Sangeetकक्षा 11तबला एवं पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोलहिंदी

तबला एवं पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोल | Class 11 Sangeet Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

तबला एवं पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोल | Class 11 Sangeet Notes

तबला एवं पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोल – this guide gives you a concise, exam-ready overview of तबला एवं पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोल from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

तबला एवं पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्ण एवं बोल

तबला और पखावज भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रमुख ताल वाद्य हैं, जिनका उपयोग संगीत की लयबद्धता और ताल की मधुरता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस अध्याय में हम तबला एवं पखावज वाद्यों पर बजने वाले वर्णों (ध्वनियों) और बोलों (ताल के पैटर्न) का विस्तृत अध्ययन करेंगे। तबला दो ड्रमों का युग्म होता है, जिसमें दायाँ तबला (छोटा ड्रम) और बायाँ तबला या डग्गा (बड़ा ड्रम) शामिल हैं। तबले पर कुल दस मूल वर्ण माने जाते हैं, जिनमें से छह वर्ण दाहिने तबले पर, दो वर्ण बायें तबले पर स्वतंत्र रूप से बजाए जाते हैं, जबकि दो वर्ण संयुक्त वर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य वर्ण भी प्रयोग में लाए जाते हैं।

बायें तबले पर दो मुख्य वर्ण होते हैं: कत/के/कि और घे/गे। दायें तबले पर छह वर्ण होते हैं: ता/ना, ति/ते, तु/तू, दी/थु/न/ता, ट/र, और तिं। इसके अलावा था और धिं दो संयुक्त वर्ण हैं जो दोनों तबलों के संयोजन से उत्पन्न होते हैं। प्रत्येक वर्ण तबले के विभिन्न भागों पर अलग-अलग तकनीकों से बजाए जाते हैं, जिससे विभिन्न स्वर उत्पन्न होते हैं।

तबला वादन में वर्णों का सही उच्चारण और उनकी पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये ताल की लयबद्धता और संगीत की सुंदरता को निर्धारित करते हैं। पखावज भी एक प्रमुख ताल वाद्य है, जिसका आकार बेलनाकार होता है और दोनों सिरों पर चमड़े की त्वचा लगी होती है। पखावज के वर्ण तबले की तरह होते हैं, लेकिन इनके बजाने की विधि और ध्वनि में कुछ भिन्नता होती है। पखावज के चार मूल वर्ण हैं: ता, दीं, थुं, और ना। आधुनिक युग में पखावज के कुल सात वर्ण माने जाते हैं।

इस अध्याय में हम तबला और पखावज के वर्णों के बजाने की विधि, उनके निकास, और ताल के विभिन्न बोलों का अध्ययन करेंगे। साथ ही, हम प्रसिद्ध पखावज वादकों और उनके योगदान को भी जानेंगे। यह ज्ञान विद्यार्थियों को ताल वाद्यों के स्वरूप और उनकी लयबद्धता को समझने में मदद करेगा।

📊 Diagram: चित्र 3.1–बायें तबले के वर्ण; 111530160; चित्र 3.2–दायें तबले के वर्ण; धा; धि

🧪 Activity: विद्यार्थी बायें और दायें तबले के वर्णों को सुनकर पहचानने का अभ्यास करें।

🔗 Connection: अगले खंड में दाहिने और बायें तबले पर निकलने वाले वर्णों की बजाने की विधि विस्तार से समझाई जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. निम्नलिखित वर्णों के निकास की विधि लिखिए— - ति, तिं, दी, र, न, गे, कि, कत्

प्रत्येक वर्ण के निकास की विधि तबले एवं पखावज वाद्यों पर बजने के दौरान उनके ध्वनिक स्वरूप और तालबद्धता के अनुसार होती है। उदाहरण स्वरूप:

  • ति: ता और इ की संयुक्त ध्वनि, ता के बाद हल्की इ ध्वनि।
  • तिं: ति के साथ नासिक्य ध्वनि।
  • दी: दी की ध्वनि जिसमें द और ई की संयुक्तता होती है।
  • र: र की स्पष्ट और तीव्र ध्वनि।
  • न: न की नासिक्य ध्वनि।
  • गे: ग और ए की संयुक्त ध्वनि।
  • कि: क और इ की संयुक्त ध्वनि।
  • कत्: क और त् की संयुक्त ध्वनि।

इन वर्णों के निकास में ताल, गति और वाद्य के विभिन्न भागों का प्रयोग

2. तबले और डगो पर बजाए जाने वाले निम्नलिखित बोलों के निकास की विधि लिखिए— - तिर, तिरकिट, गदिगन, चिड़नग, धागेतिट, चिटचिट, किटतक

प्रत्येक बोल का निकास तबले या डगो के विभिन्न भागों से होता है, जो ध्वनि की प्रकृति और ताल के अनुसार निर्धारित होता है। उदाहरण:

  • तिर: ता और र की संयुक्त ध्वनि, जिसमें ता मैदान से और र लव से निकलती है।
  • तिरकिट: तिर के बाद किट का संयोजन, जिसमें किट तबले की स्याही और मैदान से निकलता है।
  • गदिगन: ग, दि, ग, न के संयोजन से बना बोल, जिसमें ग स्याही से, दि लव से, न नासिक्य ध्वनि के साथ बजता है।
  • चिड़नग: चि, ड़, न, ग के संयोजन से, विभिन्न भागों से निकली ध्वनियाँ।
  • धागेतिट: धा, गे, ति, ट के संयोजन से,
3. तबला और डगो के विविध स्थानों पर कौन-कौन से वर्ण बजते हैं? प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए— - (क) चाँट - (ख) लव - (ग) तबले की स्याही - (घ) डगो का मैदान

तबला और डगो के विभिन्न भागों पर बजने वाले वर्ण और उनके उदाहरण: (क) चाँट: तबले के किनारे पर बजने वाली हल्की ध्वनि। उदाहरण: तिट, टिट (ख) लव: तबले के किनारे का भाग जहाँ हल्की और तीव्र ध्वनि निकलती है। उदाहरण: तिर, तिरकिट (ग) तबले की स्याही: तबले के मध्य काले भाग से निकलने वाली गहरी और तीव्र ध्वनि। उदाहरण: धागे, गदिगन (घ) डगो का मैदान: डगो के सफेद भाग से निकलने वाली मध्यम तीव्रता की ध्वनि। उदाहरण: चिटचिट, किटतक

1. तबला वाद्य पर बजने वाले मूलतः 16 वर्ण माने जाते हैं। 2. ‘दी’ एक संयुक्त वर्ण है। 3. ‘ती’ वर्ण तबले की लव पर बजाया जाता है। 4. ‘तिट’ बोल डगो की स्याही पर बजने वाला बोल है। 5. ‘तिरकिट’ एक ऐसा बोल है जो तबला और डगो पर बजता है। 6. ‘तूना’ बोल सिर्फ तबले पर बजाया जाता है। 7. ‘क’ वर्ण तबले की स्याही पर बजने वाला वर्ण है। 8. बोल का अर्थ ही वर्ण होता है।

1. सही - तबला वाद्य पर मूलतः 16 वर्ण माने जाते हैं। 2. सही - ‘दी’ एक संयुक्त वर्ण है जिसमें दो ध्वनियाँ मिलती हैं। 3. सही - ‘ती’ वर्ण तबले की लव (किनारे) पर बजाया जाता है। 4. गलत - ‘तिट’ बोल डगो की स्याही पर नहीं बल्कि मैदान या लव पर बजता है। 5. सही - ‘तिरकिट’ ऐसा बोल है जो तबला और डगो दोनों पर बजता है। 6. सही - ‘तूना’ बोल केवल तबले पर बजाया जाता है। 7. सही - ‘क’ वर्ण तबले की स्याही पर बजने वाला वर्ण है। 8. गलत - बोल और वर्ण में अंतर होता है; बोल ताल और लय के अनुसार बजाए जाने वाले शब्द होते हैं

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