Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 15 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
4.1 मेंडल के वंशागति के नियम
व्याख्या4.1 मेंडल के वंशागति के नियम
उन्नीसवीं सदी के मध्य में ग्रीगोर मेंडल ने मटर के पौधों में सात वर्षों तक संकरण के प्रयोग किए। उनके प्रयोगों में उन्होंने सात जोड़े विपरीत लक्षणों वाले मटर के पौधों का चयन किया, जैसे लंबा/बौना, पीला/हरा बीज, गोल/झुर्रीदार बीज आदि। इन प्रयोगों के माध्यम से मेंडल ने वंशागति के नियमों का आधारभूत सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने देखा कि लक्षणों का संकरण गणितीय नियमों के अनुसार होता है और संतति में लक्षणों का वितरण पूर्वानुमानित किया जा सकता है। मेंडल ने यह भी प्रस्तावित किया कि प्रत्येक लक्षण का निर्धारण एक 'कारक' द्वारा होता है जिसे आज हम जीन कहते हैं। ये कारक जोड़ों में पाए जाते हैं और प्रत्येक जोड़े के दो सदस्य होते हैं जिन्हें अलील कहा जाता है। मेंडल के प्रयोगों में F₁ पीढ़ी में एक ही लक्षण प्रकट होता है जबकि F₂ पीढ़ी में दोनों लक्षण 3:1 के अनुपात में प्रकट होते हैं। इस प्रकार मेंडल के नियम वंशागति के व्यवहार को समझाने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- मेंडल ने मटर के पौधों में सात वर्षों तक संकरण प्रयोग किए।
- उन्होंने सात जोड़े विपरीत लक्षणों वाले पौधों का अध्ययन किया।
- वंशागति के नियमों का आधारभूत सिद्धांत प्रस्तुत किया।
- लक्षणों का वितरण गणितीय नियमों के अनुसार होता है।
- जीन (कारक) जोड़ों में पाए जाते हैं और प्रत्येक जोड़े के दो सदस्य होते हैं।
- F₁ पीढ़ी में एक लक्षण प्रकट होता है, F₂ में दोनों 3:1 अनुपात में।
- 📌 वंशागति: लक्षणों का जनक से संतति में स्थानांतरण।
- 📌 जीन: लक्षण नियंत्रक कारक।
- 📌 अलील: एक ही जीन के विभिन्न रूप।
4.2 एक जीन की वंशागति
व्याख्या4.2 एक जीन की वंशागति
मेंडल ने एक जीन की वंशागति का अध्ययन करने के लिए लंबा (T) और बौना (t) मटर के पौधों का संकरण किया। F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबे पाए गए, जिससे पता चला कि लंबा लक्षण प्रभावी है। F₁ के पौधों को स्वयं परागित करने पर F₂ पीढ़ी में 3:1 के अनुपात में लंबे और बौने पौधे प्राप्त हुए। इस प्रयोग से मेंडल ने प्रभाविता नियम और विसंयोजन नियम की व्याख्या की। प्रभाविता नियम के अनुसार यदि जीन के दो अलील असमान हों तो एक अलील प्रभावी होता है और दूसरा अप्रभावी। विसंयोजन नियम के अनुसार जीन के जोड़े अर्धसूत्रण (मीओसिस) के दौरान अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में केवल एक ही जीन जाता है। इस प्रकार विषमयुग्मजी जीव दो प्रकार के युग्मक उत्पन्न करते हैं। मेंडल ने पनेट वर्ग का उपयोग कर जीनोटाइप और फीनोटाइप के अनुपातों को समझाया। इसके अतिरिक्त परीक्षार्थ संकरण की विधि से जीनोटाइप का निर्धारण किया जा सकता है।
- लंबा (T) लक्षण प्रभावी और बौना (t) अप्रभावी है।
- F₁ में सभी पौधे लंबे होते हैं।
- F₂ में लंबे और बौने पौधे 3:1 अनुपात में होते हैं।
- प्रभाविता नियम: एक अलील प्रभावी और दूसरा अप्रभावी होता है।
- विसंयोजन नियम: अलील जोड़े अर्धसूत्रण में अलग हो जाते हैं।
- पनेट वर्ग से जीनोटाइप और फीनोटाइप का विश्लेषण किया जाता है।
- 📌 प्रभाविता नियम: प्रभावी और अप्रभावी अलील की अवधारणा।
- 📌 विसंयोजन नियम: अलील का अर्धसूत्रण में अलग होना।
- 📌 पनेट वर्ग: जीनोटाइप संभावनाओं का वर्गीकरण।
4.2.1 प्रभाविता नियम (ला ऑफ डोमिनेंस)
अवधारणा4.2.1 प्रभाविता नियम (ला ऑफ डोमिनेंस)
प्रभाविता नियम मेंडल द्वारा प्रस्तावित पहला नियम है जो बताता है कि लक्षणों का निर्धारण कारकों (जीनों) द्वारा होता है जो जोड़ों में पाए जाते हैं। यदि कारक जोड़ों के दो सदस्य असमान हों तो उनमें से एक का प्रभाव दूसरे पर होता है। इसका अर्थ है कि विषमयुग्
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.मेंडल द्वारा प्रयोगों के लिए मटर के पौधे चुनने से क्या लाभ हुए?
उत्तर:
मेंडल ने मटर के पौधे इसलिए चुने क्योंकि मटर के पौधों में स्पष्ट और भेद करने योग्य लक्षण होते हैं, जो आसानी से वर्गीकृत किए जा सकते हैं। इसके अलावा, मटर के पौधों का संकरण करना सरल था, उनकी वृद्धि चक्र छोटी थी, और वे स्व-परागण करते थे जिससे शुद्ध जाति बनाए रखना संभव था। ये सभी कारणों से मटर के पौधे आनुवंशिकी के अध्ययन के लिए उपयुक्त थे।
व्याख्या:
मटर के पौधों के स्पष्ट लक्षण, स्व-परागण की क्षमता, और संकरण में आसानी के कारण मेंडल ने इन्हें प्रयोग के लिए चुना। इससे उन्होंने आनुवंशिक नियमों की खोज की।
Q2.निम्न में भेद करो — - (क) प्रभाविता और अप्रभाविता - (ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी - (ग) एकसंकर और द्विसंकर।
उत्तर:
(क) प्रभाविता और अप्रभाविता: प्रभाविता (Expressivity) का अर्थ है कि एक जीन अपने लक्षण को कितनी मात्रा में व्यक्त करता है, अर्थात लक्षण की तीव्रता। अप्रभाविता (Penetrance) का अर्थ है कि जीन अपने लक्षण को व्यक्त करता है या नहीं, अर्थात जीन का सक्रिय होना या निष्क्रिय रहना। (ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी: समयुग्मजी (Homozygous) वह जीव होता है जिसके दोनों जीन एक जैसे (समान) होते हैं, जैसे AA या aa। विषमयुग्मजी (Heterozygous) वह जीव होता है जिसके दोनों जीन भिन्न होते हैं, जैसे Aa। (ग) एकसंकर और द्विसंकर: एकसंकर (Monohybrid) संकरण में केवल एक लक्षण या जीन स्थल पर विचार किया जाता है। द्विसंकर (Dihybrid) संकरण में दो लक्षणों या दो जीन स्थलों पर विचार किया जाता है।
व्याख्या:
प्रत्येक जोड़ी के बीच स्पष्ट अंतर समझाया गया है, जो आनुवंशिकी के मूलभूत सिद्धांत हैं।
Q3.कोई द्विगुणित जीन 6 स्थलों के लिए विषमयुग्मजी हैं, कितने प्रकार के युग्मकों का उत्पादन संभव है?
उत्तर:
यदि कोई जीव विषमयुग्मजी है और उसके 6 जीन स्थल हैं, तो प्रत्येक जीन स्थल के लिए दो प्रकार के अलील होते हैं। विषमयुग्मजी होने पर प्रत्येक स्थल से दो प्रकार के युग्मक बन सकते हैं। युग्मकों की संख्या = 2^n = 2^6 = 64 अतः 6 स्थलों के लिए 64 प्रकार के युग्मक उत्पन्न हो सकते हैं।
व्याख्या:
विषमयुग्मजी होने पर प्रत्येक जीन स्थल से दो प्रकार के युग्मक बनते हैं, इसलिए कुल युग्मकों की संख्या 2 की स्थलों की संख्या की घात होती है।
Q4.एकसंकर क्रॉस का प्रयोग करते हुए, प्रभाविता नियम की व्याख्या करो।
उत्तर:
प्रभाविता नियम (Law of Dominance) के अनुसार, जब दो शुद्ध जाति वाले जीवों का संकरण किया जाता है, जो किसी लक्षण के लिए विपरीत गुण रखते हैं, तो प्रथम पीढ़ी (F₁) में केवल एक लक्षण प्रकट होता है जिसे प्रभावी (Dominant) कहा जाता है, जबकि दूसरा लक्षण अप्रभावी (Recessive) रहता है। उदाहरण के लिए, मटर के पौधों में पीले बीज (Y) प्रभावी और हरे बीज (y) अप्रभावी हैं। यदि शुद्ध पीले बीज वाले (YY) और शुद्ध हरे बीज वाले (yy) पौधों का क्रॉस किया जाए, तो F₁ पीढ़ी के सभी पौधे Yy होंगे और पीले बीज वाले होंगे। इस प्रकार, प्रभाविता नियम यह बताता है कि प्रभावी जीन अप्रभावी जीन पर हावी रहता है।
व्याख्या:
एकसंकर क्रॉस में प्रभाविता नियम को समझाने के लिए शुद्ध जाति वाले विपरीत लक्षणों वाले पौधों का संकरण किया जाता है और F₁ पीढ़ी में केवल प्रभावी लक्षण प्रकट होता है।
Q5.परीक्षार्थ संकरण की परिभाषा लिखो और चित्र बनाओ।
उत्तर:
परीक्षार्थ संकरण (Test Cross) वह संकरण होता है जिसमें किसी जीव का जीनोटाइप ज्ञात करने के लिए उसे अप्रभावी (हॉमोज़ाइगस रिसेसिव) जीव के साथ संकरण किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि वह जीव प्रभावी जीन के लिए हॉमोज़ाइगस है या हेटेरोज़ाइगस। उदाहरण: यदि किसी पौधे का पीला बीज (प्रभावी) जीनोटाइप ज्ञात करना हो, तो उसे हरे बीज (yy) के साथ क्रॉस किया जाता है। यदि सभी संतति पीले बीज के हों, तो जीनोटाइप YY है; यदि पीले और हरे दोनों प्रकार के बीज आएं, तो जीनोटाइप Yy है। चित्र में: - माता-पिता: Y? × yy - संभावित संतति: Yy (पीला), yy (हरा) (यहाँ चित्र में पनेट वर्ग का उपयोग किया जाता है।)
व्याख्या:
परीक्षार्थ संकरण से जीनोटाइप का पता चलता है। अप्रभावी जीन के साथ क्रॉस करके संतति के लक्षणों से जीनोटाइप का निर्धारण किया जाता है।
Q6.एक ही जीन स्थल वाले समयुग्मजी मादा और विषमयुग्मजी नर के संकरण से प्राप्त प्रथम संतति पीढ़ी के फीनोटाइप वितरण का पनेट वर्ग बनाकर प्रदर्शन करो।
उत्तर:
मान लें कि जीन स्थल A है। मादा समयुग्मजी है (AA) और नर विषमयुग्मजी है (Aa)। पनेट वर्ग: मादा (AA) × नर (Aa) संभावित युग्मक: मादा से: A नर से: A या a पनेट वर्ग: | | A (नर) | a (नर) | |-------|---------|---------| | A (मादा) | AA | Aa | | A (मादा) | AA | Aa | फीनोटाइप वितरण: - AA: प्रभावी लक्षण - Aa: प्रभावी लक्षण इसलिए, सभी संतति में प्रभावी लक्षण प्रकट होगा।
व्याख्या:
समयुग्मजी मादा से केवल एक प्रकार का युग्मक (A) और विषमयुग्मजी नर से दो प्रकार के युग्मक (A और a) निकलते हैं। पनेट वर्ग से फीनोटाइप का वितरण ज्ञात होता है।
Q7.पीले बीज वाले लंबे पौधों (Yy Tt) का संकरण हरे बीज वाले लंबे (yy Tt) पौधे से करने पर निम्न में से किस प्रकार के फीनोटाइप संतति की आशा की जा सकती है - (क) लंबे-हरे - (ख) बौने हरे।
उत्तर:
दी गई जीनोटाइप: - पीले बीज वाले लंबे पौधे: Yy Tt - हरे बीज वाले लंबे पौधे: yy Tt यहाँ, Y = पीला बीज (प्रभावी), y = हरा बीज (अप्रभावी) T = लंबा पौधा (प्रभावी), t = बौना पौधा (अप्रभावी) संकरण: Yy Tt × yy Tt युग्मक: - Yy Tt से युग्मक: YT, Yt, yT, yt - yy Tt से युग्मक: yT, yt पनेट वर्ग बनाकर संभावित फीनोटाइप: | | yT | yt | |-------|----|----| | YT | Yy TT (पीला, लंबा) | Yy Tt (पीला, लंबा) | | Yt | Yy Tt (पीला, लंबा) | Yy tt (पीला, बौना) | | yT | yy TT (हरा, लंबा) | yy Tt (हरा, लंबा) | | yt | yy Tt (हरा, लंबा) | yy tt (हरा, बौना) | फीनोटाइप की संख्या: - लंबे-हरे (yy TT या yy Tt): संभव - बौने हरे (yy tt): संभव अतः दोनों प्रकार के फीनोटाइप संतति में आ सकते हैं।
व्याख्या:
संकरण के लिए पनेट वर्ग बनाकर फीनोटाइप का निर्धारण किया गया है। दोनों फीनोटाइप (लंबे-हरे और बौने-हरे) संतति में आ सकते हैं।
Q8.दो विषमयुग्मजी जनकों का क्रॉस σ और θ किया गया। मान लें दो स्थल (loci) सहलग्न है, तो द्विसंकर क्रॉस में F₁ पीढ़ी के फीनोटाइप के लक्षणों को वितरण क्या होगा?
उत्तर:
यदि दो विषमयुग्मजी जनक (AaBb × AaBb) का क्रॉस किया जाता है और दो जीन स्थल सहलग्न (linked) होते हैं, तो क्रॉस में पुनर्संयोजन की संभावना कम होती है। सहलग्न जीनों के कारण, अभिभावकों के जीन संयोजन संतति में अधिकतर उसी रूप में मिलेंगे। F₁ पीढ़ी में फीनोटाइप वितरण: - अभिभावक जैसे संयोजन (σ और θ) अधिक मात्रा में होंगे। - पुनर्संयोजित संयोजन कम मात्रा में होंगे। यदि पुनर्संयोजन दर r है, तो अभिभावक संयोजन की आवृत्ति (1 - r)/2 और पुनर्संयोजित संयोजन की आवृत्ति r/2 होगी। इस प्रकार, सहलग्न जीनों के कारण फीनोटाइप वितरण में अभिभावक संयोजन अधिक और पुनर्संयोजित संयोजन कम होंगे।
व्याख्या:
सहलग्न जीनों के कारण क्रॉस में पुनर्संयोजन कम होता है, जिससे अभिभावक जीन संयोजन संतति में अधिक मात्रा में मिलते हैं।