Sangeetकक्षा 11ध्वनिहिंदी

ध्वनि | Class 11 Sangeet Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 7 मिनट का पठन

ध्वनि | Class 11 Sangeet Notes

ध्वनि – this guide gives you a concise, exam-ready overview of ध्वनि from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

श्रुति

संगीत में श्रुति वह ध्वनि है जो कानों को स्पष्ट और अलग-अलग सुनाई दे। श्रुति का अर्थ है 'जिसे सुना जा सके'। भारतीय संगीतशास्त्र के अनुसार, कुल 22 श्रुतियाँ मानी गई हैं। ये श्रुतियाँ संगीत के स्वर बनाने में आधार होती हैं। भरतमुनि के अनुसार हृदय स्थान में 22 नाड़ियाँ हैं, इसी कारण 22 श्रुतियाँ मानी गई हैं। इन 22 श्रुतियों में से 7 मुख्य श्रुतियाँ स्वर के रूप में प्रतिष्ठित हैं। प्राचीन काल में स्वरों की स्थापना अंतिम श्रुति पर की जाती थी, जबकि आधुनिक काल में पंडित भातखंडे ने प्रथम श्रुति को आधार बनाया। 22 श्रुतियों के नाम इस प्रकार हैं: तीव्रा, दयावती, क्रोधा, मार्जनी, आलापिनी, उग्रा, कुमुद्वती, रंजनी, वज्रिका, श्रिति, मंदती, श्रोभिणी, मंदा, रक्तिका, प्रसारिणी, रक्ता, रोहिणी, छंदोवती, रौद्धी, प्रीति, संदीपनी, रम्या। प्रत्येक श्रुति की अपनी एक आंदोलन संख्या होती है, जो उसकी ध्वनि की तीव्रता और ऊँचाई को दर्शाती है।

📊 Diagram: Table on page 3 listing 22 श्रुतियों के नाम; Table on page 4 showing प्राचीन कालीन स्वर, आधुनिक स्वर और आंदोलन संख्या; Figure on page 5 showing आधुनिक स्वर व्यवस्था।

🧪 Activity: 22 श्रुतियों के नाम और उनकी आंदोलन संख्या याद करें और सूची बनाएं।

🔗 Connection: श्रुति से स्वर की उत्पत्ति होती है, अतः अगला अनुभाग स्वर की परिभाषा और स्वर प्रणाली पर विस्तार से चर्चा करता है।

Table on page 3 (6×8)

1.तीव्रा7.कुमुद्वती13.मंदा19.रौद्धी
2.दयावती8.रंजनी14.रक्तिका20.प्रीति
3.क्रोधा9.वज्रिका15.प्रसारिणी21.संदीपनी
4.मार्जनी10.श्रिति16.रक्ता22.रम्या
5.आलापिनी11.मंदती17.रोहिणी
6.उग्रा12.श्रोभिणी18.छंदोवती

Table on page 4 (16×5)

क्र. सं.श्रुतियों के नामप्राचीन कालीन स्वरआधुनिक स्वरआंदोलन संख्या
1.तीव्राषड्ज240
2.कुमुदती
3.मंदा
4.छंदोवतीषड्ज
5.दयावतीरिषभ270
6.रंजनी
7.रक्तिकारिषभ
8.रौद्धीगंधार
9.क्रोधागंधार
10.वन्निकामध्यम320
11.प्रसारिणी
12.प्रीति
13.मार्जनीमध्यम
14.क्षितिपंचम360
15.रक्ता

Table on page 5 (7×5)

16.संदीपनी
17.आलापिनीपंचम
18.मदंतीधैवत405
19.रोहिणी
20.रम्याधैवत
21.उग्रानिषाद
22.श्रोभिणीनिषाद

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. संगीत कला का माध्यम है इसकी पुष्टिकरण करें। 2. नाद किसे कहते हैं? 3. श्रुति को परिभाषित करते हुए श्रुतियों की संख्या बताइए। 4. मूच्छना किसे कहते हैं? 5. लय को परिभाषित करते हुए लय के प्रकार बताइए। 6. भातखण्डे ताललिपि के अनुसार सम को परिभाषित करते हुए, उसका चिह्न लिखिए। 7. वर्ण से आप क्या समझते हैं? 8. शार्डगदेव ने संगीत रत्नाकर में राग की क्या परिभाषा दी है? 9. मतांग मुनि ने रागों के कितने भेद बताए हैं? 10. अष्टक किसे कहते हैं? 11. नाद की जाति अथवा गुण से आप क्या समझते हैं। उदाहरण सहित समझाइए। 12. 22 श्रुतियों के नाम व उनकी आंदोलन संख्या लिखिए। 13. आधुनिक काल के स्वर-स्थापना के अनुसार, 22 श्रुतियों में सात स्वर का स्केल बनाकर दिखाइए। 14. संगीत रत्नाकर में वर्ण को किस तरह परिभाषित किया गया है? 15. राग के सभी लक्षणों की उदाहरण सहित विवेचना कीजिए। 16. औड़व-संपूर्ण जाति का राग बताएँ एवं उसका विवरण कीजिए। 17. ग्राम को परिभाषित करते हुए ग्राम के प्रकारों को समझाइए। 18. मूच्छना एवं मूच्छना के प्रकारों को विस्तार से समझाइए। 19. मतांग कृत बृहद्देशी में वर्णित विषयों एवं सिद्धांतों को विस्तार से समझाइए। 20. हिंदुस्तानी संगीत में ताल के महत्व को समझाएँ। किसी एक ताल का विवरण देते हुए उसका ठेका लिखिए।

1. संगीत कला का माध्यम ध्वनि है क्योंकि संगीत ध्वनि की विभिन्नताओं से उत्पन्न होता है। ध्वनि के माध्यम से भाव, लय, स्वर आदि प्रकट होते हैं। 2. नाद वह ध्वनि है जो किसी वस्तु के कम्पन से उत्पन्न होती है। 3. श्रुति वह सूक्ष्मतम ध्वनि अंतर है जिसे कान सुन सकता है। श्रुतियों की संख्या 22 मानी जाती है। 4. मूच्छना वह प्रक्रिया है जिसमें स्वर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक खींचा जाता है। 5. लय वह क्रमबद्धता है जिसमें ध्वनि की मात्राएँ नियमित अंतराल पर आती हैं। लय के प्रकार- स्थायी लय, चल लय, विलंबित लय।

सही या गलत बताइए— 1. आहत तथा अनाहत नाद के भेद हैं। (सही/गलत) 2. विद्वानों ने श्रुतियों की संख्या 24 बताई है। (सही/गलत) 3. भरतमुनि के अनुसार रे-ध की चार श्रुतियाँ मानी गयी हैं। (सही/गलत) 4. मंद्र, मध्य तथा तार सप्तक के प्रकार हैं। (सही/गलत) 5. राग यमन की जाति औड्व-संपूर्ण है। (सही/गलत) 6. खाली को दक्षिण भारतीय ताल पद्धति में विसर्जितम कहते हैं। (सही/गलत) 7. किसी भी ताल की प्रथम तथा अंतिम मात्रा को सम कहते हैं। (सही/गलत) 8. चारताल में 12 मात्राएँ होती हैं। (सही/गलत) 9. विद्वानों ने श्रुतियों की संख्या 26 निर्धारित की है। (सही/गलत) 10. नाद की जाति के आधार पर वाद्य या व्यक्ति को बिना देखे उसकी आवाज़ सुनकर हम यह आसानी से पहचान जाते हैं कि आवाज़ किसकी है। (सही/गलत) 11. किसी भी राग में षड्ज स्वर कभी वर्जित नहीं होता। (सही/गलत) 12. जब एक ही स्वर बार-बार उच्चारित होता है, तो उसे संचारी वर्ण कहते हैं। (सही/गलत)

1. सही 2. गलत (श्रुतियों की संख्या 22 मानी जाती है) 3. सही 4. सही 5. सही 6. सही 7. गलत (सिर्फ प्रथम मात्रा को सम कहते हैं) 8. गलत (चारताल में 16 मात्राएँ होती हैं) 9. गलत 10. सही 11. सही 12. सही

रिवत्त स्थानों की पूर्ति कीजिए— 1. संगीत का आधार __________ है, नाद से __________ , श्रुति से __________ तथा स्वर से __________ की उत्पत्ति होती है। 2. जब आघात अथवा घर्षण से ध्वनि उत्पन्न होती है उसे __________ नाद कहते हैं। 3. सात स्वरों के समूह को __________ कहते हैं। 4. योऽसौ ध्वनि __________ , __________ विभूषित। 5. जिस राग में छह स्वर गाये जाते हैं वह __________ जाति का राग होता है। 6. मतंग __________ वीणा के अविष्कारक माने जाते हैं। 7. वर्तमान काल में पंडित भातखण्डे द्वारा स्वर की स्थापना श्रुतियों में से __________ श्रुति पर की गई। 8. सात स्वरों को क्रमानुसार आरोह तथा अवरोह में प्रयोग करने को __________ कहते हैं। 9. षड्ज ग्राम का आरंभिक एवं प्रधान स्वर __________ है। 10. भीमपलासी __________ जाति का राग है। 11. तीव्रा ताल में __________ मात्राएँ होती हैं।

1. ध्वनि, स्वर, वर्ण, राग 2. आहत 3. सप्तक 4. नाद, रस 5. औड़व 6. मतांग मुनि 7. 10वीं 8. राग 9. षड्ज 10. खमाज 11. 7

विभाग 'अ' के शब्दों का 'आ' विभाग में दिए गए शब्दों से मिलान करें— (क) आहत (ख) रौद्धी (ग) औड्व (घ) उरमंदा (ङ) विलंबित (च) सशब्द क्रिया (छ) अद्भुत (ज) राग बागेश्री (झ) झपताल (ञ) एकताल आ विभाग के शब्द: 1. 12 मात्रा 2. जाति 3. लय 4. नाद 5. ताली 6. रस 7. श्रुति 8. 2323 9. प्रथम मूच्छना 10. काफी थाट

{'(क) आहत': '4. नाद', '(ख) रौद्धी': '7. श्रुति', '(ग) औड्व': '2. जाति', '(घ) उरमंदा': '3. लय', '(ङ) विलंबित': '10. काफी थाट', '(च) सशब्द क्रिया': '9. प्रथम मूच्छना', '(छ) अद्भुत': '6. रस', '(ज) राग बागेश्री': '8. 2323', '(झ) झपताल': '1. 12 मात्रा', '(ञ) एकताल': '5. ताली'}

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