तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन | Class 11 Sangeet Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
अजराड़ा घराना
अजराड़ा घराना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के अजराड़ा गाँव से उत्पन्न हुआ। इसके संस्थापक कल्लू खाँ और मीरू खाँ थे, जिन्होंने दिल्ली के उस्ताद सिताब खाँ से तबला वादन की शिक्षा प्राप्त की। अजराड़ा घराना दिल्ली घराने से जुड़ा होने के कारण उसकी अधिकांश विशेषताएँ इसमें विद्यमान हैं, किन्तु इसकी अपनी कुछ विशिष्टताएँ भी हैं। इस घराने में बायाँ या ड़गगा का व्यवहार अत्यंत कलात्मक रूप से किया जाता है, जिससे तबले की नादात्मकता में सकारात्मक परिवर्तन आता है। बायाँ के बोलों को प्रधानता देते हुए आड़ी लय के कायदों का प्रसार हुआ। ड़गगे के बोलों की प्रधानता, तबले और ड़गगे के वर्णों के गुथाव से निर्मित बोल जैसे—घेतग, घेनग, घेघेनक, दिंग-दिनागिन, धातग-घेतग आदि इस घराने की विशेषताएँ हैं। त्रिस्त जाति के कायदे का अधिक प्रयोग होता है। इस घराने के प्रमुख कलाकारों में हबीबुद्दीन खाँ, सुधीर कुमार सक्सेना, मनमोहन सिंह, हशामत खाँ, रमज़ान खाँ, अकरम खाँ आदि शामिल हैं। हबीबुद्दीन खाँ ने अजराड़ा घराने को नई दिशा दी और इसे चतुर्मुखी वादन शैली प्रदान की।
📊 Diagram: 11159068
🔗 Connection: अजराड़ा घराने के बाद, लखनऊ घराने की उत्पत्ति और विशेषताओं का अध्ययन करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. पंजाब घराने के कुछ कलाकारों के नाम बताइए। 2. सामता प्रसाद, राम जी मिश्र और गोपाल मिश्र किस घराने के तबला वादक हैं? 3. घराना शब्द से आप क्या समझते हैं? 4. गुदई महाराज का दूसरा नाम क्या था? 5. बायाँ या डांगे का व्यवहार किस घराने में कलात्मक रूप से किया गया है?
1. पंजाब घराने के कुछ प्रसिद्ध कलाकार हैं: अनोखे लाल मिश्र, किशन महाराज आदि। 2. सामता प्रसाद, राम जी मिश्र और गोपाल मिश्र बनारस घराने के तबला वादक हैं। 3. घराना शब्द संगीत में एक विशिष्ट शैली या परंपरा को दर्शाता है, जो वाद्य वादन या गायन की विशिष्ट विधा और तकनीक को परिभाषित करता है। यह आमतौर पर एक परिवार या गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ा होता है। 4. गुदई महाराज का दूसरा नाम था - गुदई महाराज। (यदि अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध हो तो उल्लेख करें।) 5. बायाँ या डांगे का व्यवहार दिल्ली घराने में कलात्मक रूप स
1. दिल्ली घराने में तबला किस प्रकार बजाया जाता है? 2. पंजाब घराने में तबला वादन की विधि का वर्णन कीजिए। 3. बनारस घराने के तबला वादक किन-किन विधाओं के साथ बजाने की क्षमता रखते हैं? 4. नाथद्वारा घराने के कुछ पखावज वादकों के नाम बताइए।
1. दिल्ली घराने में तबला बजाने की शैली में स्पष्टता, लयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें बायाँ हाथ (डांगा) की कलात्मकता और दायाँ हाथ (बायाँ) की त्वरित गति का समन्वय होता है। इस घराने की वादन शैली में ठोस ताल और परिष्कृत परन प्रमुख होते हैं।
2. पंजाब घराने में तबला वादन की विधि में जोरदार और गतिशील ताल वादन होता है। इस घराने की विशेषता है कि इसमें जोरदार और स्पष्ट ध्वनि उत्पन्न करने के लिए हथेली और उंगलियों का विशेष प्रयोग किया जाता है। यहां के वादक तेज गति और जटिल परनों
1. अनोखे लाल मिश्र एवं किशन महाराज पंजाब घराने के तबला वादक हैं। 2. दिल्ली घराने के मूल पुरुष उत्ताद सिद्धार खाँ डाड़ी थे। 3. घराना शब्द राजमहलों से आया है। 4. लतीफ अहमद खाँ बनारस घराने के तबला वादक हैं। 5. दिल्ली घराने का जन्म अकबर के काल में हुआ।
1. सही - अनोखे लाल मिश्र एवं किशन महाराज पंजाब घराने के प्रसिद्ध तबला वादक हैं। 2. गलत - दिल्ली घराने के मूल पुरुष उत्ताद सिद्धार खाँ डाड़ी नहीं थे। 3. सही - घराना शब्द राजमहलों से आया है, जो संगीत की परंपरा को दर्शाता है। 4. सही - लतीफ अहमद खाँ बनारस घराने के प्रसिद्ध तबला वादक थे। 5. सही - दिल्ली घराने का जन्म अकबर के काल में हुआ था।
1. लाला भवानी दास ... घराने के मूल संस्थापक थे। 2. पंडित राम सहाय ... घराने के कलाकार थे। 3. अजराड़ा ... जिले में है। 4. शाफात अहमद खाँ ... घराने के तबला वादक हुए। 5. हसमत खाँ एवं अकरम खाँ ... घराने के विख्यात तबला वादक हैं। 6. ... नाथद्वारा घराने की एक विख्यात परन है।
1. लाला भवानी दास अजराड़ा घराने के मूल संस्थापक थे। 2. पंडित राम सहाय बनारस घराने के कलाकार थे। 3. अजराड़ा मेरठ जिले में है। 4. शाफात अहमद खाँ दिल्ली घराने के तबला वादक हुए। 5. हसमत खाँ एवं अकरम खाँ पंजाब घराने के विख्यात तबला वादक हैं। 6. 'परन' नाथद्वारा घराने की एक विख्यात परंपरा है।
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