ताल-लिपि पद्धति एवं विभिन्न ठेके | Class 11 Sangeet Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

ताल-लिपि पद्धति एवं विभिन्न ठेके – this guide gives you a concise, exam-ready overview of ताल-लिपि पद्धति एवं विभिन्न ठेके from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
ताल-लिपि में प्रयुक्त बोल और चिह्न
ताल-लिपि पद्धति में ताल के ठेकों को व्यक्त करने के लिए विशिष्ट बोलों और चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। बोल जैसे धा, ता, ति, ना, धिं आदि ताल की विभिन्न मात्राओं और लय को दर्शाते हैं। प्रत्येक बोल की अपनी मात्रा और उच्चारण की अवधि होती है। ताल के विभागों को अलग करने के लिए खड़ी पाई अर्थात् '1' चिह्न का प्रयोग होता है। ताली के लिए ताली की संख्या लिखी जाती है, जैसे त्रिताल में पाँचवीं और तेरहवीं मात्रा पर 2 और 3। खाली के लिए '0' चिह्न का प्रयोग होता है। यदि किसी बोल को दो या अधिक मात्राओं तक गाया या बजाया जाना हो तो 's' चिह्न का उपयोग किया जाता है, जैसे धा s या धिं s s। एक मात्रा में एक से अधिक स्वर या बोल होने पर उनके नीचे अर्धचन्द्र '∼' लगाया जाता है। इस प्रकार के चिह्न ताल की लयबद्धता, गति और मात्रा को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं और संगीत के अभ्यास एवं प्रस्तुति में सहायक होते हैं।
📊 Diagram: Table on page 2 (3×18): त्रिताल के बोल और चिह्नों का विवरण।
🧪 Activity: विद्यार्थी ताल के बोलों को ताल-लिपि में लिखकर ताली और खाली चिह्नों के साथ अभ्यास करें।
🔗 Connection: यह ताल-लिपि में प्रयुक्त बोल और चिह्न तालों के ठेकों के अभ्यास और उदाहरणों से जुड़ते हैं।
Table on page 2 (3×18)
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 1 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | धा | धिं | धिं | धा | धा | धिं | धिं | धा | धा | तिं | तिं | ता | ता | धिं | धिं | धा | धा |
| चिह्न | x | 2 | 0 | 3 | x |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ताल-लिपि पद्धति का मुख्य उद्देश्य क्या है और यह संगीत रचनाओं के लिए क्यों आवश्यक है?
ताल-लिपि पद्धति संगीत रचनाओं को लिखित रूप में संरक्षित करने की विधि है। यह ताल के ठेकों, लय, मात्रा और गति को व्यवस्थित रूप से दर्शाती है। उदाहरण के लिए, पंडित विष्णु नारायण भातखंडे ने ताल-स्वर लिपि पद्धति का निर्माण किया जिससे संगीत की संरचना स्पष्ट होती है।
पंडित विष्णु नारायण भातखंडे द्वारा ताल-लिपि पद्धति में सम और खाली को दर्शाने के लिए कौन से चिह्न प्रयोग किए गए हैं?
× और 0
रूपक ताल के ताल-लिपि में प्रथम मात्रा पर कौन सा चिह्न होता है और वह क्यों विशेष है?
रूपक ताल की प्रथम मात्रा पर खाली का चिह्न '0' होता है क्योंकि यह सम मात्रा होते हुए भी खाली रहती है। यह ताल की विशेषता है कि सम पर खाली होती है।
त्रिताल में कुल कितनी मात्राएँ होती हैं और यह किस प्रकार की ताल है?
16 मात्राएँ, सम पदीताल
इस अध्याय में महारत हासिल करें
पूरा ताल-लिपि पद्धति एवं विभिन्न ठेके अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।
ConceptScroll के साथ स्मार्ट पढ़ें
रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।
मुफ़्त सीखना शुरू करेंऔर पढ़ें
- तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन | Class 11 Sangeet Notes
Clear NCERT-aligned notes on तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन for Class 11 Sangeet.
- तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन | Class 11 Sangeet Notes
Clear NCERT-aligned notes on तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन for Class 11 Sangeet.
- तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन | Class 11 Sangeet Notes
Clear NCERT-aligned notes on तबला एवं पखावज वाद्यों के घरानों का वर्णन for Class 11 Sangeet.