Chapter 2
Chapter 2 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
सामवेद
व्याख्यासामवेद
सामवेद वेदकालीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसमें ऋग्वेद की कुछ ऋचाओं को गेय स्वरूप में संकलित किया गया है। सामवेद की रचना गान योग्य ऋचाओं के संकलन से हुई है, जो यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों में गाए जाते थे। ऋग्वेद की ऋचाओं के पाट्य स्वरूप की तुलना में जब इन्हें 'साम' स्वरूप में स्वरबद्ध और विधिपूर्वक गाया जाता था, तो वे अधिक प्रभावशाली और काव्यात्मक हो जाते थे। इसीलिए सामवेद का महत्व ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत उच्च माना गया। सामवेद के दो मुख्य भाग हैं: आर्थिक भाग, जो ऋग्वेद की ऋचाओं का संग्रह मात्र है, और गान भाग, जो साम के स्वरमय स्वरूप का द्योतक है। साम गान का यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों में सर्वोपरि स्थान रहा है। साम गान के पाँच मुख्य विभाग होते थे: प्रस्ताव, उद्गीथ, प्रतिहार, उपद्रव और निधन। प्रस्ताव भाग साम गान का प्रारंभिक हिस्सा होता था, जिसे प्रस्तोता नामक ऋत्विज गाते थे। उद्गीथ को उद्गाता गाता था, जो साम का प्रधान गायक होता था। प्रतिहार का गायक प्रतिहतार्त कहलाता था। उपद्रव का गायन मुख्य सामगायक करता था। निधन भाग अंतिम होता था, जिसमें प्रस्तोता, उद्गाता और प्रतिहतार्त तीनों मिलकर गायन करते थे। उपगायक एक स्वर पर अटल रहकर निरंतर 'हो' का उच्चारण करते थे, जिससे स्वर स्थिर रहता था, जो आज के युग में तानपुरा द्वारा किया जाता है। साम गान के ये विभाग और गायक यज्ञ के अनुष्ठान में संगीत की विविधता और सामंजस्य को दर्शाते हैं। **Table on page 13 (17×2)** | अ | आ | | --- | --- | | (क) अर्जुन | 1. रामायण | | (ख) व्यास | 2. भरतमुनि | | (ग) उद्गाता | 3. स्तुतिगान | | (घ) किन्नरी वीणा | 4. ऋचाएँ | | (ङ) अष्टाध्यायी | 5. वृहन्नला | | (च) रावणहत्था | 6. अवनद्ध वाद्य | | (छ) महर्षि वाल्मीकि | 7. चौथी शताब्दी | | (ज) वुंदवादन | 8. मतंग | | (झ) वैतालिक | 9. सुषिर वाद्य | | (ञ) तूर्य | 10. वीणा | | (ट) नाट्यशास्त्र | 11. साम गान | | (ठ) कोण | 12. वाद्य | | (ड) भेरि | 13. दण्ड | | (ढ) पंचमवेद | 14. पाणिनि | | (ण) घोष | 15. महाभारत | | (त) सारणा चतुष्टयी | 16. कुतुप |
- सामवेद ऋग्वेद की गेय ऋचाओं का संकलन है।
- सामवेद के दो भाग हैं: आर्थिक और गान।
- साम गान के पाँच विभाग: प्रस्ताव, उद्गीथ, प्रतिहार, उपद्रव, निधन।
- प्रस्तोता, उद्गाता, प्रतिहतार्त साम गायक होते थे।
- उपगायक स्वर को स्थिर रखने के लिए निरंतर 'हो' उच्चारण करते थे।
- साम गान का महत्व यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में सर्वोपरि था।
- 📌 सामवेद: ऋग्वेद की गेय ऋचाओं का संकलन।
- 📌 प्रस्तोता: साम गान का प्रारंभिक गायक।
- 📌 उद्गाता: साम का प्रधान गायक।
रामायण
व्याख्यारामायण
रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित एक प्राचीन सांस्कृतिक महाकाव्य है, जो गेय छंदबद्ध रूप में लिखा गया है। इस ग्रंथ में उस समय के सामाजिक जीवन में संगीत की व्यापक उपस्थिति का उल्लेख मिलता है। महर्षि वाल्मीकि स्वयं वैदिक और लौकिक संगीत में पारंगत थे और उन्होंने अपने पुत्र लव-कुश को भी संगीत की शिक्षा दी। रामायण काल के नगर जैसे अयोध्या, किष्किंधा और लंका सदैव वाद्यों की मधुर ध्वनि से गुंजायमान रहते थे। विभिन्न अवसरों जैसे स्वागत, विदाई, जन्म, विवाह आदि में संगीत का महत्वपूर्ण स्थान था। अतिथियों का स्वागत शंख और दुंदुभि से होता था। सूत, मागध आदि जातियों के गायन से स्तुति गान किया जाता था। रावण साम गान के माध्यम से शिव की आराधना करते थे और स्वयं वीणा वादक थे। उनके द्वारा बजाई जाने वाली वीणा 'रावणहत्या' के नाम से प्रसिद्ध थी। रामायण काल में वाद्य के लिए 'तूर्य' शब्द का प्रयोग होता था, जिसमें वेणु, शंख, दुंदुभि, भेरी, मृदंगम, पटह आदि वाद्य शामिल थे। संगीतकारों की विभिन्न जातियाँ थीं जैसे बंदी, सूत, मागध और वारांगना, जो विभिन्न अवसरों पर संगीत प्रस्तुत करते थे। साम गान और गांधर्व संगीत में स्पष्ट भेद था; साम गान केवल वैदिक ऋत्विजों द्वारा यज्ञ में गाया जाता था जबकि गांधर्व संगीत में मार्ग, देशी और लौकिक संगीत शामिल थे। अश्वमेध यज्ञ में उद्गाता को विशेष सम्मान प्राप्त था। लव-कुश ने मार्गी शैली में गांधर्व गान किया था, जो स्वर, पद, ताल, प्रमाण और मूच्छना से युक्त था। इस काल में वीणा सबसे लोकप्रिय वाद्य थी, और ताल के लिए ताल-शब्दों का उच्चारण कर हाथ से ताल देने की प्रणाली प्रचलित थी। इस प्रकार रामायण में संगीत का सामाजिक और धार्मिक जीवन में गहरा प्रभाव था।
- रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा गेय छंदबद्ध रूप में रचित।
- संगीत का सामाजिक और धार्मिक जीवन में व्यापक स्थान।
- वाद्यों के लिए 'तूर्य' शब्द का प्रयोग, जिसमें वेणु, शंख, मृदंगम आदि शामिल।
- साम गान और गांधर्व संगीत में भेद।
- रावण एक कुशल वीणा वादक और साम गायक।
- संगीतकारों की जातियाँ: बंदी, सूत, मागध, वारांगना।
- 📌 रामायण: महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित प्राचीन महाकाव्य।
- 📌 तूर्य: रामायण काल में वाद्य के लिए प्रयुक्त शब्द।
- 📌 साम गान: वैदिक यज्ञों में गाया जाने वाला संगीत।
महाभारत
व्याख्यामहाभारत
महाभारत, जिसे कृष्णाद्वैपायन व्यास ने रचा, भारतीय साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण महाकाव्य है जो उस काल की सभ्यता, संस्कृति और संगीत की जानकारी प्रदान करता है। महाभारत काल में साम और गांधर्व दोनों प्रकार के गान प्रचलित थे। वैदिक शिक्षा में स्वर, पद, स्तोभ
अभ्यास प्रश्न — Chapter 2
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. नाट्यशास्त्र के कितने अध्यायों में संगीत विषयों की चर्चा की गई है?
उत्तर:
नाट्यशास्त्र के कुल 36 अध्याय हैं, जिनमें से लगभग 6 अध्यायों में संगीत विषयों की चर्चा की गई है। ये अध्याय संगीत के सिद्धांत, राग, ताल, वादन, गायन और नाट्य संगीत से संबंधित हैं।
व्याख्या:
नाट्यशास्त्र में संगीत का विस्तृत वर्णन है, विशेषकर राग और ताल के नियमों का। अध्यायों की संख्या 36 है, जिनमें से कुछ अध्याय संगीत विषयों को समर्पित हैं।
Q2.2. मतंग मुनि किस वीणा के आविष्कारक माने जाते हैं?
उत्तर:
मतंग मुनि को किन्नरी वीणा के आविष्कारक माना जाता है।
व्याख्या:
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, मतंग मुनि ने किन्नरी वीणा का आविष्कार किया था, जो एक प्रकार का तारयुक्त वाद्य है।
Q3.3. नाट्यशास्त्र में कितनी जातियों का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
नाट्यशास्त्र में कुल आठ जातियों का वर्णन किया गया है।
व्याख्या:
नाट्यशास्त्र में विभिन्न संगीत और नाट्य संबंधित जातियों का वर्णन है, जो कलाकारों के वर्गीकरण के लिए है।
Q4.4. साम किसे कहते हैं तथा सामवेद के दो प्रधान भाग कौन-से हैं?
उत्तर:
साम वह संगीत है जो वेदों के मंत्रों को गीत के रूप में प्रस्तुत करता है। सामवेद के दो प्रधान भाग हैं - 'अर्जुनी' और 'उद्गीथ'।
व्याख्या:
सामवेद वेदों का वह भाग है जिसमें ऋग्वेद के मंत्रों को संगीतबद्ध किया गया है। अर्जुनी और उद्गीथ इसके मुख्य भाग हैं, जो सामगान के लिए उपयोग होते हैं।
Q5.5. मतंग मुनि ने रागों के कितने भेद बताए हैं?
उत्तर:
मतंग मुनि ने रागों के 64 भेद बताए हैं।
व्याख्या:
मतंग मुनि के ग्रंथ बृहद्देशी में रागों का वर्गीकरण किया गया है, जिसमें कुल 64 प्रकार के रागों का उल्लेख है।
Q6.6. साम गीत को कितने भागों में विभाजित किया जाता था?
उत्तर:
साम गीत को तीन भागों में विभाजित किया जाता था - प्रारंभिक भाग, मध्य भाग और अंतिम भाग।
व्याख्या:
साम गीत की संरचना में तीन भाग होते हैं, जिनमें आरंभिक भाग में मंत्रों का उच्चारण, मध्य भाग में संगीत और अंतिम भाग में समापन होता है।
Q7.7. मतंगकृत बृहद्देशी में वर्णित विषयों एवं सिद्धांतों को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
मतंगकृत बृहद्देशी में संगीत के सिद्धांत, राग, ताल, वादन, गायन, नाट्य और नृत्य के विषयों का विस्तार से वर्णन है। इसमें रागों के प्रकार, उनकी संरचना, तालों का वर्गीकरण, वाद्यों का परिचय, नाट्य के भेद और नृत्य के नियम दिए गए हैं। यह ग्रंथ भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार ग्रंथ माना जाता है।
व्याख्या:
बृहद्देशी में संगीत के सभी पहलुओं को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है, जिससे संगीत के अध्ययन और अभ्यास में सहायता मिलती है। यह ग्रंथ संगीत के शास्त्रीय सिद्धांतों का संकलन है।
Q8.8. बृहद्देशी में दिए गए नाटक के पाँच भेद बताइए?
उत्तर:
बृहद्देशी में नाटक के पाँच भेद हैं - (1) नाट्य, (2) प्रहसन, (3) एकांक, (4) वृतांत, और (5) नाटिका।
व्याख्या:
मतंग मुनि ने बृहद्देशी में नाटक को विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया है, जो नाट्य कला के विभिन्न रूपों को दर्शाते हैं।
Hindustani Sangeet Gayan Evam Vadan के सभी 10 अध्याय
Sangeet · Class 11