Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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व्याख्याविषय प्रवेश
नियंत्रण प्रबंधकीय कार्यों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। यह प्रक्रिया संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है, क्योंकि इसके माध्यम से प्रबंधक यह सुनिश्चित करता है कि सभी गतिविधियाँ नियोजन के अनुसार हो रही हैं या नहीं। स्टिलिंग कोरियर के उदाहरण से स्पष्ट होता है कि एक कुशल प्रबंधक विपरीत व्यावसायिक परिस्थितियों को नियंत्रित कर सकता है और संभावित नुकसान से बचाव कर सकता है। नियंत्रण कार्य सुरक्षा कवच की तरह है जो केवल कार्य को विधिवत् चलाने में सहायता नहीं करता बल्कि उसे द्रुत गति से आगे बढ़ने में भी मदद करता है। प्रबंधकीय नियंत्रण के अंतर्गत वास्तविक प्रगति तथा निर्धारित मानकों की तुलना की जाती है और यदि कोई विचलन होता है तो उसे दूर करने के लिए सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है। इस प्रकार नियंत्रण प्रबंध प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है जो नियोजन के साथ मिलकर संगठन को सफलता की ओर ले जाता है। **Table on page 1 (7×1)** | अधिगम उद्देश्य | | --- | | इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात् आप- | | • नियंत्रण को परिभाषित कर सकेंगे; | | • नियंत्रण का महत्व बता सकेंगे; | | • नियोजन तथा नियंत्रण में संबंध स्थापित कर सकेंगे; | | • नियंत्रण प्रक्रिया के चरणों की व्याख्या कर सकेंगे; | | • नियंत्रण की तकनीक समझा सकेंगे। | **Table on page 6 (6×4)** | उत्पादन | विपणन | कार्मिक प्रबंध | वित्तीय एवं लेखांकन | | --- | --- | --- | --- | | मात्रा | विक्री की मात्रा | श्रम संबंध | पूँजीगत व्यय | | गुण | विक्रय व्यय | श्रम आवर्त | स्कंध | | लागत | विज्ञापन व्यय | श्रम अनुपस्थिति | पूँजी का प्रवाह | | व्यक्तिगत कार्य | व्यक्तिगत | — | तरलता | | निष्पादन | विक्रयकर्ता का निष्पादन | — | — |
- नियंत्रण प्रबंध का महत्वपूर्ण कार्य है जो संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
- यह विपरीत परिस्थितियों में भी व्यवसाय को सुरक्षित रखता है।
- वास्तविक निष्पादन और मानकों के बीच विचलनों का पता लगाता है।
- सुधारात्मक कार्यवाही के माध्यम से लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
- नियंत्रण प्रबंध प्रक्रिया का एक चक्र पूरा करता है और नियोजन में सुधार करता है।
- 📌 नियंत्रण: संगठन में नियोजन के अनुसार क्रियाओं के निष्पादन की प्रक्रिया।
- 📌 प्रबंधकीय नियंत्रण: वास्तविक प्रगति और मानकों के बीच विचलनों का पता लगाकर सुधारात्मक कार्यवाही।
नियंत्रण का अर्थ
परिभाषानियंत्रण का अर्थ
नियंत्रण प्रबंधक का एक महत्वपूर्ण कार्य है। इसका तात्पर्य है कि प्रबंधक अपने अधीनस्थों के क्रियाकलापों पर प्रभावी नियंत्रण रखे ताकि नियोजित परिणाम प्राप्त हो सकें। नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग प्रभावी और दक्षतापूर्ण ढंग से हो रहा है। यह एक उद्देश्य मूलक कार्य है जो प्रत्येक प्रबंधक के लिए आवश्यक है। नियंत्रण केवल कार्य को विधिवत् चलाने में सहायता नहीं करता बल्कि यह प्रबंधन चक्र को पुनः नियोजन कार्य पर लाकर सुधार करता है। नियंत्रण से निष्पादन और मानकों के विचलन का ज्ञान होता है, जिनका विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है। इस प्रकार नियंत्रण नियोजन और निष्पादन के बीच एक सेतु का काम करता है और भविष्य के लिए बेहतर योजनाओं को तैयार करने में सहायता करता है।
- नियंत्रण का तात्पर्य है नियोजन के अनुसार क्रियाओं का निष्पादन।
- यह सुनिश्चित करता है कि संसाधनों का प्रभावी और दक्षतापूर्ण उपयोग हो।
- प्रबंधक के लिए नियंत्रण एक सर्वव्यापी और अनिवार्य कार्य है।
- नियंत्रण प्रबंधन चक्र को पूरा करता है और नियोजन में सुधार करता है।
- विचलनों का विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है।
- 📌 नियंत्रण: संगठन में नियोजन के अनुसार क्रियाओं के निष्पादन की प्रक्रिया।
- 📌 विचलन: वास्तविक निष्पादन और मानकों के बीच अंतर।
- 📌 सुधारात्मक कार्यवाही: विचलनों को दूर करने के लिए की जाने वाली कार्रवाई।
नियंत्रण का महत्व
व्याख्यानियंत्रण का महत्व
नियंत्रण प्रबंध का अनिवार्य कार्य है क्योंकि इसके बिना उच्च कोटि की योजनाएँ भी विफल हो सकती हैं। नियंत्रण संगठन को उसके लक्ष्यों की प्राप्ति में मार्गदर्शन करता है। इसका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है— (क) संगठनात्मक लक्ष्यों की निष्पत
अभ्यास प्रश्न — Chapter 8
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. नियंत्रण का अर्थ समझाइए।
उत्तर:
नियंत्रण का अर्थ है प्रबंधन की वह प्रक्रिया जिसके द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित योजनाओं के अनुसार कार्य हो रहा है। इसमें मानक निर्धारित करना, वास्तविक प्रदर्शन की तुलना करना और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाना शामिल है।
व्याख्या:
नियंत्रण प्रक्रिया में मानक निर्धारित करना, वास्तविक प्रदर्शन की तुलना करना और विचलन मिलने पर सुधारात्मक कार्रवाई करना शामिल होता है। यह सुनिश्चित करता है कि संगठन के लक्ष्य समय पर और प्रभावी ढंग से पूरे हों।
Q2.2. उस सिद्धांत का नाम बताएँ जिस पर एक प्रबंधक को विचलन से प्रभावी ढंग से निपटने के दौरान विचार करना चाहिए। कोई एक स्थिति बताएँ जिसमें एक संगठन की नियंत्रण प्रणाली अपनी प्रभावशीलता खो देती है।
उत्तर:
प्रबंधक को विचलन से निपटने के दौरान 'विचलन का सिद्धांत' (Principle of Exception) पर विचार करना चाहिए। यह सिद्धांत कहता है कि प्रबंधक को केवल महत्वपूर्ण विचलनों पर ध्यान देना चाहिए और सामान्य या छोटे विचलनों को नजरअंदाज करना चाहिए। एक स्थिति जहाँ नियंत्रण प्रणाली प्रभावशीलता खो सकती है वह है जब संगठन के लक्ष्य अस्पष्ट हों या मानक सही ढंग से निर्धारित न किए गए हों। उदाहरण के लिए, यदि मानक बहुत कठोर या असंभव हो, तो नियंत्रण प्रणाली विफल हो सकती है क्योंकि वास्तविक प्रदर्शन मानकों से लगातार विचलित होगा।
व्याख्या:
विचलन का सिद्धांत प्रबंधक को केवल महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है। यदि मानक गलत या अप्रासंगिक हैं, तो नियंत्रण प्रणाली सही ढंग से काम नहीं कर पाएगी।
Q3.3. मानक प्रदर्शन और वास्तविक प्रदर्शन के बीच अंतर को इंगित करने के लिए किस शब्द का उपयोग किया जाता है?
उत्तर:
मानक प्रदर्शन और वास्तविक प्रदर्शन के बीच अंतर को 'विचलन' (Deviation) या 'अंतर' (Variance) कहा जाता है। यह अंतर यह दर्शाता है कि वास्तविक परिणाम मानक से कितना भिन्न है।
व्याख्या:
विचलन का विश्लेषण प्रबंधकों को यह समझने में मदद करता है कि प्रदर्शन मानकों के अनुरूप है या नहीं, और यदि नहीं, तो सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।
Q4.1. ‘नियोजन आगे की ओर और नियंत्रण पीछे की ओर देखना है।’ टिप्पणी करें।
उत्तर:
यह कथन इस बात को दर्शाता है कि नियोजन भविष्य के लिए लक्ष्यों और कार्यों की रूपरेखा तैयार करता है, जबकि नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि ये योजनाएँ सही ढंग से लागू हो रही हैं। नियोजन भविष्य की दिशा निर्धारित करता है और नियंत्रण पिछले कार्यों की समीक्षा करता है ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें।
व्याख्या:
नियोजन में लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं और रणनीतियाँ बनाई जाती हैं, जो भविष्य की ओर देखती हैं। नियंत्रण वर्तमान और पिछले प्रदर्शन की तुलना मानकों से करता है, जिससे पता चलता है कि योजना के अनुसार काम हो रहा है या नहीं।
Q5.2. ‘सब कुछ नियंत्रित करने का प्रयास कुछ भी नियंत्रित न कर पाने में समाप्त हो सकता है।’ चर्चा करें।
उत्तर:
यह कथन यह बताता है कि नियंत्रण की प्रक्रिया में अत्यधिक विस्तार या हर छोटी-छोटी बात को नियंत्रित करने का प्रयास प्रबंधक के लिए बोझिल और अप्रभावी हो सकता है। इससे नियंत्रण प्रणाली जटिल और धीमी हो जाती है, जिससे वास्तविक नियंत्रण खो सकता है। इसलिए, नियंत्रण में प्राथमिकता और महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
व्याख्या:
प्रबंधक को नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और अनावश्यक विवरणों में नहीं उलझना चाहिए। इससे नियंत्रण प्रभावी और समयोचित होता है।
Q6.3. प्रबंधकीय नियंत्रण की तकनीक के रूप में बजटीय नियंत्रण पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
बजटीय नियंत्रण एक प्रबंधकीय नियंत्रण तकनीक है जिसमें संगठन की विभिन्न गतिविधियों के लिए वित्तीय बजट बनाए जाते हैं। यह बजट वास्तविक खर्चों और आय की तुलना करता है ताकि विचलन का पता लगाया जा सके और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। यह संसाधनों के प्रभावी उपयोग और लागत नियंत्रण में मदद करता है।
व्याख्या:
बजटीय नियंत्रण के माध्यम से प्रबंधक वित्तीय संसाधनों का नियोजन करते हैं और वास्तविक प्रदर्शन की तुलना बजट से करते हैं। इससे अनावश्यक खर्चों को रोका जा सकता है और संगठन के वित्तीय लक्ष्य पूरे होते हैं।
Q7.4. बताएँ कि प्रबंधन लेखा परीक्षा कैसे नियंत्रित करने की प्रभावी तकनीक के रूप में कार्य करती है।
उत्तर:
प्रबंधन लेखा परीक्षा एक नियंत्रण तकनीक है जो संगठन की वित्तीय और प्रबंधकीय गतिविधियों की समीक्षा करती है। यह लेखा रिकॉर्ड, नीतियों और प्रक्रियाओं की जांच करके यह सुनिश्चित करती है कि संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है और नियमों का पालन हो रहा है। इससे त्रुटियों और अनियमितताओं का पता चलता है और सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
व्याख्या:
लेखा परीक्षा के माध्यम से संगठन की वित्तीय स्थिति और नियंत्रण प्रणाली की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाता है। यह प्रबंधकों को बेहतर निर्णय लेने और नियंत्रण प्रक्रिया को मजबूत करने में मदद करती है।
Q8.5. श्री अफ्राज स्टेशनरी उत्पाद बनाने वाली कंपनी राइटवेल प्रोडक्ट्स लिमिटेड के उत्पादन विभाग का कार्यभार देख रहे थे। फर्म को एक नियार्त आदेश मिला जिसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना था और उत्पादन लक्ष्यों को सभी कर्मचारियों के लिए परिभाषित किया गया। श्रमिकों में से एक, भानु प्रसाद, लगातार दो दिन तक अपने दैनिक उत्पादन लक्ष्य से 10 इकाइयाँ कम रहा। श्री अफ्राज ने भानु प्रसाद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कंपनी की सी.ई.ओ. वसुधरा से संपर्क किया और उनसे उसकी सेवाओं को समाप्त करने का अनुरोध किया। उस प्रबंधन नियंत्रण के सिद्धांत की व्याख्या करें जिस पर वसुधरा को अपना निर्णय लेने के दौरान विचार करना चाहिए।
उत्तर:
इस स्थिति में वसुधरा को 'विचलन का सिद्धांत' (Principle of Exception) पर विचार करना चाहिए। यह सिद्धांत कहता है कि प्रबंधक को केवल महत्वपूर्ण और असामान्य विचलनों पर ध्यान देना चाहिए न कि सामान्य या मामूली विचलनों पर। भानु प्रसाद का दो दिन तक लक्ष्य से 10 इकाइयाँ कम रहना एक छोटा विचलन हो सकता है, जिसे सुधारात्मक कदमों से ठीक किया जा सकता है। इसलिए, तुरंत सेवाएँ समाप्त करना उचित नहीं होगा। पहले कारणों की जांच करनी चाहिए और सुधारात्मक उपाय अपनाने चाहिए।
व्याख्या:
विचलन का सिद्धांत प्रबंधक को केवल महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। छोटे या असामान्य विचलन को सुधारने के लिए प्रशिक्षण या प्रोत्साहन जैसे उपाय किए जा सकते हैं। इससे कर्मचारियों का मनोबल भी बना रहता है।
Vyavasai Adhyan-I के सभी 8 अध्याय
Business Studies · Class 12