Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
मानव जनन
अवधारणामानव जनन
मानव एक लैंगिक रूप से जनन करने वाला और सजीवप्रजक (जरायुज) प्राणी है। मानव जनन की प्रक्रिया में पुरुष और स्त्री दोनों के युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) का निर्माण, उनके संलयन (निषेचन), गर्भधारण, भ्रूण का विकास और अंत में शिशु का जन्म शामिल होता है। यह प्रक्रिया यौवनारंभ के पश्चात् शुरू होती है। पुरुष में शुक्राणु बनते हैं जबकि स्त्री में अंडाणु। निषेचन के पश्चात् युग्मनज (जाइगोट) बनता है जो गर्भाशय की दीवार से चिपक जाता है (अंतर्रापण) और भ्रूण का विकास प्रारंभ होता है। मानव जनन तंत्र में अनेक अंग और ग्रंथियाँ सम्मिलित होती हैं जो इस प्रक्रिया को नियंत्रित और संचालित करती हैं। पुरुष और स्त्री दोनों के जनन तंत्रों की संरचना और कार्यों को समझना आवश्यक है ताकि मानव जनन की संपूर्ण प्रक्रिया का ज्ञान प्राप्त हो सके।
- मानव लैंगिक रूप से जनन करने वाला सजीवप्रजक प्राणी है।
- पुरुष में शुक्राणु और स्त्री में अंडाणु बनते हैं।
- निषेचन के बाद युग्मनज बनता है जो गर्भाशय की दीवार से चिपक जाता है।
- गर्भधारण के दौरान भ्रूण का विकास होता है।
- मानव जनन तंत्र में अनेक अंग और ग्रंथियाँ शामिल होती हैं।
- 📌 युग्मकजनन: पुरुष और स्त्री के युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) का निर्माण।
- 📌 निषेचन: शुक्राणु और अंडाणु का संलयन।
- 📌 अंतर्रापण: कोरकपुटी का गर्भाशय की दीवार से चिपकना।
2.1 पुरुष जनन तंत्र
व्याख्या2.1 पुरुष जनन तंत्र
पुरुष जनन तंत्र शरीर के श्रोणि क्षेत्र में स्थित होता है। इसमें एक जोड़ा वृषण, सहायक नलिकाएँ, ग्रंथियाँ और बाह्य जननेंद्रिय शामिल होते हैं। वृषण उदर गुहा के बाहर वृषणकोष नामक थैली में स्थित होते हैं, जो शरीर के तापमान से लगभग 2-2.5 डिग्री कम तापमान बनाए रखता है, जो शुक्राणुजनन के लिए आवश्यक है। प्रत्येक वृषण लगभग 4-5 सेमी लंबा और 2-3 सेमी चौड़ा होता है। वृषण में लगभग 250 वृषण पालिका (टेस्टिकुलर लोब्युल्स) होते हैं, जिनमें 1-3 अति कुंडलित शुक्रजनक नलिकाएँ (सेमिनिफेरस ट्यूबुल्स) होती हैं। इन नलिकाओं की भीतरी सतह नर जर्म कोशिकाओं (स्पर्मेटोगोनिया) और सटौली कोशिकाओं से बनी होती है। नर जर्म कोशिकाएँ अर्धसूत्री विभाजन के माध्यम से शुक्राणु बनाती हैं जबकि सटौली कोशिकाएँ उन्हें पोषण प्रदान करती हैं। वृषण के अंतराली अवकाश में लीडिंग कोशिकाएँ (इंटरस्टीशियल सेल्स) होती हैं जो एंड्रोजन हार्मोन (पुंजन) का संश्लेषण करती हैं। पुरुष लिंग की सहायक नलिकाओं में वृषण जालिका, शुक्रवाहिकाएँ, अधिवृषण और शुक्रवाहक शामिल हैं। ये नलिकाएँ शुक्राणुओं को संग्रहित, परिपक्व और मूत्रमार्ग की ओर स्थानांतरित करती हैं। मूत्रमार्ग मूत्राशय से होकर शिश्न के माध्यम से बाहर खुलता है। शिश्न पुरुष का बाह्य जननेंद्रिय है, जो इरेक्शन और वीर्यसेचन में सहायक होता है। इसके अंतर्गत शिश्न मुंड और अग्रच्छद शामिल हैं। पुरुष की सहायक ग्रंथियों में एक जोड़ा शुक्राशय, एक पुरस्थ (प्रोस्टेट) ग्रंथि और एक जोड़ा बल्वोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ होती हैं। ये ग्रंथियाँ शुक्राणुओं के साथ शुक्रीय प्लाज्मा का स्राव करती हैं, जिसमें फ्रुक्टोज, कैल्शियम और एंजाइम्स होते हैं। बल्वोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ मैथुन के दौरान शिश्न में स्नेहन प्रदान करती हैं। वृषण हार्मोन (एंड्रोजन) इन सभी अंगों के कार्य को नियंत्रित करता है।
- पुरुष जनन तंत्र श्रोणि क्षेत्र में स्थित है।
- वृषण वृषणकोष में स्थित होते हैं जो तापमान कम रखता है।
- प्रत्येक वृषण में लगभग 250 वृषण पालिका होती हैं।
- शुक्राणु शुक्रजनक नलिकाओं में बनते हैं।
- लीडिंग कोशिकाएँ एंड्रोजन हार्मोन का स्राव करती हैं।
- शिश्न वीर्यसेचन और इरेक्शन में सहायक होता है।
- शुक्राशय, प्रोस्टेट और बल्वोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ शुक्राणु के साथ शुक्रीय प्लाज्मा बनाती हैं।
- 📌 वृषण: पुरुष के प्राथमिक जनन अंग जहाँ शुक्राणु बनते हैं।
- 📌 शुक्रजनक नलिका: वृषण के अंदर स्थित नलिकाएँ जहाँ शुक्राणु बनते हैं।
- 📌 लीडिंग कोशिका: वृषण की अंतराली कोशिकाएँ जो एंड्रोजन हार्मोन बनाती हैं।
2.2 स्त्री जनन तंत्र
व्याख्या2.2 स्त्री जनन तंत्र
स्त्री जनन तंत्र में एक जोड़ा अंडाशय, एक जोड़ा अंडवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, योनि और बाह्य जननेंद्रिय शामिल होते हैं। ये सभी अंग श्रोणि क्षेत्र में स्थित होते हैं। इसके अतिरिक्त स्तन ग्रंथियाँ भी स्त्री जनन तंत्र का हिस्सा हैं जो शिशु के पोषण म
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें: (क) मानव ... उत्पत्ति वाला है। (अलैंगिक/लैंगिक) (ख) मानव ... हैं। (अंडप्रजक, सजीवप्रजक, अंडजरायुज) (ग) मानव में ... निषेचन होता है। (बाह्य / आंतरिक) (घ) नर एवं मादा युग्मक ... होते हैं। (अगुणित / द्विगुणित) (ङ) युग्मनज ... होता है। (अगुणित / द्विगुणित) (च) एक परिपक्व पुटक से अंडाणु (ओवम) के मोचित होने की प्रक्रिया को ... कहते हैं। (छ) अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) ... नामक हॉर्मोन द्वारा प्रेरित (इनड्यूस्ड) होता है। (ज) नर एवं स्त्री के युग्मक के संलयन (फ्यूजन) को ... कहते हैं। (झ) निषेचन ... में संपन्न होता है। (ञ) युग्मनज विभक्त होकर ... की रचना करता है जो गर्भाशय में अंतरोपित (इंप्लांटेड) होता है। (ट) भ्रूण और गर्भाशय के बीच संवहनी संपर्क बनाने वाली संरचना को ... कहते हैं।
उत्तर:
(क) मानव लैंगिक उत्पत्ति वाला है। (ख) मानव सजीवप्रजक हैं। (ग) मानव में आंतरिक निषेचन होता है। (घ) नर एवं मादा युग्मक द्विगुणित होते हैं। (ङ) युग्मनज अगुणित होता है। (च) एक परिपक्व पुटक से अंडाणु (ओवम) के मोचित होने की प्रक्रिया को अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) कहते हैं। (छ) अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) नामक हॉर्मोन द्वारा प्रेरित होता है। (ज) नर एवं स्त्री के युग्मक के संलयन (फ्यूजन) को निषेचन कहते हैं। (झ) निषेचन आंतरिक में संपन्न होता है। (ञ) युग्मनज विभक्त होकर भ्रूण की रचना करता है जो गर्भाशय में अंतरोपित (इंप्लांटेड) होता है। (ट) भ्रूण और गर्भाशय के बीच संवहनी संपर्क बनाने वाली संरचना को प्लेसेंटा कहते हैं।
व्याख्या:
प्रत्येक रिक्त स्थान में सही शब्द भरने के लिए मानव जनन तंत्र की मूलभूत जानकारी का उपयोग किया गया है। मानव लैंगिक प्रजनन करता है, इसलिए (क) में 'लैंगिक' होगा। मानव सजीवप्रजक हैं क्योंकि वे जीवित शिशु उत्पन्न करते हैं। निषेचन आंतरिक होता है क्योंकि युग्मक शरीर के अंदर मिलते हैं। नर और मादा युग्मक द्विगुणित (2n) होते हैं, जबकि युग्मनज अगुणित (n) होता है। अंडोत्सर्ग वह प्रक्रिया है जिसमें अंडाणु पुटक से मुक्त होता है। यह LH हार्मोन द्वारा प्रेरित होता है। नर और स्त्री के युग्मक के संलयन को निषेचन कहते हैं। निषेचन आंतरिक होता है। युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण बनाता है जो गर्भाशय में अंतरोपित होता है। भ्रूण और गर्भाशय के बीच संवहनी संपर्क प्लेसेंटा कहलाता है।
Q2.2. पुरुष जनन-तंत्र का एक नामांकित आरेख बनाएँ।
उत्तर:
पुरुष जनन-तंत्र का नामांकित आरेख बनाएं जिसमें प्रमुख भाग जैसे वृषण, शुक्राणु नलिका, वीर्यवाहिनी नलिका, मूत्रमार्ग, लिंग आदि स्पष्ट रूप से अंकित हों।
व्याख्या:
इस प्रश्न में छात्र को पुरुष जनन तंत्र के अंगों की पहचान और उनका आरेख बनाना होता है। आरेख में वृषण (testes), शुक्राणु नलिका (vas deferens), मूत्रमार्ग (urethra), लिंग (penis), और सहायक ग्रंथियाँ जैसे प्रोस्टेट ग्रंथि आदि को सही स्थान पर अंकित करना आवश्यक है।
Q3.3. स्त्री जनन-तंत्र का एक नामांकित आरेख बनाएँ।
उत्तर:
स्त्री जनन-तंत्र का नामांकित आरेख बनाएं जिसमें अंडाशय, गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब, योनि आदि प्रमुख भाग स्पष्ट रूप से अंकित हों।
व्याख्या:
इस प्रश्न में छात्र को स्त्री जनन तंत्र के अंगों की पहचान और उनका आरेख बनाना होता है। आरेख में अंडाशय (ovaries), फैलोपियन ट्यूब (fallopian tubes), गर्भाशय (uterus), योनि (vagina) आदि को सही स्थान पर अंकित करना आवश्यक है।
Q4.4. वृषण तथा अंडाशय के बारे में प्रत्येक के दो-दो प्रमुख कार्यों का वर्णन करें।
उत्तर:
वृषण के कार्य: 1. शुक्राणु (स्पर्म) का निर्माण। 2. पुरुष हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन) का स्राव। अंडाशय के कार्य: 1. अंडाणु (ओवम) का निर्माण। 2. महिला हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) का स्राव।
व्याख्या:
वृषण पुरुष जनन तंत्र का प्रमुख अंग है जो शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण करता है। अंडाशय स्त्री जनन तंत्र का अंग है जो अंडाणु बनाता है और महिला हार्मोन एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन स्रावित करता है।
Q5.5. शुक्रजनक नलिका की संरचना का वर्णन करें।
उत्तर:
शुक्रजनक नलिका (Vas deferens) एक पतली, मांसपेशीय नली होती है जो वृषण से वीर्यवाहिनी नलिका तक शुक्राणु को ले जाती है। इसकी दीवार में मांसपेशीय परत होती है जो संकुचन के द्वारा शुक्राणु को आगे बढ़ाती है।
व्याख्या:
शुक्रजनक नलिका वृषण से वीर्यवाहिनी नलिका तक शुक्राणु को ले जाने का मार्ग है। इसकी मांसपेशीय परत संकुचन कर शुक्राणु को मूत्रमार्ग की ओर धकेलती है।
Q6.6. शुक्राणुजनन क्या है? संक्षेप में शुक्राणुजनन की प्रक्रिया का वर्णन करें।
उत्तर:
शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) वह प्रक्रिया है जिसमें वृषण के शुक्राणुजनन नलिकाओं में शुक्राणु का निर्माण होता है। इसमें प्रारंभिक शुक्राणुजनन कोशिकाएँ (स्पर्माटोगोनिया) विभाजित होकर प्राथमिक स्पर्माटोसाइट बनाती हैं, जो मियोसिस से गुजरकर द्वितीयक स्पर्माटोसाइट और फिर स्पर्माटिड्स बनाती हैं। स्पर्माटिड्स विकसित होकर परिपक्व शुक्राणु बन जाते हैं।
व्याख्या:
शुक्राणुजनन वृषण की शुक्राणुजनन नलिकाओं में होता है। यह मियोसिस और कोशिका विभाजन की श्रृंखला है जिसमें स्पर्माटोगोनिया से परिपक्व शुक्राणु बनते हैं। यह प्रक्रिया पुरुषों में यौवन के बाद शुरू होती है और जीवन भर चलती रहती है।
Q7.7. शुक्राणुजनन की प्रक्रिया के नियमन में शामिल हॉर्मोनों के नाम बताएँ?
उत्तर:
शुक्राणुजनन के नियमन में मुख्यतः निम्नलिखित हॉर्मोन शामिल होते हैं: 1. फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) 2. ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) 3. टेस्टोस्टेरोन
व्याख्या:
FSH शुक्राणुजनन नलिकाओं को सक्रिय करता है। LH लेडिग कोशिकाओं को टेस्टोस्टेरोन स्रावित करने के लिए प्रेरित करता है। टेस्टोस्टेरोन शुक्राणुजनन और पुरुष लक्षणों के विकास के लिए आवश्यक है।
Q8.8. शुक्राणुजनन एवं वीर्यसेचन (स्पर्मयेशन) की परिभाषा लिखें।
उत्तर:
शुक्राणुजनन: वृषण में शुक्राणु का निर्माण। वीर्यसेचन (स्पर्मयेशन): परिपक्व शुक्राणु का मूत्रमार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर निकलना।
व्याख्या:
शुक्राणुजनन वह प्रक्रिया है जिसमें वृषण में शुक्राणु बनते हैं। वीर्यसेचन वह प्रक्रिया है जिसमें परिपक्व शुक्राणु वीर्य के साथ मूत्रमार्ग से बाहर निकलते हैं।