तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन | Class 11 Sangeet Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 7 मिनट का पठन

तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन
भारत में संगीत का इतिहास राजाओं के दरबारों से जुड़ा हुआ है। जब राजाओं का शासन समाप्त हुआ और अंग्रेजों का शासन स्थापित हुआ, तब संगीतज्ञों और कलाकारों ने अपने परिवारों और शिष्यों को अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण देना शुरू किया। इस प्रकार विभिन्न संगीत शैलियों और वादन विधाओं का विकास हुआ। जब किसी प्रतिभाशाली कलाकार द्वारा किसी विशिष्ट शैली का निर्माण होता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी उसके वंश और शिष्य परंपरा में संरक्षित रहती है, तो उसे घराना कहा जाता है। उत्तर भारतीय संगीत में घरानों की शुरुआत मुगल काल के अंतिम दौर से मानी जाती है। घरानों ने संगीत की शैलीगत विशेषताओं को संरक्षित करने, प्रचार-प्रसार करने और संगीत की विविधता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तबला वाद्य का इतिहास लगभग 350 वर्ष पुराना है। इस दौरान छह प्रमुख तबला घराने विकसित हुए, जिनकी अपनी विशिष्ट वादन शैलियाँ हैं। इन घरानों की वादन शैलियों को बाज कहा जाता है। बाजों को दो मुख्य भागों में बांटा गया है: पश्चिम बाज (दिल्ली और अजराड़ा घराने) और पूर्व बाज (लखनऊ, फर्रुखाबाद, बनारस घराने)। इसके अतिरिक्त पंजाब घराने का विकास स्वतंत्र रूप से हुआ। प्रत्येक घराने की अपनी विशिष्ट शैली, ताल-प्रयोग, और तकनीक होती है, जो तबले के साहित्य को समृद्ध बनाती है। पखावज भी भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख ताल वाद्य है, जिसके भी कई प्रसिद्ध घराने हैं। पखावज के घरानों की वादन शैली और ताल-प्रयोगों में विविधता देखने को मिलती है। इस प्रकार तबला और पखावज के घराने भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा के संरक्षक हैं।
📊 Diagram: तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन
🔗 Connection: इस परिचय के बाद, हम तबला के प्रमुख घरानों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
Table on page 8 (20×10)
| बि | हू | ही | का | ल | बे | लि | या | ||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | र | बा | त | ||||||
| रा | स | ली | ला | ||||||
| धु | प | द | ति | ल्ला | ना | व | |||
| गो | नी | ||||||||
| बा | र | ह | मा | सा | धू | म | र | रा | |
| बं | डां | द | जा | ता | ग | ||||
| द | डि | रा | व | र्ण | न | म् | |||
| लां | गु | रि | या | हो | ली | म् | |||
| क | ज | री | |||||||
| आ | वृ | त्ति | स | ठे | ल | ||||
| व | बि | ष | म | ती | का | य | दा | ||
| त | टु | ञ | स्व | ||||||
| न | प | क | ड़ | ता | र | ता | ली | ||
| मु | ख | ड़ा | ल | प | |||||
| अ | पे | श | का | र | षा | स | |||
| व | आ | न्दो | ल | नं | ड़ | म्पृ | |||
| आ | रो | ह | औ | ड़ | व | र्ण | |||
| अ | नो | ह | त | मो | ह | रा | ग |
Table on page 8 (10×10)
| क | वा | य | लि | न | क्का | रा | |||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| हा | र | मो | नि | य | म | मं | |||
| ता | सि | जी | इ | ||||||
| ढो | ल | क | ता | न | पु | रा | स | ||
| पु | ष्क | र | इ | क | ता | रा | |||
| त | ब | ला | मृ | ना | प | खा | ब | ज | |
| बि | दं | द | मो | ना | ल | ||||
| ल | धुँ | ना | ग | स्व | र | म् | त | ||
| खो | घ | ट | मृ | र | चं | रं | |||
| दि | ल | रू | बा | मृ | ग | ग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. पंजाब घराने के कुछ कलाकारों के नाम बताइए। 2. सामता प्रसाद, राम जी मिश्र और गोपाल मिश्र किस घराने के तबला वादक हैं? 3. घराना शब्द से आप क्या समझते हैं? 4. गुदई महाराज का दूसरा नाम क्या था? 5. बायाँ या डांगे का व्यवहार किस घराने में कलात्मक रूप से किया गया है?
1. पंजाब घराने के कुछ प्रसिद्ध कलाकार हैं: अनोखे लाल मिश्र, किशन महाराज आदि। 2. सामता प्रसाद, राम जी मिश्र और गोपाल मिश्र बनारस घराने के तबला वादक हैं। 3. घराना शब्द संगीत में एक विशिष्ट शैली या परंपरा को दर्शाता है, जो वाद्य वादन या गायन की विशिष्ट विधा और तकनीक को परिभाषित करता है। यह आमतौर पर एक परिवार या गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ा होता है। 4. गुदई महाराज का दूसरा नाम था - गुदई महाराज। (यदि अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध हो तो उल्लेख करें।) 5. बायाँ या डांगे का व्यवहार दिल्ली घराने में कलात्मक रूप स
1. दिल्ली घराने में तबला किस प्रकार बजाया जाता है? 2. पंजाब घराने में तबला वादन की विधि का वर्णन कीजिए। 3. बनारस घराने के तबला वादक किन-किन विधाओं के साथ बजाने की क्षमता रखते हैं? 4. नाथद्वारा घराने के कुछ पखावज वादकों के नाम बताइए।
1. दिल्ली घराने में तबला बजाने की शैली में स्पष्टता, लयबद्धता और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें बायाँ हाथ (डांगा) की कलात्मकता और दायाँ हाथ (बायाँ) की त्वरित गति का समन्वय होता है। इस घराने की वादन शैली में ठोस ताल और परिष्कृत परन प्रमुख होते हैं।
2. पंजाब घराने में तबला वादन की विधि में जोरदार और गतिशील ताल वादन होता है। इस घराने की विशेषता है कि इसमें जोरदार और स्पष्ट ध्वनि उत्पन्न करने के लिए हथेली और उंगलियों का विशेष प्रयोग किया जाता है। यहां के वादक तेज गति और जटिल परनों
1. अनोखे लाल मिश्र एवं किशन महाराज पंजाब घराने के तबला वादक हैं। 2. दिल्ली घराने के मूल पुरुष उत्ताद सिद्धार खाँ डाड़ी थे। 3. घराना शब्द राजमहलों से आया है। 4. लतीफ अहमद खाँ बनारस घराने के तबला वादक हैं। 5. दिल्ली घराने का जन्म अकबर के काल में हुआ।
1. सही - अनोखे लाल मिश्र एवं किशन महाराज पंजाब घराने के प्रसिद्ध तबला वादक हैं। 2. गलत - दिल्ली घराने के मूल पुरुष उत्ताद सिद्धार खाँ डाड़ी नहीं थे। 3. सही - घराना शब्द राजमहलों से आया है, जो संगीत की परंपरा को दर्शाता है। 4. सही - लतीफ अहमद खाँ बनारस घराने के प्रसिद्ध तबला वादक थे। 5. सही - दिल्ली घराने का जन्म अकबर के काल में हुआ था।
1. लाला भवानी दास ... घराने के मूल संस्थापक थे। 2. पंडित राम सहाय ... घराने के कलाकार थे। 3. अजराड़ा ... जिले में है। 4. शाफात अहमद खाँ ... घराने के तबला वादक हुए। 5. हसमत खाँ एवं अकरम खाँ ... घराने के विख्यात तबला वादक हैं। 6. ... नाथद्वारा घराने की एक विख्यात परन है।
1. लाला भवानी दास अजराड़ा घराने के मूल संस्थापक थे। 2. पंडित राम सहाय बनारस घराने के कलाकार थे। 3. अजराड़ा मेरठ जिले में है। 4. शाफात अहमद खाँ दिल्ली घराने के तबला वादक हुए। 5. हसमत खाँ एवं अकरम खाँ पंजाब घराने के विख्यात तबला वादक हैं। 6. 'परन' नाथद्वारा घराने की एक विख्यात परंपरा है।
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