NCERTCh 3निःशुल्क

Chapter 3

🎓 Class 11📖 Hindustani Sangeet Gayan Evam Vadan📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 10Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

ध्वनि

व्याख्या

ध्वनि

ध्वनि संगीत की वह मूलभूत इकाई है जिसके बिना संगीत की कल्पना असंभव है। ध्वनि का अर्थ है नाद, जो किसी वस्तु के कंपन से उत्पन्न होता है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आसपास के वायु कणों को प्रभावित करती है और इस प्रकार ध्वनि तरंगों का संचार होता है। ध्वनि के अनेक प्रकार होते हैं, जो हमें विभिन्न प्राकृतिक और मानवीय स्रोतों से सुनाई देते हैं, जैसे मेघ गर्जन, पक्षियों की कलरव, नदी की कलकल, वर्षा की बूँदों की आवाज़, फेरी वालों की हाँक आदि। ध्वनि का संचारण ठोस, द्रव और वायु माध्यमों से होता है और इसके लिए माध्यम का होना आवश्यक है। मनुष्य के कान लगभग 20 हर्ट्ज से 20 किलोहर्ट्ज तक की आवृत्ति वाली ध्वनियाँ सुन सकते हैं। ध्वनि के स्रोत विभिन्न हो सकते हैं, जैसे तंत्री वाद्यों के तार, तबले पर आघात, बाँसुरी में हवा के कंपन, झाँझ में धातु के कंपन, और मनुष्य के कंठ में स्वर तंत्रियों के कंपन। ध्वनि दो प्रकार की होती है—मधुर और अमधुर (कोलाहल)। मधुर ध्वनि संगीत में प्रयुक्त होती है और अमधुर ध्वनि असंगीतमय होती है।

  • ध्वनि वस्तु के कंपन से उत्पन्न होती है।
  • ध्वनि के संचार के लिए माध्यम आवश्यक होता है।
  • मनुष्य 20 हर्ट्ज से 20 किलोहर्ट्ज तक की ध्वनि सुन सकता है।
  • ध्वनि के स्रोत तंत्री वाद्य, तबला, बाँसुरी, झाँझ, और मानव कंठ हो सकते हैं।
  • ध्वनि दो प्रकार की होती है: मधुर (संगीतोपयोगी) और अमधुर (कोलाहल)।
  • 📌 ध्वनि: किसी वस्तु के कंपन से उत्पन्न होने वाली तरंगें।
  • 📌 मधुर ध्वनि: संगीत में प्रयुक्त सुखद ध्वनि।
  • 📌 अमधुर ध्वनि: असंगीतमय या कोलाहल वाली ध्वनि।

नाद

अवधारणा

नाद

नाद संगीत का आधार है। यह नियमित और स्थिर आंदोलन संख्या वाली ध्वनि है। नाद से श्रुति, श्रुति से स्वर और स्वर से राग की उत्पत्ति होती है। नाद के दो प्रकार होते हैं—आहत नाद और अनाहत नाद। आहत नाद वह ध्वनि है जो किसी आघात या घर्षण के कारण उत्पन्न होती है, जैसे तबले पर हाथ मारने से उत्पन्न ध्वनि। संगीत में प्रयुक्त नाद इसी प्रकार का होता है। अनाहत नाद वह ध्वनि है जो बिना किसी बाहरी आघात के उत्पन्न होती है, जिसे सुनना संभव नहीं है, परंतु अनुभव किया जा सकता है। यह प्रकृति में सदैव विद्यमान होता है। नाद की तीन प्रमुख विशेषताएँ हैं: ऊँचा-नीचापन (तारता), छोटा-बड़ापन (तीव्रता), और जाति अथवा गुण। ऊँचा-नीचापन से तात्पर्य है कि नाद की ध्वनि की ऊँचाई या नीचाई होती है। तीव्रता से तात्पर्य है ध्वनि की जोर या कमज़ोरी, जो उसकी दूर तक सुनाई देने की क्षमता को प्रभावित करती है। जाति या गुण से तात्पर्य है कि ध्वनि की पहचान उसके स्रोत से की जा सकती है, जैसे सितार की आवाज़ या मानव की आवाज़।

  • नाद नियमित और स्थिर कंपन वाली ध्वनि है।
  • नाद के दो प्रकार: आहत नाद और अनाहत नाद।
  • आहत नाद बाहरी आघात से उत्पन्न होता है, संगीत में प्रयुक्त।
  • अनाहत नाद बिना आघात के उत्पन्न होता है, सुनाई नहीं देता।
  • नाद की विशेषताएँ: ऊँचा-नीचापन, तीव्रता, और जाति।
  • 📌 नाद: नियमित और स्थिर कंपन वाली ध्वनि।
  • 📌 आहत नाद: आघात से उत्पन्न ध्वनि।
  • 📌 अनाहत नाद: बिना आघात के उत्पन्न ध्वनि।

श्रुति

अवधारणा

श्रुति

संगीत में श्रुति वह ध्वनि है जो कानों को स्पष्ट और अलग-अलग सुनाई दे। श्रुति का अर्थ है 'जिसे सुना जा सके'। भारतीय संगीतशास्त्र के अनुसार, कुल 22 श्रुतियाँ मानी गई हैं। ये श्रुतियाँ संगीत के स्वर बनाने में आधार होती हैं। भरतमुनि के अनुसार हृदय स्थान म

अभ्यास प्रश्नChapter 3

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. संगीत कला का माध्यम है इसकी पुष्टिकरण करें। 2. नाद किसे कहते हैं? 3. श्रुति को परिभाषित करते हुए श्रुतियों की संख्या बताइए। 4. मूच्छना किसे कहते हैं? 5. लय को परिभाषित करते हुए लय के प्रकार बताइए। 6. भातखण्डे ताललिपि के अनुसार सम को परिभाषित करते हुए, उसका चिह्न लिखिए। 7. वर्ण से आप क्या समझते हैं? 8. शार्डगदेव ने संगीत रत्नाकर में राग की क्या परिभाषा दी है? 9. मतांग मुनि ने रागों के कितने भेद बताए हैं? 10. अष्टक किसे कहते हैं? 11. नाद की जाति अथवा गुण से आप क्या समझते हैं। उदाहरण सहित समझाइए। 12. 22 श्रुतियों के नाम व उनकी आंदोलन संख्या लिखिए। 13. आधुनिक काल के स्वर-स्थापना के अनुसार, 22 श्रुतियों में सात स्वर का स्केल बनाकर दिखाइए। 14. संगीत रत्नाकर में वर्ण को किस तरह परिभाषित किया गया है? 15. राग के सभी लक्षणों की उदाहरण सहित विवेचना कीजिए। 16. औड़व-संपूर्ण जाति का राग बताएँ एवं उसका विवरण कीजिए। 17. ग्राम को परिभाषित करते हुए ग्राम के प्रकारों को समझाइए। 18. मूच्छना एवं मूच्छना के प्रकारों को विस्तार से समझाइए। 19. मतांग कृत बृहद्देशी में वर्णित विषयों एवं सिद्धांतों को विस्तार से समझाइए। 20. हिंदुस्तानी संगीत में ताल के महत्व को समझाएँ। किसी एक ताल का विवरण देते हुए उसका ठेका लिखिए।

उत्तर:

1. संगीत कला का माध्यम ध्वनि है क्योंकि संगीत ध्वनि की विभिन्नताओं से उत्पन्न होता है। ध्वनि के माध्यम से भाव, लय, स्वर आदि प्रकट होते हैं। 2. नाद वह ध्वनि है जो किसी वस्तु के कम्पन से उत्पन्न होती है। 3. श्रुति वह सूक्ष्मतम ध्वनि अंतर है जिसे कान सुन सकता है। श्रुतियों की संख्या 22 मानी जाती है। 4. मूच्छना वह प्रक्रिया है जिसमें स्वर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक खींचा जाता है। 5. लय वह क्रमबद्धता है जिसमें ध्वनि की मात्राएँ नियमित अंतराल पर आती हैं। लय के प्रकार- स्थायी लय, चल लय, विलंबित लय। 6. भातखण्डे ताललिपि में सम वह मात्रा है जिस पर ताल की शुरुआत होती है, इसका चिह्न 'X' होता है। 7. वर्ण संगीत में स्वर या ध्वनि के छोटे-छोटे भाग होते हैं। 8. शार्डगदेव ने राग को स्वर-समूह कहा है जो भाव उत्पन्न करता है। 9. मतांग मुनि ने रागों के 6 भेद बताए हैं। 10. अष्टक आठ मात्राओं का समूह है। 11. नाद की जाति से तात्पर्य ध्वनि के प्रकार से है, जैसे आहत नाद (घर्षण से) और अनाहत नाद (स्वर से)। उदाहरण स्वरूप तबला की आवाज। 12. 22 श्रुतियाँ हैं- शुद्ध, क्षिप्र, मन्द आदि, प्रत्येक की आंदोलन संख्या अलग होती है। 13. 22 श्रुतियों में से सात स्वर का स्केल- सा, रे, ग, म, प, ध, नि। 14. संगीत रत्नाकर में वर्ण को स्वर का समूह कहा गया है। 15. राग के लक्षण- स्वर, आरोह-अवरोह, वादी-संवादी, समय, जाति। उदाहरण सहित समझाइए। 16. औड़व-संपूर्ण जाति का राग- यमन, जिसमें छह स्वर आरोह में और सात स्वर अवरोह में होते हैं। 17. ग्राम वह स्वर समूह है जो राग की नींव होता है। ग्राम के प्रकार- शदज ग्राम, मद्धम ग्राम। 18. मूच्छना स्वर को खींचने की कला है, इसके प्रकार- सरल मूच्छना, झटपट मूच्छना। 19. मतांग कृत बृहद्देशी में वर्ण, राग, ताल आदि विषयों का विस्तृत विवरण है। 20. ताल संगीत में लय का आधार है, जैसे ताली-खाली से ताल की पहचान होती है। उदाहरण- तिनताल का ठेका- धि धि ता ता धि धि ता ता।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर संगीत के सिद्धांतों एवं परिभाषाओं के आधार पर दिया गया है। उदाहरणों सहित समझाना आवश्यक है।

MediumNCERT
Q2.सही या गलत बताइए— 1. आहत तथा अनाहत नाद के भेद हैं। (सही/गलत) 2. विद्वानों ने श्रुतियों की संख्या 24 बताई है। (सही/गलत) 3. भरतमुनि के अनुसार रे-ध की चार श्रुतियाँ मानी गयी हैं। (सही/गलत) 4. मंद्र, मध्य तथा तार सप्तक के प्रकार हैं। (सही/गलत) 5. राग यमन की जाति औड्व-संपूर्ण है। (सही/गलत) 6. खाली को दक्षिण भारतीय ताल पद्धति में विसर्जितम कहते हैं। (सही/गलत) 7. किसी भी ताल की प्रथम तथा अंतिम मात्रा को सम कहते हैं। (सही/गलत) 8. चारताल में 12 मात्राएँ होती हैं। (सही/गलत) 9. विद्वानों ने श्रुतियों की संख्या 26 निर्धारित की है। (सही/गलत) 10. नाद की जाति के आधार पर वाद्य या व्यक्ति को बिना देखे उसकी आवाज़ सुनकर हम यह आसानी से पहचान जाते हैं कि आवाज़ किसकी है। (सही/गलत) 11. किसी भी राग में षड्ज स्वर कभी वर्जित नहीं होता। (सही/गलत) 12. जब एक ही स्वर बार-बार उच्चारित होता है, तो उसे संचारी वर्ण कहते हैं। (सही/गलत)
A.सही
B.गलत

उत्तर:

1. सही 2. गलत (श्रुतियों की संख्या 22 मानी जाती है) 3. सही 4. सही 5. सही 6. सही 7. गलत (सिर्फ प्रथम मात्रा को सम कहते हैं) 8. गलत (चारताल में 16 मात्राएँ होती हैं) 9. गलत 10. सही 11. सही 12. सही

व्याख्या:

प्रत्येक कथन का संगीत सिद्धांतों के अनुसार मूल्यांकन किया गया है। जैसे चारताल में 16 मात्राएँ होती हैं, इसलिए कथन 8 गलत है।

EasyNCERT
Q3.रिवत्त स्थानों की पूर्ति कीजिए— 1. संगीत का आधार __________ है, नाद से __________ , श्रुति से __________ तथा स्वर से __________ की उत्पत्ति होती है। 2. जब आघात अथवा घर्षण से ध्वनि उत्पन्न होती है उसे __________ नाद कहते हैं। 3. सात स्वरों के समूह को __________ कहते हैं। 4. योऽसौ ध्वनि __________ , __________ विभूषित। 5. जिस राग में छह स्वर गाये जाते हैं वह __________ जाति का राग होता है। 6. मतंग __________ वीणा के अविष्कारक माने जाते हैं। 7. वर्तमान काल में पंडित भातखण्डे द्वारा स्वर की स्थापना श्रुतियों में से __________ श्रुति पर की गई। 8. सात स्वरों को क्रमानुसार आरोह तथा अवरोह में प्रयोग करने को __________ कहते हैं। 9. षड्ज ग्राम का आरंभिक एवं प्रधान स्वर __________ है। 10. भीमपलासी __________ जाति का राग है। 11. तीव्रा ताल में __________ मात्राएँ होती हैं।

उत्तर:

1. ध्वनि, स्वर, वर्ण, राग 2. आहत 3. सप्तक 4. नाद, रस 5. औड़व 6. मतांग मुनि 7. 10वीं 8. राग 9. षड्ज 10. खमाज 11. 7

व्याख्या:

प्रत्येक रिक्त स्थान में संगीत के मूलभूत शब्दों को भरना है जो पाठ में वर्णित हैं।

EasyNCERT
Q4.विभाग 'अ' के शब्दों का 'आ' विभाग में दिए गए शब्दों से मिलान करें— (क) आहत (ख) रौद्धी (ग) औड्व (घ) उरमंदा (ङ) विलंबित (च) सशब्द क्रिया (छ) अद्भुत (ज) राग बागेश्री (झ) झपताल (ञ) एकताल आ विभाग के शब्द: 1. 12 मात्रा 2. जाति 3. लय 4. नाद 5. ताली 6. रस 7. श्रुति 8. 2323 9. प्रथम मूच्छना 10. काफी थाट

उत्तर:

{'(क) आहत': '4. नाद', '(ख) रौद्धी': '7. श्रुति', '(ग) औड्व': '2. जाति', '(घ) उरमंदा': '3. लय', '(ङ) विलंबित': '10. काफी थाट', '(च) सशब्द क्रिया': '9. प्रथम मूच्छना', '(छ) अद्भुत': '6. रस', '(ज) राग बागेश्री': '8. 2323', '(झ) झपताल': '1. 12 मात्रा', '(ञ) एकताल': '5. ताली'}

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द का सही मिलान संगीत के पारिभाषिक अर्थों के अनुसार किया गया है।

MediumNCERT
Q5.ध्वनि क्या है और यह संगीत में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

ध्वनि वह कंपन या आंदोलन है जो किसी ठोस, द्रव या वायु माध्यम से होकर संचारित होती है। संगीत की मूलभूत इकाई ध्वनि है। उदाहरण के लिए, तंत्री वाद्य के तारों का कंपन ध्वनि उत्पन्न करता है।

व्याख्या:

ध्वनि किसी वस्तु के कंपन से उत्पन्न होती है जो वायु या अन्य माध्यम से संचारित होती है। संगीत में ध्वनि के बिना संगीत की कल्पना असंभव है क्योंकि संगीत का आधार ध्वनि ही है। जैसे बाँसुरी में हवा के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।

Easy
Q6.निम्नलिखित में से कौन-सा ध्वनि के संचारण के लिए आवश्यक है?
A.A) कोई माध्यम होना चाहिए
B.B) केवल ठोस माध्यम होना चाहिए
C.C) केवल वायु माध्यम होना चाहिए
D.D) माध्यम की आवश्यकता नहीं होती

उत्तर:

कोई माध्यम होना चाहिए

व्याख्या:

ध्वनि के संचारण के लिए किसी न किसी माध्यम (ठोस, द्रव या वायु) की आवश्यकता होती है क्योंकि ध्वनि कंपन के माध्यम से संचारित होती है।

Easy
Q7.नाद के दो प्रकार कौन-कौन से हैं? उनके बीच मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

नाद के दो प्रकार हैं— आहत नाद और अनाहत नाद। आहत नाद वह ध्वनि है जो किसी आघात या घर्षण से उत्पन्न होती है, जैसे तबले पर हाथ मारने से। अनाहत नाद वह ध्वनि है जो बिना किसी बाहरी आघात के उत्पन्न होती है और जिसे सुना नहीं जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है।

व्याख्या:

आहत नाद किसी वस्तु के आघात या घर्षण से उत्पन्न होता है और संगीत में प्रयुक्त होता है। अनाहत नाद बिना किसी आघात के उत्पन्न होता है, यह प्रकृति में सदैव विद्यमान होता है और इसे सुनना संभव नहीं होता।

Medium
Q8.नाद की तीन विशेषताएँ क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

नाद की तीन विशेषताएँ हैं— (1) ऊँचा-नीचापन (तारता), (2) छोटा-बड़ापन (तीव्रता), और (3) जाति अथवा गुण। उदाहरण के लिए, सितार की आवाज़ और मानव की आवाज़ में नाद की जाति से अंतर होता है।

व्याख्या:

ऊँचा-नीचापन से तात्पर्य ध्वनि की ऊँचाई या नीचाई है। तीव्रता से मतलब ध्वनि की जोर या कमज़ोरी से है। जाति से ध्वनि के स्रोत की पहचान होती है, जैसे बाँसुरी और तबले की ध्वनि अलग होती है।

Medium