मानव जनन | Class 12 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

मानव जनन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मानव जनन from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
2.4 आर्तव चक्र
आर्तव चक्र (मेन्सट्रुअल साइकिल) मादा प्राइमेटों में होने वाला एक चक्रीय जनन चक्र है, जिसकी अवधि लगभग 28-29 दिन होती है। यह चक्र यौवनारंभ पर शुरू होता है और मासिक धर्म (रजोधर्म) के रूप में प्रकट होता है। आर्तव चक्र की शुरुआत आर्तव प्रावस्था से होती है, जिसमें गर्भाशय की अंतःस्तर परत का क्षय होता है और रक्तस्राव होता है जो 3-5 दिनों तक रहता है। यदि अंडाणु निषेचित नहीं होता है तो मासिक धर्म आता है।
आर्तव प्रावस्था के बाद पुटकीय प्रावस्था आती है, जिसमें प्राथमिक पुटक का विकास होता है और गर्भाशय की अंतःस्तर परत पुनः विकसित होती है। इस दौरान पीयूष ग्रंथि और अंडाशयी हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) का स्तर बदलता रहता है।
आर्तव चक्र के मध्य में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) और फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) का स्तर उच्चतम होता है, जिसे एलएच सज्ज कहा जाता है, जो अंडोत्सर्ग (ओवुलेशन) को प्रेरित करता है। अंडोत्सर्ग के बाद ग्राफी पुटक का शेष भाग पीत पिंड (कॉर्पस ल्युटियम) में परिवर्तित हो जाता है, जो प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है। प्रोजेस्टेरोन गर्भाशय की अंतःस्तर परत को बनाए रखता है ताकि निषेचित अंडाणु का अंतरोपण हो सके।
यदि निषेचन नहीं होता है तो पीत पिंड का क्षय होता है और अंतःस्तर परत टूट जाती है, जिससे नया मासिक धर्म शुरू होता है। यह चक्र लगभग 50 वर्ष की आयु तक चलता है, जिसके बाद रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) होती है। आर्तव चक्र के दौरान स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, जिसमें नियमित स्नान, साफ सैनिटरी नेपकिन का उपयोग और उचित निपटान शामिल हैं।
📊 Diagram: चित्र 2.9 आर्तव चक्र के दौरान विभिन्न घटनाओं का आरेखीय निरूपण।
🧪 Activity: आर्तव चक्र के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन स्नान करना, साफ सैनिटरी नेपकिन या कपड़े के पैड का उपयोग करना और आवश्यकतानुसार हर 4-5 घंटे में पैड बदलना।
🔗 Connection: अगले अनुभाग में निषेचन और अंतर्रोपण की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मानव पुरुष जनन तंत्र में कौन-कौन से मुख्य अंग शामिल होते हैं?
वृषण, सहायक नलिकाएँ, ग्रंथियाँ और शिश्न
वृषण में लगभग कितनी वृषण पालिकाएँ होती हैं, जिनमें शुक्रजनक नलिकाएँ पाई जाती हैं?
लगभग 250
शुक्राणु का निर्माण किस प्रकार की कोशिकीय विभाजन प्रक्रिया द्वारा होता है?
अर्धसूत्री विभाजन
सटौली कोशिकाओं की मुख्य भूमिका क्या है?
जर्म कोशिकाओं को पोषण देना
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