भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण | Class 11 Sangeet Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण का परिचय
भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों की परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है। वाद्य यंत्र वे उपकरण होते हैं जिनसे ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भारतीय संगीत में वाद्यों का उद्देश्य विशिष्ट वस्तु एवं पद्धति से निर्मित यंत्रों पर थाप देकर, फूँककर या तारों में कंपन उत्पन्न करके लयबद्ध और सुरबद्ध ध्वनि उत्पन्न करना है। यह ध्वनि शास्त्रीय स्वर समुदाय एवं तालों के अनुसार बजाई जाती है। प्रत्येक वाद्य की अपनी विशिष्ट ध्वनि होती है जो भावनाओं का संचार करती है। संगीत में रसोईघर के बरतनों जैसे तश्तरी, थाली, चम्मच आदि भी वाद्य के रूप में प्रयुक्त होते रहे हैं।
भारतीय संगीतज्ञों ने अनेक वाद्य यंत्रों को संवारा और निरंतर प्रयास से इन्हें लोकप्रिय बनाया। उदाहरण के लिए, रूद्र वीणा से सुरबहार और फिर सितार का विकास हुआ। वाद्यों का प्रयोग विभिन्न युगों में अलग-अलग आवश्यकताओं के लिए हुआ, जैसे दूर बैठे व्यक्ति को संकेत देना, जंगली जानवरों को भगाना, युद्ध में सैनिकों का हौसला बढ़ाना, और धार्मिक अनुष्ठानों में उपासना के लिए। मानव शरीर को भी एक वाद्य यंत्र माना गया है जिसे 'गात्र वीणा' कहा गया है।
संगीत में वाद्यों का महत्व अत्यंत गहरा है। कंठ संगीत, नृत्य या नाटक सभी में वाद्य यंत्रों की सहायता से कला में आकर्षण और प्रभाव पैदा होता है। वाद्यों के बिना संगीत अधूरा लगता है क्योंकि वे भावों की प्रस्तुति को सुंदर और प्रभावशाली बनाते हैं।
📊 Diagram: चित्र 7.1—घन वाद्य—थाली; चित्र 7.2—अवन्त वाद्य—घटम्; चित्र 7.3—घन वाद्य—हुडक्कु; चित्र 7.4—प्राचीनकालीन वीणा (तत् वाद्य); चित्र 7.5—डफ और हिमाचली शहनाई; चित्र 7.6—वीणा
🧪 Activity: विद्यार्थियों से पूछा जाए कि क्या उन्होंने कभी रसोईघर के बरतनों से बने किसी वाद्य यंत्र को देखा है।
🔗 Connection: यह परिचय भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण के ऐतिहासिक और शास्त्रीय आधार की चर्चा के लिए आधार तैयार करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय संगीत में 'वाद्य' शब्द का क्या अर्थ है और वाद्य यंत्रों का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
वाद्य शब्द 'वद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है बोलना। वाद्य यंत्रों का मुख्य उद्देश्य विशिष्ट वस्तु एवं पद्धति से निर्मित यंत्रों पर थाप देकर, फूँककर या तारों में कंपन उत्पन्न करके लयबद्ध और सुरबद्ध ध्वनि उत्पन्न करना होता है।
भारतीय संगीत में वाद्य यंत्रों का महत्व क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
संगीत में वाद्य यंत्रों का महत्व अत्यंत गहरा है। ये कंठ संगीत, नृत्य और नाटक में कला को आकर्षक और प्रभावशाली बनाते हैं। वाद्य यंत्र भावों की प्रस्तुति को सुंदर बनाते हैं। उदाहरण के लिए, तबला और हारमोनियम गायन के भावों को सुंदरता से प्रस्तुत करते हैं।
भारतीय संगीत में वाद्यों का वर्गीकरण कौन-कौन से चार प्रकारों में किया गया है? प्रत्येक प्रकार के लिए एक उदाहरण लिखिए।
भारतीय संगीत में वाद्यों का वर्गीकरण चार प्रकारों में किया गया है— (1) तत् (तंत्री) वाद्य, उदाहरण: सितार (2) अवनद्ध वाद्य, उदाहरण: तबला (3) घन वाद्य, उदाहरण: घंटा (4) सुषिर वाद्य, उदाहरण: बाँसुरी
निम्नलिखित में से कौन-सा वाद्य तत् (तंत्री) वाद्यों के अंतर्गत आता है?
सितार
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