Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
1.1 पुष्प-आवृतबीजियों का एक आकर्षक अंग
व्याख्या1.1 पुष्प-आवृतबीजियों का एक आकर्षक अंग
पुष्प आवृतबीजियों में लैंगिक प्रजनन का मुख्य अंग होता है। पुष्प न केवल प्रजनन का स्थल है, बल्कि इसका सौंदर्य, रंग, गंध और आकृति भी प्रजनन में सहायक होते हैं। मानव जीवन में पुष्पों का आभूषणात्मक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है। पुष्पों के माध्यम से मानव अपनी भावनाओं जैसे प्रेम, अनुराग, प्रसन्नता, विषाद आदि को व्यक्त करता है। पुष्पों की खेती को फ्लोरीकल्चर या पुष्पकृषि कहा जाता है, जो एक महत्वपूर्ण कृषि व्यवसाय है। पुष्प में नर और मादा जनन अंग होते हैं। नर जनन अंग पुंकेसर कहलाते हैं जिनमें परागकोश होते हैं, जबकि मादा जनन अंग स्त्रीकेसर कहलाता है जिसमें जायांग होता है। पुष्प की संरचना में विभिन्न अंग होते हैं जो प्रजनन के लिए अनुकूलित होते हैं। पुष्प के दो मुख्य अंग पुंकेसर और स्त्रीकेसर लैंगिक प्रजनन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- पुष्प आवृतबीजियों में लैंगिक प्रजनन का मुख्य अंग है।
- पुष्प का सौंदर्य, रंग, गंध प्रजनन में सहायक होते हैं।
- नर जनन अंग पुंकेसर और मादा जनन अंग स्त्रीकेसर होते हैं।
- फ्लोरीकल्चर पुष्पों की खेती का व्यवसाय है।
- पुष्प मानव जीवन में सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।
- 📌 पुष्प: आवृतबीजियों में लैंगिक प्रजनन का मुख्य अंग।
- 📌 पुंकेसर: नर जनन अंग जिसमें परागकोश होते हैं।
- 📌 स्त्रीकेसर: मादा जनन अंग जिसमें जायांग होता है।
1.2 निषेचन-पूर्व-संरचनाएँ एवं घटनाएँ
व्याख्या1.2 निषेचन-पूर्व-संरचनाएँ एवं घटनाएँ
पुष्प के विकास से पहले ही हार्मोनल और संरचनात्मक परिवर्तन शुरू हो जाते हैं, जो पुष्पीय आद्यक (फ्लोरल प्राइमॉडियम) के मध्य विभेदन और विकास को प्रेरित करते हैं। पुष्पक्रम की रचना होती है, जो पुष्पी कलिकाएँ और बाद में पुष्प को धारण करती हैं। पुष्प में नर और मादा जनन संरचनाएँ विकसित होती हैं। नर जनन अंग पुंकेसर होते हैं जो परागकोशों से युक्त होते हैं। स्त्री जनन अंग स्त्रीकेसर कहलाता है जिसमें जायांग होता है। पुंकेसरों में परागकोश होते हैं जो द्विपालित और द्विकोष्ठी होते हैं। प्रत्येक परागकोश में चार लघुबीजाणुधानी होती हैं जो परागकणों का निर्माण करती हैं। परागकोश की संरचना में चार भित्तिपत होते हैं: बाह्यत्वचा (एपीडर्मीस), अंतस्थीसियम, मध्यपर्त और टेपीटम। टेपीटम विकासशील परागकणों को पोषण देता है। परागकोश के केंद्र में बीजाणुजन ऊतक होता है जो अर्धसूत्री विभाजन से लघुबीजाणु चतुष्टय बनाता है। प्रत्येक लघुबीजाणु से परागकण विकसित होता है जो नर युग्मक का प्रतिनिधित्व करता है। स्त्रीकेसर में तीन भाग होते हैं: वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय। अंडाशय में बीजांड होते हैं जिनमें गुरूबीजाणुधानी (बीजांडकाय) होती है। बीजांड में एक या अधिक भ्रूणकोष (गुरूबीजाणु से विकसित) होते हैं। भ्रूणकोष 8-न्यूक्लियेट और 7-कोशीय होता है जिसमें अंडकोशिका, सहाय कोशिकाएँ, निभागीय कोशिकाएँ और केंद्रीय कोशिका होती है।
- पुष्प विकास से पहले हार्मोनल और संरचनात्मक परिवर्तन होते हैं।
- पुंकेसर में परागकोश द्विपालित और द्विकोष्ठी होते हैं।
- परागकोश में चार लघुबीजाणुधानी होती हैं जो परागकण बनाती हैं।
- परागकण नर युग्मक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं।
- अंडाशय में बीजांड होते हैं जिनमें भ्रूणकोष विकसित होता है।
- 📌 फ्लोरल प्राइमॉडियम: पुष्पीय आद्यक जो पुष्प के विकास का प्रारंभ करता है।
- 📌 परागकोश: पुंकेसर का भाग जिसमें परागकण बनते हैं।
- 📌 लघुबीजाणुधानी: परागकोश के अंदर परागकण बनाने वाली संरचना।
1.2.3 परागण
व्याख्या1.2.3 परागण
परागण वह प्रक्रिया है जिसमें परागकण पुंकेसर के परागकोश से झाड़कर स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। परागण के बिना निषेचन संभव नहीं क्योंकि परागकण और भ्रूणकोष दोनों अचल होते हैं। परागण के तीन प्रकार होते हैं: (क) स्वयुग्मन (ओटोगैमी): एक ही पुष्
अभ्यास प्रश्न — Chapter 1
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.गन्ने और अदरक जैसे पौधों के नोड से वनस्पित प्रसार की उपिस्थित मुख्य रूप से है?
उत्तर:
नोड्स में मेिरस्टेमेिटक कोिशकाएँ होती हैं
व्याख्या:
[{"id": "0ea39d3f-c093-4416-48e2-11ba984e1c8c", "type": "html", "value": " (िवकल्प 2) गन्ने और अदरक जैसे पौधों के नोड् स से वानस्पितक प्रसार की उपिस्थित मुख्य रूप से है क्योंिक नोड्स में मेिरस्टेमेिटक कोिशकाएं होती ह।ैं वनस्पित प्रसार के उदाहरण: (i) ब्रायोिफलम की पत्ती की किलयां, (ii) आलू की आं खें, (iii) एगेव की बुलिबस, (iv) पानी की जलकुं भी, (v) अदरक का प्रकं द। "}]
Q2.चावल के पौधे के नर युग्मक के नािभक में 12 गुणसूत्र होते हैं। मादा युग्मक, युग्मनज और अंकु र की कोिशकाओ ं में गुणसूत्र संख्या क्रमशः होगी,
उत्तर:
12,24,24
Q3.1. एक आवृत्तबीजी पुष्प के उन अंगों के नाम बताएँ; जहाँ नर एवं मादा युग्मकोद्भिद का विकास होता है?
उत्तर:
आवृत्तबीजी पुष्प में नर युग्मकोद्भिद का विकास परागकोष में होता है, जबकि मादा युग्मकोद्भिद का विकास अंडाशय में होता है। नर युग्मकोद्भिद परागकण के भीतर परागमातृ कोशिका से विकसित होता है। मादा युग्मकोद्भिद अंडाणु के भीतर अंडाणु कोशिका से विकसित होता है।
व्याख्या:
आवृत्तबीजी पुष्पों में नर युग्मकोद्भिद परागकोष के अंदर परागकण में विकसित होता है। मादा युग्मकोद्भिद अंडाशय के अंदर अंडाणु कोशिका से विकसित होता है।
Q4.2. लघुबीजाणुधानी तथा गुरूबीजाणुधानी के बीच अंतर स्पष्ट करें? इन घटनाओं के दौरान किस प्रकार का कोशिका विभाजन संपन्न होता है? इन दोनों घटनाओं के अंत में बनने वाली संरचनाओं के नाम बताएँ?
उत्तर:
लघुबीजाणुधानी वह संरचना है जिसमें लघुबीजाणु (नर युग्मकोशिका) विकसित होता है, जबकि गुरूबीजाणुधानी वह संरचना है जिसमें गुरूबीजाणु (मादा युग्मकोशिका) विकसित होता है। दोनों घटनाओं के दौरान माइटोसिस (कोशिका विभाजन) होता है। लघुबीजाणुधानी के अंत में परागकोशिका और परागकण बनते हैं, जबकि गुरूबीजाणुधानी के अंत में अंडाणु और युग्मकोद्भिद बनते हैं।
व्याख्या:
लघुबीजाणुधानी में नर युग्मकोशिका का विकास होता है, गुरूबीजाणुधानी में मादा युग्मकोशिका का। दोनों में कोशिका विभाजन माइटोसिस द्वारा होता है। अंत में लघुबीजाणुधानी से परागकण, गुरूबीजाणुधानी से अंडाणु बनता है।
Q5.3. निम्नलिखित शब्दावलियों को सही विकासीय क्रम में व्यवस्थित करें— - परागकण, बीजाणुजन ऊतक, लघुबीजाणुचतुष्क, परागमातृ कोशिका, नर युग्मक
उत्तर:
सही विकासीय क्रम है: बीजाणुजन ऊतक → परागमातृ कोशिका → लघुबीजाणुचतुष्क → परागकण → नर युग्मक। व्याख्या: बीजाणुजन ऊतक से परागमातृ कोशिका बनती है, जो माइटोसिस से लघुबीजाणुचतुष्क बनाती है। ये विकसित होकर परागकण बनते हैं, जिनमें नर युग्मक (नर युग्मकोशिका) होता है।
व्याख्या:
विकास की प्रक्रिया में सबसे पहले बीजाणुजन ऊतक होता है, जो परागमातृ कोशिका बनाता है। यह कोशिका माइटोसिस से लघुबीजाणुचतुष्क बनाती है। ये चार लघुबीजाणु मिलकर परागकण बनाते हैं, जिनमें से एक नर युग्मक बनता है।
Q6.4. एक प्ररूपी आवृत्तबीजी बीजांड के भागों का विवरण दिखाते हुए एक स्पष्ट एवं साफ सुथरा नामांकित चित्र बनाएँ।
उत्तर:
प्ररूपी आवृत्तबीजी बीजांड के भाग हैं: परतावरण, बीजपत्र, भ्रूण, भ्रूणमंडल, भ्रूणकोष, और भ्रूणमंडल के चारों ओर भ्रूणकोष। चित्र में इन भागों को स्पष्ट रूप से नामांकित करें। चित्र में बीजांड का बाहरी आवरण परतावरण होगा, उसके अंदर बीजपत्र होंगे, और बीच में भ्रूण स्थित होगा। भ्रूण के चारों ओर भ्रूणकोष और भ्रूणमंडल होगा।
व्याख्या:
आवृत्तबीजी बीजांड में परतावरण सबसे बाहरी परत होती है, जो बीजांड की सुरक्षा करती है। इसके अंदर बीजपत्र होते हैं जो भ्रूण को पोषण देते हैं। भ्रूण केंद्र में होता है, जो भविष्य का पौधा बनता है।
Q7.5. आप मादा युग्मकोद्भिद् के एकबीजाणुज विकास से क्या समझते हैं?
उत्तर:
मादा युग्मकोद्भिद का एकबीजाणुज विकास वह प्रक्रिया है जिसमें मादा युग्मकोशिका (अंडाणु) एक एकल बीजाणु (नर युग्मक) के साथ मिलकर युग्मन (fertilization) करती है और इससे एक युग्मकोशिका बनती है। इस प्रक्रिया में नर और मादा युग्मकोशिकाओं का विलय होता है, जो नए पौधे के विकास की शुरुआत है।
व्याख्या:
एकबीजाणुज विकास में एक नर युग्मक मादा युग्मकोशिका के साथ मिलकर युग्मन करता है, जिससे एक युग्मकोशिका बनती है। यह प्रक्रिया लैंगिक प्रजनन का आधार है और इससे पौधे की नई पीढ़ी उत्पन्न होती है।
Q8.6. एक स्पष्ट एवं साफ सुथरे चित्र के द्वारा परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद के 7-कोशीय, 8-न्युकिलयेट (केंद्रक) प्रकृति की व्याख्या करें।
उत्तर:
परिपक्व मादा युग्मकोद्भिद में कुल 7 कोशिकाएँ होती हैं और 8 केंद्रक (न्युकिलयेट) होते हैं। इनमें 1 अंडाणु कोशिका, 2 पोलर केंद्रक, 3 सहायक कोशिकाएँ, और 1 केंद्रीय कोशिका होती है। 8 केंद्रक में 2 पोलर केंद्रक मिलकर एक केंद्रक बनाते हैं, और बाकी केंद्रक प्रत्येक कोशिका में एक-एक होते हैं। चित्र में इन कोशिकाओं को स्पष्ट रूप से नामांकित करें।
व्याख्या:
मादा युग्मकोद्भिद की 7 कोशिकाएँ होती हैं: 1 अंडाणु कोशिका, 2 पोलर केंद्रक, 3 सहायक कोशिकाएँ, और 1 केंद्रीय कोशिका। कुल 8 केंद्रक होते हैं। यह संरचना त्रि-संलयन के लिए आवश्यक होती है।