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आधार ग्रंथ | Class 11 Sangeet Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

आधार ग्रंथ | Class 11 Sangeet Notes

आधार ग्रंथ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of आधार ग्रंथ from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

सामवेद

सामवेद वेदकालीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसमें ऋग्वेद की कुछ ऋचाओं को गेय स्वरूप में संकलित किया गया है। सामवेद की रचना गान योग्य ऋचाओं के संकलन से हुई है, जो यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों में गाए जाते थे। ऋग्वेद की ऋचाओं के पाट्य स्वरूप की तुलना में जब इन्हें 'साम' स्वरूप में स्वरबद्ध और विधिपूर्वक गाया जाता था, तो वे अधिक प्रभावशाली और काव्यात्मक हो जाते थे। इसीलिए सामवेद का महत्व ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत उच्च माना गया। सामवेद के दो मुख्य भाग हैं: आर्थिक भाग, जो ऋग्वेद की ऋचाओं का संग्रह मात्र है, और गान भाग, जो साम के स्वरमय स्वरूप का द्योतक है। साम गान का यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों में सर्वोपरि स्थान रहा है। साम गान के पाँच मुख्य विभाग होते थे: प्रस्ताव, उद्गीथ, प्रतिहार, उपद्रव और निधन। प्रस्ताव भाग साम गान का प्रारंभिक हिस्सा होता था, जिसे प्रस्तोता नामक ऋत्विज गाते थे। उद्गीथ को उद्गाता गाता था, जो साम का प्रधान गायक होता था। प्रतिहार का गायक प्रतिहतार्त कहलाता था। उपद्रव का गायन मुख्य सामगायक करता था। निधन भाग अंतिम होता था, जिसमें प्रस्तोता, उद्गाता और प्रतिहतार्त तीनों मिलकर गायन करते थे। उपगायक एक स्वर पर अटल रहकर निरंतर 'हो' का उच्चारण करते थे, जिससे स्वर स्थिर रहता था, जो आज के युग में तानपुरा द्वारा किया जाता है। साम गान के ये विभाग और गायक यज्ञ के अनुष्ठान में संगीत की विविधता और सामंजस्य को दर्शाते हैं।

📊 Diagram: Figure 11154CH02; Figures showing सामवेद के विभिन्न भागों और गायक।

🧪 Activity: साम गान के पाँच विभागों को समझना और उनके गायक वर्ग की भूमिका पर चर्चा करना।

🔗 Connection: यह अनुभाग रामायण में संगीत के उल्लेख की ओर ले जाता है, जहाँ वैदिक संगीत की सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका का विस्तार होता है।

Table on page 13 (17×2)

(क) अर्जुन1. रामायण
(ख) व्यास2. भरतमुनि
(ग) उद्गाता3. स्तुतिगान
(घ) किन्नरी वीणा4. ऋचाएँ
(ङ) अष्टाध्यायी5. वृहन्नला
(च) रावणहत्था6. अवनद्ध वाद्य
(छ) महर्षि वाल्मीकि7. चौथी शताब्दी
(ज) वुंदवादन8. मतंग
(झ) वैतालिक9. सुषिर वाद्य
(ञ) तूर्य10. वीणा
(ट) नाट्यशास्त्र11. साम गान
(ठ) कोण12. वाद्य
(ड) भेरि13. दण्ड
(ढ) पंचमवेद14. पाणिनि
(ण) घोष15. महाभारत
(त) सारणा चतुष्टयी16. कुतुप

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामवेद का आर्थिक भाग और गान भाग किस प्रकार भिन्न हैं?

सामवेद का आर्थिक भाग ऋग्वेद की ऋचाओं का संग्रह मात्र है जबकि गान भाग साम के स्वरमय स्वरूप का द्योतक है। आर्थिक भाग में केवल पाठ्य सामग्री होती है, जबकि गान भाग में विधिपूर्वक स्वर सहित गान होता है।

साम गान के पाँच विभाग कौन-कौन से हैं और प्रत्येक विभाग का गायक कौन होता था?

साम गान के पाँच विभाग हैं: प्रस्ताव (प्रस्तोता गाता था), उद्गीथ (उद्गाता गाता था), प्रतिहार (प्रतिहतार्त गाता था), उपद्रव (मुख्य सामगायक गाता था), और निधन (प्रस्तोता, उद्गाता व प्रतिहतार्त मिलकर गाते थे)।

रामायण काल में वाद्य के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाता था और उसमें कौन-कौन से वाद्य शामिल थे?

तूर्य; वेणु, शंख, दुंदुभि, भेरी, मृदंगम, पटह

महाभारत काल में संगीत कला को किस संज्ञा से जाना जाता था और इसमें कौन-कौन से अंग शामिल थे?

महाभारत काल में संगीत कला को 'गांधर्व' संज्ञा दी जाती थी, जिसमें गीत, वादन और नर्तन शामिल थे। यह कला धार्मिक एवं सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा थी।

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