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कैसे दिखते हैं तबला एवं पखावज वाद्य? | Class 11 Sangeet Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

कैसे दिखते हैं तबला एवं पखावज वाद्य? | Class 11 Sangeet Notes

कैसे दिखते हैं तबला एवं पखावज वाद्य? – this guide gives you a concise, exam-ready overview of कैसे दिखते हैं तबला एवं पखावज वाद्य? from Class 11 Sangeet, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

प्रसिद्ध तबला वादक: उस्ताद अहमद जान थिरकवा

उस्ताद अहमद जान थिरकवा का जन्म 1891 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर में एक प्रसिद्ध और पारंपरिक संगीतज्ञ परिवार में हुआ था। उनके पिता हुसैन बख्श, चाचा शेर खाँ, नाना कलंदर बख्श, मामा फैयाज खाँ और वस्त्रा खाँ सभी अच्छे संगीतज्ञ थे, जिनसे उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। उनकी गुरु की खोज तब पूरी हुई जब उन्होंने मुंबई में रहने वाले उस्ताद मुनीर खाँ को अपना गुरु बनाया। बाद में दिल्ली घराने के खलीफा उस्ताद नत्थू खाँ का मार्गदर्शन भी प्राप्त किया।

उनकी शुरुआती सफलता महाराष्ट्र नाटक कंपनी में ताबलिक की हैसियत से काम करने पर मिली। उन्हें रामपुर सहित अनेक राजाओं का राज्याश्रय प्राप्त था। रामपुर के नवाब ने उनकी थिरकती अंगुलियों से प्रभावित होकर उन्हें 'थिरकवा' की उपाधि दी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे लखनऊ स्थित भातखंडे संगीत महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए।

खाँ साहब चारों पट के तबलिये थे। उन्होंने स्वतंत्र वादन के साथ-साथ गायन, वादन और कथक नृत्य की संगति भी की। उन्होंने कथक नृत्य के शिखर पुरुष पंडित अच्छन महाराज और पंडित बिरजू महाराज के नृत्य की संगति की। लगभग हर तबला घराने के ताबलिक जो अपने वादन की शुरुआत 'धींकड धींधा 5 धा धींधा धाति धाति 5 धा धींधा' से करते हैं, उसे प्रचारित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है।

उनके वादन में गतिशीलता कम थी, लेकिन मध्यम गति में उनका तबला वादन लोगों को सम्मोहित कर देता था। उन्होंने पारंपरिक गुणों का पालन करते हुए वादन को कर्णप्रिय, रोचक और सरस बनाए रखा। सेवानिवृत्ति के बाद वे मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफार्मिंग आर्ट्स में तबला अध्यापक रहे।

उन्हें कई मान-सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक और पद्मभूषण शामिल हैं। उनके जीवन पर भारत सरकार द्वारा वृत्तचित्र बनाया गया। उनके शिष्यों में पंडित निखिल घोष, लालजी गोखले, प्रेम बल्लभ, सूर्यकांत गोखले, सुधीर संसारे, राजकुमार शर्मा आदि प्रमुख हैं। उनका आकस्मिक निधन 13 जनवरी 1976 को लखनऊ में हुआ।

📊 Diagram: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद नामक शहर में संगीतज्ञों के प्रसिद्ध और पारंपरिक परिवार में सन् 1891 में, उस्ताद अहमद जान थिरकवा का जन्म हुआ था। पिता हुसैन बख्श, चाचा शेर खाँ, नाना कलंदर बख्श, मामा फैयाज खाँ

🧪 Activity: प्रसिद्ध तबला वादकों के जीवन परिचय पर शोध करें और कक्षा में प्रस्तुत करें।

🔗 Connection: यह अनुभाग अभ्यास प्रश्नों और विद्यार्थियों के लिए गतिविधियों से जुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तबला भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रमुख ताल वाद्य है, जिसमें दो ड्रम होते हैं। इनमें दायाँ ड्रम को क्या कहा जाता है?

ध्यान

तबला के बायाँ ड्रम की बनावट कैसी होती है?

बड़ा और घड़ा जैसा

तबला की सतह पर काले रंग का धब्बा किस नाम से जाना जाता है?

सियाही

तबला वादक किस अंग का मुख्य रूप से प्रयोग करता है?

उंगलियाँ और हथेलियाँ

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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