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हिंदुस्तानी संगीत की गायन एवं वादन विधाएँ | Class 11 Sangeet Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

हिंदुस्तानी संगीत की गायन एवं वादन विधाएँ | Class 11 Sangeet Notes

हिंदुस्तानी संगीत की गायन एवं वादन विधाएँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of हिंदुस्तानी संगीत की गायन एवं वादन विधाएँ from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

ध्रुपद

ध्रुपद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन और गंभीर गायन विधा है। इसका नाम दो शब्दों 'ध्रु' और 'पद' से बना है, जिसका अर्थ है ऐसा पद जो अटल और स्थिर हो। ध्रुपद का शाब्दिक अर्थ है ईश्वर की उपासना में गाया जाने वाला पद्य। महान संगीतकार तानसेन के अनुसार ध्रुपद चार तुकों से युक्त, शुद्ध अक्षरों वाली और नवरसों से युक्त रचना होती है।

ध्रुपद की बंदिशें प्रायः हिंदी, उर्दू तथा ब्रजभाषा में होती हैं, जिसमें हिंदी की बंदिशें अधिक प्रचलित हैं। प्राचीन काल में ध्रुपद गायकों को 'कलावंत' कहा जाता था। यह गायकी दमदार आवाज़, गमक और मीड़ के प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है। ध्रुपद की गायकी में कंठ और फेफड़ों पर विशेष जोर पड़ता है।

ध्रुपद की संगत में पखावज प्रमुख वाद्य है, हालांकि वर्तमान में तबले का भी प्रयोग होता है। ध्रुपद के साथ बजाए जाने वाले तालों में चौताल, सूलताल, तीव्रा, ब्रह्मताल आदि शामिल हैं। ध्रुपद की बंदिश के चार भाग होते हैं: स्थायी, अंतरा, संचारी और आभोग।

ध्रुपद की चार शैलियाँ या वाणियाँ हैं: खंडार, नौहार, डागुर और गोबरहार। गायन की शुरुआत नोम-तोम जैसे बोलों से मंद्र, मध्य और तार सप्तक में आलाप से होती है। इसके बाद बंदिश गाई जाती है। ध्रुपद गायन में विभिन्न लयकारियाँ जैसे आड़, दुगुन, तिगुन, चौगुन, छहगुन, अठगुन आदि का प्रयोग होता है।

ध्रुपद में मुकीं और तानें वर्जित होती हैं। भावों में वीर, रौद्र, शांत, शृंगार, करुण और भक्ति रस प्रमुख हैं। प्रसिद्ध ध्रुपद गायकों में उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, बहराम खान, बंदे खान, जाकिरुद्दीन मल्लिक आदि शामिल हैं।

📊 Diagram: चित्र 4.1—उस्ताद वासिफुद्दीन डागर – ध्रुपद कलाकार; Reprint 2026-27

🧪 Activity: किसी ध्रुपद गायक से मिलकर उनके गायन की विशेषताओं, ताल, स्वर और शब्दों के प्रयोग के बारे में जानकारी प्राप्त करें।

🔗 Connection: ध्रुपद के बाद ख्याल गायन विधा की व्याख्या की जाती है जो आधुनिक और अधिक लचीली शैली है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भारत के अलावा किस देश में तराना गाया जाता है? कलाकार का नाम, एक तराना के शब्द स्वर एवं लय पर विचार करें। 2. किसी भी राग में, तीनताल में एक सरगम गीत की रचना करें।

1. भारत के अलावा तराना पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि देशों में भी गाया जाता है। प्रसिद्ध कलाकारों में उस्ताद अमजद अली खान, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित भीमसेन जोशी आदि का नाम लिया जा सकता है। तराना के शब्द सामान्यतः सार, ता, ना, दम आदि होते हैं जो लय के अनुसार गाए जाते हैं। लय में तीव्रता और ताल का पालन होता है।

2. उदाहरण स्वरूप राग यमन में तीनताल में सरगम गीत:

स्थायी: सा रे ग म प ध नि सां

अंतरा: नि ध प म ग रे सा

यह सरगम गीत तीनताल की 16 मात्राओं में व्यवस्थित है और राग यमन के स्वर अनुसा

1. ध्रुपद गायन शैली की उत्पत्ति पर प्रकाश डालते हुए उसकी विशेषताओं को विस्तार से समझाइए। 2. स्वस्मालिका किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। 3. ख्याल गायन शैली का प्रणेता किन्हें माना जाता है? इस गायन शैली के क्रमिक विकास का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। 4. लक्षण गीत में प्रायः राग के किन लक्षणों का उल्लेख होता है? सोदाहरण समझाइए। 5. गत किसे कहते हैं? गत के प्रकारों को विस्तारपूर्वक लिखिए। 6. शास्त्रीय संगीत में तराना गायन शैली की महत्ता पर प्रकाश डालिए।

1. ध्रुपद गायन शैली की उत्पत्ति प्राचीन काल में हुई मानी जाती है। यह शैली मुख्यतः मंदिरों और दरबारों में प्रचलित थी। इसकी विशेषताएँ हैं - गंभीरता, स्थिरता, और शुद्धता। ध्रुपद में स्वर की शुद्धता और ताल की सटीकता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह शैली पखावज के साथ गाई जाती है और इसमें वाणी, मिजाज, और प्राकृति की चार शैलियाँ होती हैं।

2. स्वस्मालिका वह रचना होती है जिसमें राग के तीनों सप्तकों (मंद, मध्यम, तीव्र) में स्वर व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि राग में सा, रे, ग,

सही या गलत बताइए— 1. ध्रुपद शैली का गायन प्रायः पखावज जैसे गंभीर वाद्य के साथ किया जाता है। (सही/गलत) 2. प्राचीन काल में भारतीय संगीत में केवल दो प्रकार की गीतियाँ प्रचलित थीं। (सही/गलत) 3. ख्याल गायन के अंतर्गत द्रुत ख्याल विलंबित लय में गाया जाता है। (सही/गलत) 4. तानरस खाँ एवं नत्थू खाँ के तराने अत्यंत प्रचलित हैं। (सही/गलत) 5. राग के चलन को ध्यान में रखकर तीनों सप्तकों में रची गई स्वस्मालिका राग को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करती है। (सही/गलत) 6. ध्रुपद की चार शैलियाँ थीं जिन्हें वाणी कहते थे। (सही/गलत) 7. ऐसी मान्यता है कि जौनपुर के बादशाह सुल्तान हुसैन शाक्ती ने ख्याल शैली का आविष्कार किया। (सही/गलत) 8. झूमरा और तिलवाड़ा तालों का प्रयोग ध्रुपद गायन के साथ किया जाता है। (सही/गलत)

1. सही - ध्रुपद शैली में पखावज का प्रयोग होता है क्योंकि यह गंभीर और स्थिरता प्रदान करता है। 2. गलत - प्राचीन काल में भारतीय संगीत में अनेक प्रकार की गीतियाँ प्रचलित थीं, केवल दो नहीं। 3. गलत - द्रुत ख्याल तेज लय में गाया जाता है, विलंबित लय में विलंबित ख्याल गाया जाता है। 4. सही - तानरस खाँ और नत्थू खाँ के तराने बहुत प्रसिद्ध हैं। 5. सही - स्वस्मालिका राग को तीनों सप्तकों में प्रस्तुत करके राग की सम्पूर्णता समझने में मदद मिलती है। 6. सही - ध्रुपद की चार शैलियाँ वाणी कहलाती थीं। 7. सही - ऐसी मान

रिवत्त स्थानों की पूर्ति कीजिए— 1. प्राचीन काल में ध्रुपद गायकों को _________________ कहा जाता था। 2. अभ्य नारायण मल्लिक _________________ गायन शैली के प्रमुख कलाकार हैं। 3. सुल्तान हुसैन शाह शकॉ को _________________ गायन शैली का प्रवर्तक माना जाता है। 4. राग में प्रयोग की जाने वाली स्वरों की तालबद्ध रचना को _________________ कहते हैं। 5. मधादनुल मुसीकी नामक ग्रंथ में वाणियों ध्रुपद की _________________ उल्लेख मिलता है। 6. तिलवाड़ा, झूमरा आदि तालों के साथ प्रायः _________________ ख्याल गाए जाते हैं। 7. _________________ नामक तालबद्ध रचना में बंदिश के बोल नहीं होते, केवल स्वर होते हैं। 8. जिस रचना में राग के वादी-संवादी, गायन समय तथा अन्य लक्षण का वर्णन हो उसे _________________ कहते हैं।

1. ध्रुपदिया 2. ध्रुपद 3. ख्याल 4. स्वस्मालिका 5. चार वाणियों का 6. विलंबित 7. आलाप 8. लक्षण गीत

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