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Chapter 2

🎓 Class 11📖 Tabla evam Pakhawaj📖 7 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~11 मिनट
Chapter 1अध्याय 2 / 8Chapter 3

Chapter 2अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

तबला

व्याख्या

तबला

तबला उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख अवनद्ध वाद्य है, जिसका प्रयोग संगीत में गति या लय के मापन के लिए किया जाता है। यह वाद्य शास्त्रीय, उपशास्त्रीय, सुगम संगीत के साथ-साथ विभिन्न वाद्यों और कथक नृत्य में भी तालबद्धता हेतु उपयोग किया जाता है। तबला अपने नाद सौंदर्य और नाद विविधता के कारण विश्व संगीत मंच पर एक महत्वपूर्ण और श्रेष्ठ स्थान रखता है। आज के संगीत जगत में तबला न केवल संगीत वादन के लिए, बल्कि एकल वादन के लिए भी प्रमुखता से जाना जाता है। संगीत सम्मेलनों में गायन, वादन और नृत्य के साथ-साथ तबला एकल वादन के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जिससे कार्यक्रम की आकर्षकता बढ़ जाती है। तबला एक ऊर्ध्वमुखी वाद्य है, जिसमें दो मुख्य अंग होते हैं: दायाँ और बायाँ। दायाँ तबला जिसे दाहिने हाथ से बजाया जाता है, और बायाँ तबला जिसे बायें हाथ से बजाया जाता है, जिसे डंगा भी कहते हैं। तबला लकड़ी से बना होता है, जिसमें शीशाम, नीम और बीजासार की लकड़ी का प्रयोग होता है। तबले की लकड़ी के अंदर तीन हिस्से खोखले और एक हिस्सा ठोस होता है, जो नीचे की तरफ होता है ताकि तबला बजाते समय अनावश्यक हिलने से बचा जा सके। बायाँ डंगा पीतल, ताँबा या मिट्टी का बना होता है। मिट्टी के डंगे की आवाज़ सर्वोत्तम मानी जाती है, परंतु टूटने की संभावना अधिक होने के कारण आजकल पीतल या ताँबे के डंगे का अधिक प्रयोग होता है। डंगे का मुख दायें तबले के मुख की तुलना में बड़ा होता है। तबला के प्रमुख अंगों में पूड़ी, चाँटी, लव, स्याही, गजरा, गड्डा, बद्धी और इंडरी शामिल हैं। पूड़ी तबले के मुख पर बकरे की खाल की बनी होती है, जिसमें तीन भाग होते हैं: किनार या चाँट, लव और स्याही। दायें तबले की पूड़ी पतली होती है ताकि ऊँचे स्वर उत्पन्न हो सकें, जबकि डंगे की पूड़ी मोटी होती है जिससे नीचे स्वर मिलते हैं। चाँट पूड़ी के किनारे की चमड़े की पट्टी होती है, जिस पर दायें तबले के वर्ण 'ता' या 'न' बजाए जाते हैं। लव पूड़ी के बीच का खुला स्थान है, जहां दायें तबले पर 'ता' और 'ति' तथा डंगे पर 'गे' और 'घे' वर्ण बजाए जाते हैं। स्याही पूड़ी के बीच में काले रंग की गोलाकार आकृति होती है, जो लोहे के चूर्ण (राख) और लेई के मिश्रण से बनाई जाती है। इसे दायें तबले की पूड़ी के बीच में लगाया जाता है, जबकि डंगे में इसे चाँटी की तरफ थोड़ा खिसकाकर लगाया जाता है। गजरा तबले के मुख पर कसने के लिए चमड़े की पतली बद्धियों की माला होती है, जिसमें 16 छिद्र होते हैं जिन्हें घर कहा जाता है। गजरे पर आघात करके स्वर को ऊँचा या नीचा किया जा सकता है। गड्डे लकड़ी के छोटे बेलनाकार टुकड़े होते हैं, जो तबले की बद्धियों के बीच फंसे होते हैं और इन्हें हथौड़ी से खिसकाकर स्वर मिलाया जाता है। बद्धी चमड़े की डोरी होती है जो गजरे के छिद्रों से होकर गड्डों को दबाती है और पूड़ी को कसती है। इंडरी या गुडरी कपड़े, नारियल की डोरी या मूंज से बनी गोल आकृति होती है, जिस पर तबला रखा जाता है ताकि बजाते समय वह न हिले और गूंज बढ़े। इस प्रकार तबले की बनावट और उसके विभिन्न अंगों की वैज्ञानिक समझ से यह ज्ञात होता है कि किस प्रकार लकड़ी, चमड़ा, धातु और अन्य सामग्री के संयोजन से तबले की ध्वनि की गुणवत्ता और स्वर की विविधता प्राप्त होती है।

  • तबला उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत का प्रमुख ताल वाद्य है।
  • तबला दो अंगों से बना होता है: दायाँ (तबला) और बायाँ (डंगा)।
  • दायाँ तबला लकड़ी का होता है, जबकि बायाँ डंगा पीतल, ताँबा या मिट्टी का होता है।
  • तबले की पूड़ी पर तीन मुख्य भाग होते हैं: चाँट, लव और स्याही।
  • गजरा, गड्डा और बद्धी तबले के स्वर को मिलाने और कसने के लिए उपयोग होते हैं।
  • इंडरी तबले को स्थिर रखने और ध्वनि बढ़ाने में सहायक होती है।
  • 📌 अवनद्ध वाद्य: ऐसा वाद्य जिसमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए हवा की आवश्यकता नहीं होती।
  • 📌 पूड़ी: तबले के मुख पर बकरे की खाल की परत।
  • 📌 चाँट: पूड़ी के किनारे की चमड़े की पट्टी।

पखावज

व्याख्या

पखावज

पखावज उत्तर भारतीय संगीत का एक प्रमुख अवनद्ध वाद्य है, जो मुख्यतः धूपद और धमार गायकी में संगति के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त एकल वादन भी बहुत लोकप्रिय है। पखावज दो मुखी वाद्य है जिसे लिटाकर बजाया जाता है। इसका मूल भाग शीशाम, बीजा या आम की लकड़ी से बनाया जाता है। इसकी लंबाई लगभग 75 से 80 सेंटीमीटर होती है। पखावज का दायाँ मुख छोटा और बायाँ मुख बड़ा होता है। दायें मुख का व्यास लगभग 16 से 18 सेंटीमीटर होता है, जबकि बायें मुख का व्यास लगभग 24 से 25 सेंटीमीटर होता है। पखावज के दोनों मुखों का व्यास उसकी लंबाई के अनुपात के अनुसार घटाया या बढ़ाया जा सकता है। पखावज के बायें मुख पर गीला आटा लगाया जाता है, जिससे इसका स्वर नीचा और गंभीर होता है। दायें मुख पर स्याही का लेप होता है, जो इसे ऊँचे स्वर में रखता है। पखावज के दोनों मुखों पर बकरे के चमड़े की पूड़ी लगी होती है, जो गजरे और बद्धियों द्वारा कसकर एक साथ जोड़ी जाती है। बद्धियाँ भैंस या ऊँट के चमड़े से बनाई जाती हैं। पखावज के गजरे पर 16 घर होते हैं, जिनकी सहायता से स्वर को चढ़ाया या उतारा जाता है। बद्धियों में लकड़ी के आठ गड्ढे फंसे होते हैं, जो वाद्य को मिलाने में मदद करते हैं। पखावज की ध्वनि अधिक जोरदार, गूँजमय और आँसदार होती है। इसका स्वर मुख्यतः लकड़ी के खोल पर निर्भर करता है। पखावज और दक्षिण के मृदंगम् में आकार का बड़ा अंतर होता है, पखावज मृदंगम् से बड़ा होता है। पखावज में मुख्य रूप से चौताल, धमार, सूलताल, आदिताल, तीव्रा, बसंत, लक्ष्मी आदि तालों का प्रयोग होता है। प्राचीन काल में मृदंगम् या पखावज का प्रयोग भक्ति संगीत के लिए किया जाता था। रामायण और महाभारत काल में इसके प्रयोग का उल्लेख मिलता है। पारंपरिक मंदिरों में आज भी इसका उपयोग होता है।

  • पखावज उत्तर भारतीय संगीत का प्रमुख अवनद्ध वाद्य है।
  • यह दो मुखी वाद्य है, जिसमें दायाँ मुख छोटा और बायाँ मुख बड़ा होता है।
  • पखावज की लंबाई लगभग 75 से 80 सेंटीमीटर होती है।
  • बायें मुख पर गीला आटा लगाया जाता है जिससे स्वर नीचा होता है।
  • दायें मुख पर स्याही का लेप होता है जो स्वर को ऊँचा बनाता है।
  • गजरे पर 16 घर होते हैं, जिनसे स्वर मिलाया जाता है।
  • पखावज की ध्वनि जोरदार, गूँजमय और आँसदार होती है।
  • 📌 अवनद्ध वाद्य: ऐसा वाद्य जिसमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए हवा की आवश्यकता नहीं होती।
  • 📌 पूड़ी: पखावज के मुखों पर बकरे के चमड़े की परत।
  • 📌 गजरा: पखावज की पूड़ी को कसने वाली चमड़े की माला।

तबला और पखावज के तालों का अध्ययन

अवधारणा

तबला और पखावज के तालों का अध्ययन

तबला और पखावज दोनों ही भारतीय शास्त्रीय संगीत में तालबद्धता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवनद्ध वाद्य हैं। हालांकि, इनके तालों में कुछ भिन्नताएँ पाई जाती हैं। तबला पर मुख्यतः सूलताल, रूपक, तीव्रा, झपताल जैसे ताल बजाए जाते हैं, जो उत्तर भारतीय संगीत के वि

अभ्यास प्रश्नChapter 2

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. संगीत जगत में तबला वाद्य जाना जाता है— (क) एकल वादन हेतु (ख) संगीत हेतु (ग) ध्रुपद की संगीत हेतु (घ) क तथा ख दोनों के लिए
A.(क) एकल वादन हेतु
B.(ख) संगीत हेतु
C.(ग) ध्रुपद की संगीत हेतु
D.(घ) क तथा ख दोनों के लिए

उत्तर:

संगीत जगत में तबला वाद्य को मुख्यतः एकल वादन हेतु और संगीत के लिए जाना जाता है, अतः सही उत्तर है (घ) क तथा ख दोनों के लिए।

व्याख्या:

तबला का प्रयोग एकल वादन के साथ-साथ संगीत में भी किया जाता है, इसलिए विकल्प (क) और (ख) दोनों सही हैं। इसलिए विकल्प (घ) सही उत्तर है।

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Q2.2. दायाँ तबला किससे बनता है? (क) मिट्टी (ख) पीतल (ग) ताँबा (घ) लकड़ी
A.(क) मिट्टी
B.(ख) पीतल
C.(ग) ताँबा
D.(घ) लकड़ी

उत्तर:

दायाँ तबला लकड़ी से बनता है, अतः सही उत्तर है (घ) लकड़ी।

व्याख्या:

तबले का दायाँ भाग लकड़ी से निर्मित होता है जो बजाने पर विशिष्ट स्वर उत्पन्न करता है।

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Q3.3. किस वस्तु से निर्मित डगो की आवाज़ सर्वोत्तम मानी जाती है? (क) लकड़ी (ख) धातु (ग) मिट्टी (घ) फाइबर
A.(क) लकड़ी
B.(ख) धातु
C.(ग) मिट्टी
D.(घ) फाइबर

उत्तर:

डगो की आवाज़ मिट्टी से निर्मित होने पर सर्वोत्तम मानी जाती है, अतः सही उत्तर है (ग) मिट्टी।

व्याख्या:

डगो मिट्टी से बनने पर उसकी आवाज़ में गहराई और स्पष्टता आती है, जो अन्य सामग्रियों की तुलना में बेहतर होती है।

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Q4.4. चाँट पर बजने वाले वर्ण कौन-से हैं? (क) ता/न (ख) गे/घे (ग) धा/धिं (घ) तू/ना
A.(क) ता/न
B.(ख) गे/घे
C.(ग) धा/धिं
D.(घ) तू/ना

उत्तर:

चाँट पर बजने वाले वर्ण धा/धिं होते हैं, अतः सही उत्तर है (ग) धा/धिं।

व्याख्या:

तबले के चाँट भाग पर धा और धिं जैसे वर्ण बजाए जाते हैं जो उसकी विशिष्ट ध्वनि बनाते हैं।

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Q5.5. पखावज में कितने घर होते हैं? (क) 12 (ख) 10 (ग) 8 (घ) 16
A.(क) 12
B.(ख) 10
C.(ग) 8
D.(घ) 16

उत्तर:

पखावज में 12 घर होते हैं, अतः सही उत्तर है (क) 12।

व्याख्या:

पखावज के मुख पर 12 घर होते हैं जो उसकी आवाज़ के विभिन्न स्वर उत्पन्न करते हैं।

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Q6.6. पखावज किससे बनता है? (क) लकड़ी (ख) मिट्टी (ग) धातु (घ) अन्य
A.(क) लकड़ी
B.(ख) मिट्टी
C.(ग) धातु
D.(घ) अन्य

उत्तर:

पखावज लकड़ी से बनता है, अतः सही उत्तर है (क) लकड़ी।

व्याख्या:

पखावज का मुख्य भाग लकड़ी से निर्मित होता है जो इसकी ध्वनि गुणवत्ता के लिए आवश्यक है।

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Q7.7. पखावज के बायें मुख पर क्या लगाते हैं? (क) गीला आटा (ख) लोहे का चूर्ण (ग) स्याही का लेप (घ) केमिकल पाउडर
A.(क) गीला आटा
B.(ख) लोहे का चूर्ण
C.(ग) स्याही का लेप
D.(घ) केमिकल पाउडर

उत्तर:

पखावज के बायें मुख पर स्याही का लेप लगाया जाता है, अतः सही उत्तर है (ग) स्याही का लेप।

व्याख्या:

स्याही के लेप से पखावज के बायें मुख की आवाज़ में विशिष्टता आती है।

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Q8.8. पखावज की बन्दियाँ किससे बनी होती हैं? (क) बकरे का चमड़ा (ख) भैंस का चमड़ा (ग) नारियल की मूँज (घ) सूती डोरी
A.(क) बकरे का चमड़ा
B.(ख) भैंस का चमड़ा
C.(ग) नारियल की मूँज
D.(घ) सूती डोरी

उत्तर:

पखावज की बन्दियाँ नारियल की मूँज से बनी होती हैं, अतः सही उत्तर है (ग) नारियल की मूँज।

व्याख्या:

नारियल की मूँज से बनी बन्दियाँ पखावज के दोनों मुखों को बाँधने में उपयोग होती हैं।

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