आधार ग्रंथ | Class 11 Sangeet Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

आधार ग्रंथ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of आधार ग्रंथ from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
महाभारत
महाभारत, जिसे कृष्णाद्वैपायन व्यास ने रचा, भारतीय साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण महाकाव्य है जो उस काल की सभ्यता, संस्कृति और संगीत की जानकारी प्रदान करता है। महाभारत काल में साम और गांधर्व दोनों प्रकार के गान प्रचलित थे। वैदिक शिक्षा में स्वर, पद, स्तोभ आदि का अध्ययन अनिवार्य था। ऋग्वेद की ऋचाओं को साम में परिवर्तित करने के लिए विभिन्न स्तोभाक्षरों जैसे 'हाऊ', 'हाई', 'अथ', 'इह', 'ई' आदि का प्रयोग होता था। साम गान को ईश्वर उपासना का प्रमुख साधन माना जाता था। संगीत कला को गांधर्व कहा जाता था, जिसमें गीत, वादन और नर्तन शामिल थे। सप्त स्वरों का प्रचलन था और पटह, भेरी, शंख, मृदंगम, दुंदुभि जैसे वाद्यों का उपयोग होता था। गंधर्व, किन्नर और राजाओं के निवास स्थानों में गीत और वाद्य की ध्वनि सदैव सुनाई देती थी। युधिष्ठिर की सभा में तुम्बुरु की प्रेमा पर गंधर्व और किन्नरों ने गायन प्रस्तुत किया था। संगीत जनजीवन का अभिन्न अंग था और विभिन्न उत्सवों में इसका प्रयोग होता था। तत्, अवनद्ध, घन और सुषिर वाद्यों के वर्गीकरण का उल्लेख मिलता है। वीणा की सप्ततंत्रियाँ सप्त शुद्ध स्वरों में मिलाई जाती थीं। तालज्ञ नामक लोग हाथ से ताल देते थे। शिव की आराधना में नृत्य और ताल का समुचित प्रयोग होता था। नट, नर्तक, गायक, सूत, मागध और कथावाचक को राजा और प्रजा दोनों की ओर से प्रोत्साहन मिलता था। मागध, सूत और वैतालिक मंगलगीतों से राजा की स्तुति करते थे। अर्जुन को गीत, वाद्य और नृत्य की शिक्षा देने हेतु नियुक्त किया गया था, जो गांध्वव विशारद थे। इस प्रकार महाभारत काल में संगीत विद्या का उच्च स्थान था और यह जन मानस की हृदयस्पर्शी कला थी।
📊 Diagram: चित्र 2.2—12वीं सदी की महाभारत, हलेथिदु, कर्नाटक
🧪 Activity: महाभारत काल में संगीत के विभिन्न पहलुओं और कलाकारों की भूमिका पर चर्चा।
🔗 Connection: यह अनुभाग नाट्यशास्त्र के महत्व और संगीत के शास्त्रीय सिद्धांतों की ओर मार्गदर्शन करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सामवेद का आर्थिक भाग और गान भाग किस प्रकार भिन्न हैं?
सामवेद का आर्थिक भाग ऋग्वेद की ऋचाओं का संग्रह मात्र है जबकि गान भाग साम के स्वरमय स्वरूप का द्योतक है। आर्थिक भाग में केवल पाठ्य सामग्री होती है, जबकि गान भाग में विधिपूर्वक स्वर सहित गान होता है।
साम गान के पाँच विभाग कौन-कौन से हैं और प्रत्येक विभाग का गायक कौन होता था?
साम गान के पाँच विभाग हैं: प्रस्ताव (प्रस्तोता गाता था), उद्गीथ (उद्गाता गाता था), प्रतिहार (प्रतिहतार्त गाता था), उपद्रव (मुख्य सामगायक गाता था), और निधन (प्रस्तोता, उद्गाता व प्रतिहतार्त मिलकर गाते थे)।
रामायण काल में वाद्य के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता था और उसमें कौन-कौन से वाद्य शामिल थे?
तूर्य; वेणु, शंख, दुंदुभि, भेरी, मृदंगम, पटह
महाभारत काल में संगीत कला को किस संज्ञा से जाना जाता था और इसमें कौन-कौन से अंग शामिल थे?
महाभारत काल में संगीत कला को 'गांधर्व' संज्ञा दी जाती थी, जिसमें गीत, वादन और नर्तन शामिल थे। यह कला धार्मिक एवं सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा थी।
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