Chemistryकक्षा 12ऐमीनहिंदी

ऐमीन | Class 12 Chemistry Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

ऐमीन | Class 12 Chemistry Notes

ऐमीन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of ऐमीन from Class 12 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

9.3 नामपद्धति

ऐमीनों का नामकरण दो प्रकार से किया जाता है: सामान्य पद्धति और IUPAC पद्धति। सामान्य पद्धति में ऐल्किल समूह के नाम के बाद 'ऐमीन' शब्द जोड़कर नाम दिया जाता है, जैसे मेथिलऐमीन। द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में जब दो या अधिक समूह समान होते हैं, तो पूर्वलग्न डाइ, ट्राइ आदि लगाकर नाम बनता है, जैसे डाइमिथिलऐमीन। IUPAC पद्धति में ऐमीनों का नामकरण ऐल्केनमीन के रूप में किया जाता है, जैसे CH₃NH₂ का नाम मेथेनेमीन है। यदि मुख्य शृंखला में एक से अधिक ऐमीन समूह हों, तो उनकी स्थिति संख्या के साथ डाइ, ट्राइ आदि पूर्वलग्न लगाते हैं, जैसे एथेन-1,2-डाइएमीन। द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में N को छोटे एल्किल समूह के साथ जोड़कर विस्थापक के रूप में लिखा जाता है, जैसे N-मेथिलएथेनामीन। ऐरिल ऐमीनों में –NH₂ समूह सीधे बेन्जीन वलय से जुड़ा होता है, जैसे C₆H₅NH₂ को ऐनिलीन कहते हैं। सारणी 9.1 में कुछ सामान्य एवं IUPAC नाम दिए गए हैं।

📊 Diagram: सारणी 9.1 – कुछ ऐल्किल एवं ऐरिल ऐमीनों की नामपद्धति

🔗 Connection: नामकरण के पश्चात् अगला खंड ऐमीनों के संश्लेषण (विरचन) की विधियों पर विस्तार से चर्चा करता है।

Table on page 3 (5×3)

ऐमीनसामान्य नामआइयूपीएसी नाम
CH₃–CH₂–NH₂एथिलऐमीनऐथेनेमीन
CH₂–CH₂–CH₂–NH₂n-प्रोपिलऐमीनप्रोपेन-1-ऐमीन

| CH₂–CH–CH₃

Table on page 3 (1×0)

| CH₂–N–CH₂–CH₃

Table on page 3 (1×0)

| CH₃–N–CH₃

Table on page 3 (1×0)

| C₂H₅–N–CH₂–CH₂–CH₂–CH₂–CH₃

Table on page 3 (1×0)

| NH₂–CH₂–CH=CH₂

Table on page 3 (3×3)

NH₂–(CH₃)₆–NH₂हेक्सामेथिलीन डाइऐमीनहेक्सेन-1, 6-डाइऐमीन
ऐनिलीनऐनिलीन अथवा बेन्जीनेमीन
o-टॉलूडीन2-मेथिलऐनीलीन

| | p-ब्रोमोऐनिलीन | 4-ब्रोमोबेन्जीनेमीन

Table on page 9 (11×2)

ऐमीन का नामpK_b
मेथेनेमीन3.38
N-मेथिलमेथेनेमीन3.27
N,N-डाइमेथिलमेथेनेमीन4.22
एथेनेमीन3.29
N-एथिलएथेनेमीन3.00
N,N-डाइएथिलएथेनेमीन3.25
बेन्जीनऐमीन9.38
फ्रेनिलमेथेनेमीन4.70
N-मेथिलऐनिलीन9.30
N,N-डाइमेथिलऐनिलीन8.92

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

9.3 निम्नलिखित के कारण बताइए- (i) ऐनिलीन का pKₗ मेथिलएमीन की तुलना में अधिक होता है। (ii) ऐथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं। (iii) मेथिलऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक आक्साइड का अवक्षेप देता है। (iv) यद्यपि ऐमीनों समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आर्थो एवं पैरा निर्देशक होता है फिर भी ऐनिलीन नाइट्रोकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोऐनीलीन देती है। (v) ऐनिलीन फ्रिडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती। (vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलीफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं। (vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है।

उत्तर: (i) ऐनिलीन का pKₗ मेथिलएमीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि ऐनिलीन में नाइट्रोजन के lone pair इलेक्ट्रॉन बेंज़ीन रिंग के π-तंत्र के साथ संलग्न होते हैं, जिससे उसका availability कम हो जाता है, अतः वह कम क्षारक होता है। मेथिलएमीन में lone pair पूरी तरह से नाइट्रोजन पर उपलब्ध होता है, इसलिए उसका pKₗ कम होता है।

(ii) ऐथिलऐमीन जल में विलेय है क्योंकि यह एक अल्काइल ऐमीन है और जल के साथ हाइड्रोजन बांड बना सकता है। जबकि ऐनिलीन में नाइट्रोजन का lone pair बेंज़ीन रिंग के साथ संलग्न होता है, जिसस

9.4 निम्नलिखित को क्रम में लिखिए— (i) $pK_{b}$ मान के घटते क्रम में— $C_2H_5NH_2, C_6H_5NHCH_3, (C_2H_5)_2NH$ एवं $C_6H_5NH_2$ (ii) क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में— $C_6H_5NH_2, C_6H_5N(CH_3)_2, (C_2H_5)_2NH$ एवं $CH_3NH_2$ (iii) क्षारकीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में— (क) ऐनिलीन, पैरा-नाइट्रोऐनिलीन, एवं पैरा-टॉल्ड्रीन (ख) $C_6H_5NH_2, C_6H_5NHCH_3, C_6H_5CH_2NH_2$ (iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में— $C_2H_5NH_2, (C_2H_5)_2NH, (C_2H_5)_3N$ एवं $NH_3$ (v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में— $C_2H_5OH, (CH_3)_2NH, C_2H_5NH_2$ (vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में— $C_6H_5NH_2, (C_2H_5)_2NH, C_2H_5NH_2$

उत्तर: (i) $pK_b$ के घटते क्रम में: $(C_2H_5)_2NH > C_6H_5NHCH_3 > C_2H_5NH_2 > C_6H_5NH_2$

(ii) क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में: $ (C_2H_5)_2NH > CH_3NH_2 > C_6H_5N(CH_3)_2 > C_6H_5NH_2$

(iii) क्षारकीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में: (क) पैरा-नाइट्रोऐनिलीन < ऐनिलीन < पैरा-टॉल्ड्रीन (ख) $C_6H_5NH_2 < C_6H_5NHCH_3 < C_6H_5CH_2NH_2$

(iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में: $C_2H_5NH_2 > (C_2H_5)_2NH > (C_2H_5)_3N > NH_3$

(v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में: $ (CH_3)_2NH < C_2H_5NH

9.5 इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे— (i) एथेनॉइक अम्ल को मेथेनेमीन में (ii) हैक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमीनोपेस्टेन में (iii) मेथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में (iv) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में (v) एथेनॉइक अम्ल को प्रोपेनॉइक अम्ल में (vi) मेथेनेमीन को ऐथेनेमीन में (vii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिलऐमीन में (viii) प्रोपेनॉइक अम्ल को ऐथेनॉइक अम्ल में?

उत्तर: (i) एथेनॉइक अम्ल को मेथेनेमीन में: एथेनॉइक अम्ल को पहले क्लोराइड में परिवर्तित करें (एथेनॉयल क्लोराइड), फिर अमोनिया के साथ अभिक्रिया कर अमाइड बनाएं, अंत में अमाइड को हाइड्रोजन गैस और निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजनीकरण कर मेथेनेमीन प्राप्त करें।

(ii) हैक्सेननाइट्राइल को 1-ऐमीनोपेस्टेन में: हाइड्रोजन गैस और निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हैक्सेननाइट्राइल का हाइड्रोजनीकरण करें।

(iii) मेथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में: मेथेनॉल को ऑक्सीकरण के द्वारा एथेनॉइक अम्ल में बदला जा सकता है।

(

9.6 प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों को पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।

उत्तर: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों की पहचान के लिए निम्नलिखित विधियाँ हैं:

1. हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया: प्राथमिक ऐमीन हॉफमान ब्रोमेमाइड के साथ अभिक्रिया कर एक अमीनो समूह को हटाकर एल्केन बनाती है। द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन इस अभिक्रिया में भाग नहीं लेते।

रासायनिक समीकरण: R-NH_2 + Br_2 + 4NaOH → R-H + Na_2CO_3 + 2NaBr + 2H_2O

2. डाइऐजोकरण अभिक्रिया: प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ डाइऐजोनीकरण करती है, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन नहीं।

रासायनिक समीकरण: R-NH_2 + HNO_2 + HCl → R-N_2^+Cl^-

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