नियंत्रण | Class 12 Business Studies Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

नियंत्रण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of नियंत्रण from Class 12 Business Studies, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
नियंत्रण का अर्थ
नियंत्रण प्रबंधक का एक महत्वपूर्ण कार्य है। इसका तात्पर्य है कि प्रबंधक अपने अधीनस्थों के क्रियाकलापों पर प्रभावी नियंत्रण रखे ताकि नियोजित परिणाम प्राप्त हो सकें। नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग प्रभावी और दक्षतापूर्ण ढंग से हो रहा है। यह एक उद्देश्य मूलक कार्य है जो प्रत्येक प्रबंधक के लिए आवश्यक है। नियंत्रण केवल कार्य को विधिवत् चलाने में सहायता नहीं करता बल्कि यह प्रबंधन चक्र को पुनः नियोजन कार्य पर लाकर सुधार करता है। नियंत्रण से निष्पादन और मानकों के विचलन का ज्ञान होता है, जिनका विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है। इस प्रकार नियंत्रण नियोजन और निष्पादन के बीच एक सेतु का काम करता है और भविष्य के लिए बेहतर योजनाओं को तैयार करने में सहायता करता है।
🔗 Connection: यह नियंत्रण के महत्व की व्याख्या के लिए आधार प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नियंत्रण का क्या अर्थ है और यह प्रबंधकीय कार्य में क्यों महत्वपूर्ण है?
नियंत्रण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से प्रबंधक अपने अधीनस्थों के कार्यों पर प्रभावी नियंत्रण रखता है ताकि नियोजित परिणाम प्राप्त हो सकें। यह संगठन के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए संसाधनों के प्रभावी और दक्षतापूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करता है। उदाहरण के लिए, एक प्रबंधक उत्पादन में गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करता है।
नियंत्रण की प्रक्रिया के मुख्य पाँच चरण कौन-कौन से हैं?
नियंत्रण प्रक्रिया के पाँच मुख्य चरण हैं— 1. निष्पादन मानकों का निर्धारण 2. वास्तविक निष्पादन की माप 3. मानकों एवं वास्तविक निष्पादन की तुलना 4. विचलनों का विश्लेषण 5. सुधारात्मक कार्यवाही करना। उदाहरण के लिए, एक कंपनी उत्पादन मानक निर्धारित करती है, फिर उत्पादन की माप करती है, तुलना करती है, विचलन का विश्लेषण करती है और आवश्यक सुधार करती है।
नियोजन और नियंत्रण के बीच क्या संबंध होता है? इसे स्पष्ट कीजिए।
(a) परिचय: नियोजन और नियंत्रण प्रबंध के दो अपूरणीय यमज हैं जो एक-दूसरे को पूरक करते हैं।
(b) नियोजन भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करता है और कार्यविधि तय करता है।
(c) नियंत्रण नियोजन के अनुसार कार्यों के निष्पादन की जांच करता है और विचलनों पर सुधारात्मक कार्यवाही करता है।
(d) नियोजन बिना नियंत्रण अर्थहीन है क्योंकि बिना नियंत्रण योजनाओं का सही निष्पादन सुनिश्चित नहीं होता। इसी तरह नियंत्रण बिना नियोजन दृष्टिहीन है क्योंकि बिना मानकों के नियंत्रण संभव नहीं।
(e) निष्कर्ष: दोनों मिलकर प्रबंध प
नियंत्रण के महत्व में से कौन सा बिंदु संगठन में आदेश एवं अनुशासन सुनिश्चित करता है?
आदेश एवं अनुशासन की सुनिश्चितता
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