवाश्म पृथ्वी के विभिन्न कालों में जीवन के स्वरूपों के परिवर्तन को दर्शाते ह
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. डार्विन के चयन सिद्धांत के परिप्रेक्ष्य में जीवाणुओं में देखी गई प्रतिजैविक प्रतिरोध का स्पष्टीकरण करें।
उत्तर:
डार्विन के चयन सिद्धांत के अनुसार, जीवों में आनुवंशिक विविधता होती है और पर्यावरणीय दबावों के कारण कुछ जीव अधिक अनुकूल होते हैं। जीवाणुओं में प्रतिजैविक प्रतिरोध का विकास भी इसी सिद्धांत के अनुरूप है। जब जीवाणु किसी प्रतिजैविक के संपर्क में आते हैं, तो उनमें से कुछ में आनुवंशिक परिवर्तन (म्यूटेशन) हो सकते हैं जो उन्हें उस दवा के प्रति प्रतिरोधी बनाते हैं। ये प्रतिरोधी जीवाणु जीवित रहते हैं और प्रजनन करते हैं, जबकि संवेदनशील जीवाणु मर जाते हैं। इस प्रकार, प्राकृतिक चयन के कारण प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है।
व्याख्या:
डार्विन के चयन सिद्धांत के अनुसार, जीवों में आनुवंशिक विविधता होती है। प्रतिजैविक के संपर्क में आने पर, जो जीवाणु प्रतिरोधी होते हैं वे जीवित रहते हैं और संवेदनशील जीवाणु मर जाते हैं। इस प्रकार प्राकृतिक चयन के कारण प्रतिरोधी जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है।
Q2.2. समाचार पत्रों और लोकप्रिय वैज्ञानिक लेखों से विकास संबंधी नए जीवाश्मों और मतभेदों की जानकारी प्राप्त करें।
उत्तर:
यह प्रश्न शोध और जानकारी संग्रहण पर आधारित है। विद्यार्थी समाचार पत्रों, लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं और ऑनलाइन स्रोतों से नवीनतम जीवाश्म खोजों और विकास से संबंधित मतभेदों की जानकारी एकत्रित करें। उदाहरण के लिए, हाल के वर्षों में पाए गए नए मानव पूर्वज जीवाश्म, डायनासोर के नए प्रजाति के जीवाश्म आदि।
व्याख्या:
यह प्रश्न विद्यार्थियों को वर्तमान वैज्ञानिक खोजों से परिचित कराने के लिए है। वे विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्रित कर सकते हैं।
Q3.3. ‘प्रजाति’ की स्पष्ट परिभाषा देने का प्रयास करें।
उत्तर:
प्रजाति (Species) जीवों का वह समूह होता है जिनके बीच प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रजनन संभव होता है और वे अपनी संतति उत्पन्न कर सकते हैं जो पुनः प्रजनन योग्य होती है। प्रजाति के सदस्यों में समान लक्षण और गुण होते हैं।
व्याख्या:
प्रजाति की परिभाषा में प्रजनन योग्यता और आनुवंशिक समानता को मुख्य माना जाता है।
Q4.4. मानव-विकास के विभिन्न घटकों का पता करें (संकेत – मस्तिष्क साइज और कार्य, कंकाल-संरचना, भोजन में पसंदगी आदि)।
उत्तर:
मानव विकास के घटक निम्नलिखित हैं: - मस्तिष्क का आकार और कार्य: मानव मस्तिष्क का आकार अन्य प्राइमेट्स की तुलना में बड़ा है, जिससे जटिल सोच, भाषा और समस्या समाधान संभव होता है। - कंकाल संरचना: मानव कंकाल में सीधे चलने के लिए विशेष परिवर्तन हुए हैं, जैसे कि रीढ़ की हड्डी की वक्रता, पैरों की लंबाई, और हाथों की संरचना। - भोजन में पसंदगी: मानव ने शाकाहारी से सर्वाहारी भोजन की ओर विकास किया है, जिससे पोषण में विविधता आई है। - अन्य घटक: सामाजिक व्यवहार, उपकरणों का उपयोग, भाषा विकास आदि।
व्याख्या:
मानव विकास में शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक परिवर्तन शामिल हैं जो समय के साथ हुए हैं।
Q5.5. इंटरनेट (अंतरजाल-तंत्र) या लोकप्रिय विज्ञान लेखों से पता करें कि क्या मानवेतर किसी प्राणी में आत्म संचेतना थी।
उत्तर:
यह प्रश्न शोध आधारित है। विद्यार्थी इंटरनेट और लोकप्रिय विज्ञान लेखों से जानकारी प्राप्त करें कि क्या मानव के अलावा किसी अन्य प्राणी में आत्म-सचेतना (Self-awareness) पाई जाती है। उदाहरण के लिए, कुछ प्राइमेट्स, डॉल्फिन, हाथी आदि में आत्म-सचेतना के प्रमाण मिले हैं।
व्याख्या:
आत्म-सचेतना की अवधारणा जटिल है और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से इसका अध्ययन किया जाता है।
Q6.6. इंटरनेट (अंतरजाल-तंत्र) संसाधनों के उपयोग करते हुए आज के 10 जानवरों और उनके विलुप्त जोड़ीदारों की सूची बनाएँ (दोनों के नाम दें)।
उत्तर:
विद्यार्थी इंटरनेट संसाधनों से जानकारी लेकर निम्नलिखित उदाहरण दे सकते हैं: 1. घोड़ा (Equus ferus caballus) – विलुप्त घोड़े (Equus ferus) 2. हाथी (Elephas maximus) – मैमथ (Mammuthus primigenius) 3. शेर (Panthera leo) – विलुप्त शेर (Panthera leo spelaea) 4. कंगारू (Macropus) – विलुप्त कंगारू प्रजाति 5. मगरमच्छ (Crocodylus) – विलुप्त मगरमच्छ प्रजाति 6. गैंडा (Rhinoceros) – विलुप्त गैंडा प्रजाति 7. भालू (Ursus) – विलुप्त भालू प्रजाति 8. हिरण (Cervidae) – विलुप्त हिरण प्रजाति 9. उल्लू (Strigiformes) – विलुप्त उल्लू प्रजाति 10. कबूतर (Columbidae) – विलुप्त कबूतर प्रजाति (सटीक नाम इंटरनेट से खोजें)।
व्याख्या:
यह प्रश्न विद्यार्थियों को जीवों के विकास और विलुप्त होने की जानकारी जुटाने के लिए प्रेरित करता है।
Q7.7. विविध जंतुओं और पौधों के चित्र बनाएँ।
उत्तर:
विद्यार्थी विभिन्न जंतुओं जैसे कि पक्षी, मछली, स्तनधारी, कीट और पौधों जैसे कि फूलदार पौधे, शैवाल, फर्न आदि के चित्र बनाएँ। यह अभ्यास जीवों की विविधता को समझने में सहायक होगा।
व्याख्या:
चित्र बनाना जीवों की संरचना और विविधता को समझने का एक प्रभावी तरीका है।
Q8.8. अनुकूलनी विकिरण को एक उदाहरण का वर्णन करें।
उत्तर:
अनुकूलनी विकिरण (Adaptive radiation) वह प्रक्रिया है जिसमें एक प्रजाति से अनेक नई प्रजातियाँ विकसित होती हैं जो विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में अनुकूलित होती हैं। उदाहरण के लिए, गैलापागोस द्वीप समूह के फिंच पक्षी, जहाँ एक ही पूर्वज से विभिन्न प्रकार के फिंच विकसित हुए जो विभिन्न प्रकार के भोजन और आवास के लिए अनुकूलित हैं।
व्याख्या:
अनुकूलनी विकिरण में एक पूर्वज प्रजाति से कई नई प्रजातियाँ विकसित होती हैं जो विभिन्न पर्यावरणीय niches में रहती हैं।