Biologyकक्षा 12पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजननहिंदी

पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन | Class 12 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन | Class 12 Biology Notes

पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन from Class 12 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

1.2.3 परागण

परागण वह प्रक्रिया है जिसमें परागकण पुंकेसर के परागकोश से झाड़कर स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। परागण के बिना निषेचन संभव नहीं क्योंकि परागकण और भ्रूणकोष दोनों अचल होते हैं। परागण के तीन प्रकार होते हैं:

(क) स्वयुग्मन (ओटोगैमी): एक ही पुष्प के परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण। यह दुर्लभ होता है क्योंकि इसके लिए परागकोश और वर्तिकाग्र का समकालिक और निकट होना आवश्यक है।

(ख) सजातपुष्पी परागण: एक ही पादप के एक पुष्प के परागकण दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं।

(ग) परनिषेचन (परपरागण): भिन्न पादपों के परागकणों का स्थानांतरण होता है, जिससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है।

परागण के अभिकर्मक (एजेंट) अजीवीय (वायु, जल) और जीवित (कीट, पक्षी, चमगादड़ आदि) होते हैं। वायु द्वारा परागण में हल्के, चिपचिपाहट रहित परागकण होते हैं जो हवा में उड़ सकते हैं। जल द्वारा परागण दुर्लभ है और कुछ जलीय पौधों में पाया जाता है। जीवित अभिकर्मक में मधुमक्खी, तितली, चींटी, पक्षी आदि शामिल हैं।

पुष्प स्व-परागण को रोकने के लिए विभिन्न युक्तियाँ विकसित करते हैं जैसे पराग अवमुक्ति और वर्तिकाग्र की असमयता, परागकोश और वर्तिकाग्र का भिन्न स्थान, स्व-असामंजस्य, और एकलिंगीय पुष्पों का उत्पादन।

पराग-स्त्रीकेसर संकर्षण के अंतर्गत परागकण की पहचान और स्वीकार्यता होती है। यदि परागकण सुयोग्य होता है तो वह वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर पराग नलिका बनाता है जो अंडाशय में बीजांड तक पहुँचती है।

📊 Diagram: चित्र 1.9 (अ) स्वपरागित पुष्प (ब) परपरागित पुष्प (स) अनुन्मील्य परागणी पुष्प; चित्र 1.10 वायु परागित पादप संघनित पुष्पक्रम तथा स्पष्ट अनावृत पुंकेसर को दर्शाते हुए; चित्र 1.11 (अ) बैलिसनेरिया में जल द्वारा परागण (ब) कीट परागण; चित्र 1.12 (अ) परागकणों का वर्तिकाग्र पर अंकुरण (ब) वर्तिका में पराग नलिकाओं की वृद्धि (स) स्त्रीकेसर के अनुप्रस्थ काट में पराग नलिका की वृद्धि

🧪 Activity: काँच की स्लाइड पर जल शर्करा घोल की बूंद डालकर मटर, चना, क्रोटालेरिया आदि के परागकण छिड़कें और सूक्ष्मदर्शी से पराग नलिका की वृद्धि देखें।

🔗 Connection: यह अनुभाग परागण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाता है, जो अगले अनुभाग में दोहरे निषेचन की अनूठी घटना के अध्ययन के लिए आधार बनता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गन्ने और अदरक जैसे पौधों के नोड से वनस्पित प्रसार की उपिस्थित मुख्य रूप से है?

नोड्स में मेिरस्टेमेिटक कोिशकाएँ होती हैं

चावल के पौधे के नर युग्मक के नािभक में 12 गुणसूत्र होते हैं। मादा युग्मक, युग्मनज और अंकु र की कोिशकाओ ं में गुणसूत्र संख्या क्रमशः होगी,

12,24,24

1. एक आवृत्तबीजी पुष्प के उन अंगों के नाम बताएँ; जहाँ नर एवं मादा युग्मकोद्भिद का विकास होता है?

आवृत्तबीजी पुष्प में नर युग्मकोद्भिद का विकास परागकोष में होता है, जबकि मादा युग्मकोद्भिद का विकास अंडाशय में होता है। नर युग्मकोद्भिद परागकण के भीतर परागमातृ कोशिका से विकसित होता है। मादा युग्मकोद्भिद अंडाणु के भीतर अंडाणु कोशिका से विकसित होता है।

2. लघुबीजाणुधानी तथा गुरूबीजाणुधानी के बीच अंतर स्पष्ट करें? इन घटनाओं के दौरान किस प्रकार का कोशिका विभाजन संपन्न होता है? इन दोनों घटनाओं के अंत में बनने वाली संरचनाओं के नाम बताएँ?

लघुबीजाणुधानी वह संरचना है जिसमें लघुबीजाणु (नर युग्मकोशिका) विकसित होता है, जबकि गुरूबीजाणुधानी वह संरचना है जिसमें गुरूबीजाणु (मादा युग्मकोशिका) विकसित होता है। दोनों घटनाओं के दौरान माइटोसिस (कोशिका विभाजन) होता है। लघुबीजाणुधानी के अंत में परागकोशिका और परागकण बनते हैं, जबकि गुरूबीजाणुधानी के अंत में अंडाणु और युग्मकोद्भिद बनते हैं।

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