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आधार ग्रंथ | Class 11 Sangeet Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

आधार ग्रंथ | Class 11 Sangeet Notes

आधार ग्रंथ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of आधार ग्रंथ from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

रामायण

रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित एक प्राचीन सांस्कृतिक महाकाव्य है, जो गेय छंदबद्ध रूप में लिखा गया है। इस ग्रंथ में उस समय के सामाजिक जीवन में संगीत की व्यापक उपस्थिति का उल्लेख मिलता है। महर्षि वाल्मीकि स्वयं वैदिक और लौकिक संगीत में पारंगत थे और उन्होंने अपने पुत्र लव-कुश को भी संगीत की शिक्षा दी। रामायण काल के नगर जैसे अयोध्या, किष्किंधा और लंका सदैव वाद्यों की मधुर ध्वनि से गुंजायमान रहते थे। विभिन्न अवसरों जैसे स्वागत, विदाई, जन्म, विवाह आदि में संगीत का महत्वपूर्ण स्थान था। अतिथियों का स्वागत शंख और दुंदुभि से होता था। सूत, मागध आदि जातियों के गायन से स्तुति गान किया जाता था। रावण साम गान के माध्यम से शिव की आराधना करते थे और स्वयं वीणा वादक थे। उनके द्वारा बजाई जाने वाली वीणा 'रावणहत्या' के नाम से प्रसिद्ध थी। रामायण काल में वाद्य के लिए 'तूर्य' शब्द का प्रयोग होता था, जिसमें वेणु, शंख, दुंदुभि, भेरी, मृदंगम, पटह आदि वाद्य शामिल थे। संगीतकारों की विभिन्न जातियाँ थीं जैसे बंदी, सूत, मागध और वारांगना, जो विभिन्न अवसरों पर संगीत प्रस्तुत करते थे। साम गान और गांधर्व संगीत में स्पष्ट भेद था; साम गान केवल वैदिक ऋत्विजों द्वारा यज्ञ में गाया जाता था जबकि गांधर्व संगीत में मार्ग, देशी और लौकिक संगीत शामिल थे। अश्वमेध यज्ञ में उद्गाता को विशेष सम्मान प्राप्त था। लव-कुश ने मार्गी शैली में गांधर्व गान किया था, जो स्वर, पद, ताल, प्रमाण और मूच्छना से युक्त था। इस काल में वीणा सबसे लोकप्रिय वाद्य थी, और ताल के लिए ताल-शब्दों का उच्चारण कर हाथ से ताल देने की प्रणाली प्रचलित थी। इस प्रकार रामायण में संगीत का सामाजिक और धार्मिक जीवन में गहरा प्रभाव था।

📊 Diagram: चित्र 2.1—रामायण पांडुलिपि, मेवाड़ी चित्र, राजस्थान, 1653 ई.

🧪 Activity: रामायण काल में संगीत के विभिन्न अवसरों और वाद्यों की पहचान करना।

🔗 Connection: यह अनुभाग महाभारत में संगीत के विकास और सामाजिक महत्व की चर्चा की ओर ले जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामवेद का आर्थिक भाग और गान भाग किस प्रकार भिन्न हैं?

सामवेद का आर्थिक भाग ऋग्वेद की ऋचाओं का संग्रह मात्र है जबकि गान भाग साम के स्वरमय स्वरूप का द्योतक है। आर्थिक भाग में केवल पाठ्य सामग्री होती है, जबकि गान भाग में विधिपूर्वक स्वर सहित गान होता है।

साम गान के पाँच विभाग कौन-कौन से हैं और प्रत्येक विभाग का गायक कौन होता था?

साम गान के पाँच विभाग हैं: प्रस्ताव (प्रस्तोता गाता था), उद्गीथ (उद्गाता गाता था), प्रतिहार (प्रतिहतार्त गाता था), उपद्रव (मुख्य सामगायक गाता था), और निधन (प्रस्तोता, उद्गाता व प्रतिहतार्त मिलकर गाते थे)।

रामायण काल में वाद्य के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता था और उसमें कौन-कौन से वाद्य शामिल थे?

तूर्य; वेणु, शंख, दुंदुभि, भेरी, मृदंगम, पटह

महाभारत काल में संगीत कला को किस संज्ञा से जाना जाता था और इसमें कौन-कौन से अंग शामिल थे?

महाभारत काल में संगीत कला को 'गांधर्व' संज्ञा दी जाती थी, जिसमें गीत, वादन और नर्तन शामिल थे। यह कला धार्मिक एवं सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा थी।

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