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Chapter 7

🎓 Class 11📖 Tabla evam Pakhawaj📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 8Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण का परिचय

व्याख्या

भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण का परिचय

भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों की परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। वाद्य यंत्र वे उपकरण होते हैं जिनसे ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भारतीय संगीत में वाद्यों का उद्देश्य विशिष्ट वस्तु एवं पद्धति से निर्मित यंत्रों पर थाप देकर, फूँककर या तारों में कंपन उत्पन्न करके लयबद्ध और सुरबद्ध ध्वनि उत्पन्न करना है। यह ध्वनि शास्त्रीय स्वर समुदाय एवं तालों के अनुसार बजाई जाती है। प्रत्येक वाद्य की अपनी विशिष्ट ध्वनि होती है जो भावनाओं का संचार करती है। संगीत में रसोईघर के बरतनों जैसे तश्तरी, थाली, चम्मच आदि भी वाद्य के रूप में प्रयुक्त होते रहे हैं। भारतीय संगीतज्ञों ने अनेक वाद्य यंत्रों को संवारा और निरंतर प्रयास से इन्हें लोकप्रिय बनाया। उदाहरण के लिए, रूद्र वीणा से सुरबहार और फिर सितार का विकास हुआ। वाद्यों का प्रयोग विभिन्न युगों में अलग-अलग आवश्यकताओं के लिए हुआ, जैसे दूर बैठे व्यक्ति को संकेत देना, जंगली जानवरों को भगाना, युद्ध में सैनिकों का हौसला बढ़ाना, और धार्मिक अनुष्ठानों में उपासना के लिए। मानव शरीर को भी एक वाद्य यंत्र माना गया है जिसे 'गात्र वीणा' कहा गया है। संगीत में वाद्यों का महत्व अत्यंत गहरा है। कंठ संगीत, नृत्य या नाटक सभी में वाद्य यंत्रों की सहायता से कला में आकर्षण और प्रभाव पैदा होता है। वाद्यों के बिना संगीत अधूरा लगता है क्योंकि वे भावों की प्रस्तुति को सुंदर और प्रभावशाली बनाते हैं।

  • वाद्य यंत्र ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरण होते हैं।
  • भारतीय संगीत में वाद्यों का प्रयोग लय और स्वर के लिए होता है।
  • रसोईघर के बरतनों का भी संगीत में वाद्य के रूप में उपयोग होता रहा है।
  • वाद्यों का प्रयोग सामाजिक, धार्मिक, युद्ध और मनोरंजन के लिए होता रहा है।
  • मानव शरीर को 'गात्र वीणा' के रूप में वाद्य माना गया है।
  • वाद्य संगीत की अभिव्यक्ति को पूर्ण और प्रभावशाली बनाते हैं।
  • 📌 वाद्य: ध्वनि उत्पन्न करने वाला यंत्र।
  • 📌 गात्र वीणा: मानव शरीर को वाद्य यंत्र माना जाना।
  • 📌 रूद्र वीणा: प्राचीन वीणा का एक प्रकार।

संगीत में वाद्यों का महत्व

व्याख्या

संगीत में वाद्यों का महत्व

संगीत में वाद्य यंत्रों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। चाहे कंठ संगीत हो, नृत्य हो या नाटक, सभी में वाद्यों की सहायता से कला में विस्तार, आकर्षण और प्रभाव पैदा होता है। वाद्य यंत्र गायन के भावों को सुंदरता से प्रस्तुत करते हैं। श्रोता भले ही वाद्य यंत्रों के नाम या बजाने की तकनीक न जानें, पर उनकी ध्वनि से आनंदित होते हैं। वाद्यों के बिना संगीत अधूरा और कम प्रभावशाली प्रतीत होता है। वाद्य यंत्रों की ध्वनि भावों और रसों को प्रकट करने में सहायक होती है। जैसे मानव कंठ शब्दों और स्वर से भाव प्रकट करता है, वैसे ही वाद्य यंत्र संगीत को आकर्षक बनाते हैं। संगीत की प्रस्तुति में वाद्यों का योगदान श्रोताओं को भावात्मक रूप से जोड़ने में सहायक होता है। इसलिए संगीत में वाद्यों की भूमिका केवल सहायक नहीं, बल्कि अनिवार्य मानी जाती है।

  • संगीत में वाद्य यंत्र कला को आकर्षक बनाते हैं।
  • विभिन्न कला रूपों में वाद्यों का उपयोग होता है।
  • वाद्यों की ध्वनि भावों के संचार में सहायक होती है।
  • श्रोता वाद्यों की ध्वनि से आनंदित होते हैं।
  • वाद्यों के बिना संगीत अधूरा लगता है।
  • 📌 वाद्य यंत्र: संगीत में ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरण।
  • 📌 भाव: संगीत में अभिव्यक्त मनोभाव।
  • 📌 रस: संगीत में उत्पन्न होने वाली अनुभूति।

भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण

व्याख्या

भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण

भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों का वर्गीकरण प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। वैदिक काल के ग्रंथों में विभिन्न वाद्यों का उल्लेख मिलता है। रामायण काल में वीणा और मृदंग का उल्लेख है, जबकि महाभारत काल में वीणा, वेणु, दुन्दुभी, पुष्कर आदि वाद्यों का वर्णन

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. रूद्र वीणा से प्रेरणा लेकर कौन-सा वाद्य यंत्र बना है? (क) सुरबहार (ख) सरोद (ग) तानपुरा (घ) वायलिन
A.(क) सुरबहार
B.(ख) सरोद
C.(ग) तानपुरा
D.(घ) वायलिन

उत्तर:

सही उत्तर है (ख) सरोद। रूद्र वीणा से प्रेरणा लेकर सरोद वाद्य यंत्र विकसित हुआ है। सरोद एक तंत्रीय वाद्य है जो वीणा परिवार से संबंधित है।

व्याख्या:

रूद्र वीणा प्राचीन वीणा का एक रूप है, और सरोद को इसी से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। सरोद में तार होते हैं और इसे मिज़राब से बजाया जाता है।

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Q2.2. गज के घर्षण द्वारा बजाए जाने वाले वाद्य किस श्रेणी में आते हैं? (क) सुषिर वाद्य (ख) अवनद्ध वाद्य (ग) तत् वाद्य (घ) घन वाद्य
A.(क) सुषिर वाद्य
B.(ख) अवनद्ध वाद्य
C.(ग) तत् वाद्य
D.(घ) घन वाद्य

उत्तर:

सही उत्तर है (ख) अवनद्ध वाद्य। गज के घर्षण से बजाए जाने वाले वाद्य अवनद्ध वाद्य श्रेणी में आते हैं क्योंकि ये चमड़े या खाल से बने होते हैं और घर्षण द्वारा ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

व्याख्या:

अवनद्ध वाद्य वे वाद्य होते हैं जिनमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए चमड़े या खाल का उपयोग होता है, और इन्हें हाथ या किसी वस्तु से घर्षण या प्रहार द्वारा बजाया जाता है।

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Q3.3. मानव शरीर की तुलना किस प्राचीन वाद्य यंत्र से की जाती है? (क) पटह (ख) गात्र वीणा (ग) वेणु (घ) पुष्कर
A.(क) पटह
B.(ख) गात्र वीणा
C.(ग) वेणु
D.(घ) पुष्कर

उत्तर:

सही उत्तर है (ख) गात्र वीणा। मानव शरीर की तुलना प्राचीन गात्र वीणा से की जाती है क्योंकि इसमें शरीर के अंगों को वीणा के अंगों के समान माना गया है।

व्याख्या:

गात्र वीणा एक प्राचीन वाद्य है जिसमें शरीर के विभिन्न भागों को वीणा के अंगों के रूप में देखा गया है, इसलिए मानव शरीर की तुलना इससे की जाती है।

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Q4.4. जवा द्वारा बजाए जाने वाला वाद्य यंत्र कौन-सा है? (क) तानपुरा (ख) सरोद (ग) सितार (घ) सारंगी
A.(क) तानपुरा
B.(ख) सरोद
C.(ग) सितार
D.(घ) सारंगी

उत्तर:

सही उत्तर है (ग) सितार। सितार को जवा से बजाया जाता है। जवा एक प्रकार की मिज़राब होती है जो तारों को छेड़ने के लिए उपयोग होती है।

व्याख्या:

सितार एक तंत्रीय वाद्य है जिसे मिज़राब या जवा से बजाया जाता है, जो अंगुली की बजाय उंगली पर पहना जाता है।

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Q5.5. चमड़े अथवा खाल से मढ़े हुए खोखले वाद्य यंत्र किस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं? (क) अवनद्ध वाद्य (ख) तत् वाद्य (ग) घन वाद्य (घ) सुषिर वाद्य
A.(क) अवनद्ध वाद्य
B.(ख) तत् वाद्य
C.(ग) घन वाद्य
D.(घ) सुषिर वाद्य

उत्तर:

सही उत्तर है (क) अवनद्ध वाद्य। चमड़े अथवा खाल से बने खोखले वाद्य यंत्र अवनद्ध वाद्य वर्ग में आते हैं क्योंकि इनमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए चमड़े का प्रयोग होता है।

व्याख्या:

अवनद्ध वाद्य वे वाद्य होते हैं जिनमें चमड़े या खाल का प्रयोग ध्वनि उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, जैसे तबला, ढोलक आदि।

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Q6.6. क्लेरोनेट, नागस्वरम् कौन-सी श्रेणी के वाद्य यंत्र हैं? (क) तत् वाद्य (ख) सुषिर वाद्य (ग) अवनद्ध वाद्य (घ) घन वाद्य
A.(क) तत् वाद्य
B.(ख) सुषिर वाद्य
C.(ग) अवनद्ध वाद्य
D.(घ) घन वाद्य

उत्तर:

सही उत्तर है (ख) सुषिर वाद्य। क्लेरोनेट और नागस्वरम् सुषिर वाद्य श्रेणी के वाद्य यंत्र हैं क्योंकि इनमें वायु के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न होती है।

व्याख्या:

सुषिर वाद्य वे वाद्य होते हैं जिनमें ध्वनि वायु के प्रवाह से उत्पन्न होती है, जैसे बांसुरी, क्लेरोनेट, नागस्वरम् आदि।

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Q7.1. किस श्रेणी के संगीत वाद्यों का प्रयोग शास्त्रीय संगीत की अपेक्षा लोक संगीत में अधिक होता है?

उत्तर:

अवनद्ध वाद्यों का प्रयोग लोक संगीत में शास्त्रीय संगीत की अपेक्षा अधिक होता है क्योंकि ये वाद्य यंत्र सरल होते हैं और लोक संगीत की आवश्यकताओं के अनुरूप होते हैं।

व्याख्या:

अवनद्ध वाद्य जैसे ढोलक, ढोल, नगाड़ा आदि लोक संगीत में अधिक प्रचलित हैं क्योंकि ये आसानी से उपलब्ध होते हैं और लोक संगीत की लयबद्धता को बढ़ाते हैं।

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Q8.2. सितार या तानपुरे का तुम्बा किस वस्तु से बनता है?

उत्तर:

सितार या तानपुरे का तुम्बा मुख्यतः कद्दू (लौकी) के सूखे हुए फल से बनाया जाता है। इसे कठोर और खोखला बनाने के लिए सुखाया जाता है।

व्याख्या:

तुम्बा एक खोखला भाग होता है जो वाद्य यंत्र के ध्वनि उत्पादन में सहायक होता है। कद्दू के फल को सुखाकर और संसाधित करके तुम्बा बनाया जाता है।

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