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स्वर-ताल लिपि पद्धतियाँ | Class 11 Sangeet Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

स्वर-ताल लिपि पद्धतियाँ | Class 11 Sangeet Notes

स्वर-ताल लिपि पद्धतियाँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of स्वर-ताल लिपि पद्धतियाँ from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

विष्णु दिगम्बर पलुस्कर स्वरलिपि पद्धति

पंडित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्वर और ताल को लिखित रूप में अभिव्यक्त करने के लिए एक वैज्ञानिक और सूक्ष्म स्वरलिपि पद्धति विकसित की। इस पद्धति में शुद्ध स्वरों को बिना चिह्न के लिखा जाता है, जैसे स, रे, ग, म। कोमल स्वरों को नीचे हलन्त चिह्न लगाकर दर्शाया जाता है, जैसे ग्, म्, ध्। तीव्र मध्यम को उल्टे हलन्त चिह्न से लिखा जाता है, जैसे भ्र।

सप्तकों को दर्शाने के लिए मंद्र सप्तक में स्वरों के ऊपर बिंदु लगाते हैं, मध्य सप्तक के लिए कोई चिह्न नहीं होता, और तार सप्तक के स्वरों के ऊपर खड़ी लकीर लगाई जाती है।

उच्चारण के लिए अवग्रह चिह्न (ऽ) और गीत के अक्षरों को लंबा करने के लिए बिंदु चिह्न (•) का प्रयोग होता है। स्वर की मात्रा को दर्शाने के लिए विभिन्न चिह्न होते हैं जैसे — एक मात्रा (—), आधी मात्रा (०), चौथाई मात्रा (~), आदि। ताल के लिए सम (—), खाली (+), विभाग (2, 3, 4), और ताली की संख्या लिखी जाती है। ताल के प्रत्येक आवर्तन के बाद विराम (I) लगाया जाता है, स्थायी के अंत में दो विराम (II), और पूरे गीत के अंत में तीन विराम (III) लगते हैं।

इस पद्धति में ताल और स्वर को वैज्ञानिक और व्यवस्थित रूप से अभिव्यक्त किया जाता है, जो संगीत शिक्षा और प्रस्तुति में अत्यंत उपयोगी है।

📊 Diagram: Table on page 4 (3×12); Table on page 4 (2×12)

🧪 Activity: पलुस्कर स्वरलिपि पद्धति के स्वर और ताल चिह्नों का अभ्यास करना और ताल के विराम चिह्नों को समझना।

🔗 Connection: यह पद्धति भातखण्डे पद्धति के साथ तुलनात्मक अध्ययन के लिए आधार प्रदान करती है।

Table on page 4 (3×12)

123456789101112
धिंधिंधागेतिरकिटतूनात्ताधागेतिरकिटधीना
×°2°34

Table on page 4 (2×12)

धिंधिंधागेतिरकिटतूनात्ताधागेतिरकिटधीना
9+5+911

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भातखण्डे स्वरलिपि पद्धति में अपने पाठ्यक्रम के किसी राग के द्रुत ख्याल की बंदिश लिखिए।

भातखण्डे स्वरलिपि पद्धति में द्रुत ख्याल की बंदिश लिखने के लिए पहले उस राग की स्वर संरचना को समझना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, राग भैरव के द्रुत ख्याल की बंदिश इस प्रकार लिखी जा सकती है:

सा रे ग म प ध नि सां, सां नि ध प म ग रे सा

यह बंदिश भातखण्डे स्वरलिपि के अनुसार सरल और स्पष्ट रूप में लिखी जाती है। द्रुत ख्याल में गति तेज होती है, इसलिए मात्रा और ताल का ध्यान रखते हुए बंदिश लिखनी चाहिए।

2. अपने पाठ्यक्रम के किन्ही दो रागों के द्रुत ख्याल में आठ मात्रा की चार तानें लिखिए।

द्रुत ख्याल में तानें लिखने के लिए राग के स्वर और ताल की समझ आवश्यक है। उदाहरण के लिए:

राग यमन की तानें (8 मात्रा की): 1) सा रे ग म प ध नि सां 2) सां नि ध प म ग रे सा 3) ग म प ध नि सां ध प 4) म प ध नि सां ध प म

राग भैरव की तानें (8 मात्रा की): 1) सा रे ग म प ध नि सां 2) सां नि ध प म ग रे सा 3) प ध नि सां ध प म ग 4) ध नि सां ध प म ग रे

इन तानों को भातखण्डे स्वरलिपि पद्धति के अनुसार लिखना चाहिए, जिसमें स्वर अक्षरों द्वारा और ताल चिह्नों द्वारा दर्शाए जाते हैं।

3. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ताल-लिपि पद्धति के प्रमुख चिह्नों को समझाइए।

विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ताल-लिपि पद्धति में ताल के विभिन्न भागों को दर्शाने के लिए विशेष चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। प्रमुख चिह्न निम्नलिखित हैं:

1) ०० - ताल की शुरुआत या सम 2) + - ताल के विभाजन को दर्शाता है 3) 9 - ताल की एक विशेष मात्रा या जोड़ 4) × - ताल में ठहराव या विराम

इन चिह्नों का प्रयोग ताल की लयबद्धता और संरचना को स्पष्ट रूप से दर्शाने के लिए किया जाता है। यह पद्धति ताल की जटिलताओं को सरलता से समझने और लिखने में सहायक होती है।

4. भातखण्डे स्वरलिपि पद्धति में शुद्ध व विकृत स्वरों को लिखने की विधि उदाहरण सहित समझाइए।

भातखण्डे स्वरलिपि पद्धति में शुद्ध स्वर और विकृत स्वर को अलग-अलग चिह्नों और संकेतों द्वारा लिखा जाता है।

शुद्ध स्वर: ये वे स्वर होते हैं जो राग के मूल स्वर होते हैं, जैसे सा, रे, ग, म, प, ध, नि। इन्हें सामान्य अक्षरों से लिखा जाता है।

विकृत स्वर: ये वे स्वर होते हैं जो राग में अलंकार या विशेष प्रभाव के लिए प्रयोग किए जाते हैं, जैसे रे का कमाल, ग का तिरछा स्वर आदि। इन्हें अक्षरों के ऊपर या नीचे विशेष चिह्न लगाकर लिखा जाता है।

उदाहरण: शुद्ध स्वर - सा, रे, ग विकृत स्वर - रे (कमाल स्वर) को रे के

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