वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
4.2.1 प्रभाविता नियम (ला ऑफ डोमिनेंस)
प्रभाविता नियम मेंडल द्वारा प्रस्तावित पहला नियम है जो बताता है कि लक्षणों का निर्धारण कारकों (जीनों) द्वारा होता है जो जोड़ों में पाए जाते हैं। यदि कारक जोड़ों के दो सदस्य असमान हों तो उनमें से एक का प्रभाव दूसरे पर होता है। इसका अर्थ है कि विषमयुग्मजी जीव में केवल प्रभावी अलील का लक्षण प्रकट होता है जबकि अप्रभावी अलील छिपा रहता है। उदाहरण के लिए लंबा (T) लक्षण बौने (t) लक्षण पर प्रभावी होता है। इस नियम से F₁ पीढ़ी में केवल एक लक्षण के प्रकट होने और F₂ में 3:1 अनुपात में दोनों लक्षणों के प्रकट होने की व्याख्या होती है। प्रभाविता का कारण जीन के उत्पादित एंजाइम या प्रोटीन की क्रियाशीलता होती है, जहाँ एक प्रभावी अलील कार्यक्षम एंजाइम बनाता है और अप्रभावी अलील कार्यहीन या अनुपस्थित एंजाइम बनाता है।
🔗 Connection: इस नियम के बाद विसंयोजन नियम का अध्ययन किया गया है जो जीन के अलग होने की प्रक्रिया को समझाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेंडल द्वारा प्रयोगों के लिए मटर के पौधे चुनने से क्या लाभ हुए?
मेंडल ने मटर के पौधे इसलिए चुने क्योंकि मटर के पौधों में स्पष्ट और भेद करने योग्य लक्षण होते हैं, जो आसानी से वर्गीकृत किए जा सकते हैं। इसके अलावा, मटर के पौधों का संकरण करना सरल था, उनकी वृद्धि चक्र छोटी थी, और वे स्व-परागण करते थे जिससे शुद्ध जाति बनाए रखना संभव था। ये सभी कारणों से मटर के पौधे आनुवंशिकी के अध्ययन के लिए उपयुक्त थे।
निम्न में भेद करो — - (क) प्रभाविता और अप्रभाविता - (ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी - (ग) एकसंकर और द्विसंकर।
(क) प्रभाविता और अप्रभाविता: प्रभाविता (Expressivity) का अर्थ है कि एक जीन अपने लक्षण को कितनी मात्रा में व्यक्त करता है, अर्थात लक्षण की तीव्रता। अप्रभाविता (Penetrance) का अर्थ है कि जीन अपने लक्षण को व्यक्त करता है या नहीं, अर्थात जीन का सक्रिय होना या निष्क्रिय रहना।
(ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी: समयुग्मजी (Homozygous) वह जीव होता है जिसके दोनों जीन एक जैसे (समान) होते हैं, जैसे AA या aa। विषमयुग्मजी (Heterozygous) वह जीव होता है जिसके दोनों जीन भिन्न होते हैं, जैसे Aa।
(ग) एकसंकर और द्विस
कोई द्विगुणित जीन 6 स्थलों के लिए विषमयुग्मजी हैं, कितने प्रकार के युग्मकों का उत्पादन संभव है?
यदि कोई जीव विषमयुग्मजी है और उसके 6 जीन स्थल हैं, तो प्रत्येक जीन स्थल के लिए दो प्रकार के अलील होते हैं। विषमयुग्मजी होने पर प्रत्येक स्थल से दो प्रकार के युग्मक बन सकते हैं।
युग्मकों की संख्या = 2^n = 2^6 = 64
अतः 6 स्थलों के लिए 64 प्रकार के युग्मक उत्पन्न हो सकते हैं।
एकसंकर क्रॉस का प्रयोग करते हुए, प्रभाविता नियम की व्याख्या करो।
प्रभाविता नियम (Law of Dominance) के अनुसार, जब दो शुद्ध जाति वाले जीवों का संकरण किया जाता है, जो किसी लक्षण के लिए विपरीत गुण रखते हैं, तो प्रथम पीढ़ी (F₁) में केवल एक लक्षण प्रकट होता है जिसे प्रभावी (Dominant) कहा जाता है, जबकि दूसरा लक्षण अप्रभावी (Recessive) रहता है।
उदाहरण के लिए, मटर के पौधों में पीले बीज (Y) प्रभावी और हरे बीज (y) अप्रभावी हैं। यदि शुद्ध पीले बीज वाले (YY) और शुद्ध हरे बीज वाले (yy) पौधों का क्रॉस किया जाए, तो F₁ पीढ़ी के सभी पौधे Yy होंगे और पीले बीज वाले होंगे।
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