भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण | Class 11 Sangeet Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
संगीत में वाद्यों का महत्व
संगीत में वाद्य यंत्रों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। चाहे कंठ संगीत हो, नृत्य हो या नाटक, सभी में वाद्यों की सहायता से कला में विस्तार, आकर्षण और प्रभाव पैदा होता है। वाद्य यंत्र गायन के भावों को सुंदरता से प्रस्तुत करते हैं। श्रोता भले ही वाद्य यंत्रों के नाम या बजाने की तकनीक न जानें, पर उनकी ध्वनि से आनंदित होते हैं। वाद्यों के बिना संगीत अधूरा और कम प्रभावशाली प्रतीत होता है।
वाद्य यंत्रों की ध्वनि भावों और रसों को प्रकट करने में सहायक होती है। जैसे मानव कंठ शब्दों और स्वर से भाव प्रकट करता है, वैसे ही वाद्य यंत्र संगीत को आकर्षक बनाते हैं। संगीत की प्रस्तुति में वाद्यों का योगदान श्रोताओं को भावात्मक रूप से जोड़ने में सहायक होता है। इसलिए संगीत में वाद्यों की भूमिका केवल सहायक नहीं, बल्कि अनिवार्य मानी जाती है।
📊 Diagram: चित्र 7.12—तबला एवं हारमोनियम (सुषिर) बजाते हुए कलाकार
🧪 Activity: विद्यार्थियों से उनके पसंदीदा गीतों में प्रयुक्त वाद्य यंत्रों की पहचान कराई जाए।
🔗 Connection: यह खंड संगीत वाद्यों के वर्गीकरण की चर्चा के लिए आधार प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संगीत में 'वाद्य' शब्द का क्या अर्थ है और वाद्य यंत्रों का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
वाद्य शब्द 'वद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है बोलना। वाद्य यंत्रों का मुख्य उद्देश्य विशिष्ट वस्तु एवं पद्धति से निर्मित यंत्रों पर थाप देकर, फूँककर या तारों में कंपन उत्पन्न करके लयबद्ध और सुरबद्ध ध्वनि उत्पन्न करना होता है।
भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों का महत्व क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
संगीत में वाद्य यंत्रों का महत्व अत्यंत गहरा है। ये कंठ संगीत, नृत्य और नाटक में कला को आकर्षक और प्रभावशाली बनाते हैं। वाद्य यंत्र भावों की प्रस्तुति को सुंदर बनाते हैं। उदाहरण के लिए, तबला और हारमोनियम गायन के भावों को सुंदरता से प्रस्तुत करते हैं।
भारतीय संगीत में वाद्यों का वर्गीकरण कौन-कौन से चार प्रकारों में किया गया है? प्रत्येक प्रकार के लिए एक उदाहरण लिखिए।
भारतीय संगीत में वाद्यों का वर्गीकरण चार प्रकारों में किया गया है— (1) तत् (तंत्री) वाद्य, उदाहरण: सितार (2) अवनद्ध वाद्य, उदाहरण: तबला (3) घन वाद्य, उदाहरण: घंटा (4) सुषिर वाद्य, उदाहरण: बाँसुरी
निम्नलिखित में से कौन-सा वाद्य तत् (तंत्री) वाद्यों के अंतर्गत आता है?
सितार
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